Makhana Farming: छत्तीसगढ़ के धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की मिला आय बढ़ाने का नया जरिया

Agricultural Diversification और Women Empowerment की नई पहल-Makhana Farming in Dhamtari

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कृषि विविधीकरण (Agricultural Diversification) और महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) की दिशा में एक अहम पहल सामने आई है। Makhana Farming in Dhamtari. पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़ते हुए, अब धमतरी की ग्रामीण महिलाएं Makhana Farming को अपनाकर आत्मनिर्भर बनेंगी।

कलेक्टर की पहल से मिली नई दिशा

Makhana Farming in Dhamtari

धमतरी कलेक्टर द्वारा मखाना खेती के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे Sustainable Agriculture को बढ़ावा मिल सके।

महिला किसान समूहों का अध्ययन भ्रमण और प्रशिक्षण

Makhana Farming in Dhamtari

विकासखंड नगरी के ग्राम सांकरा से 40 इच्छुक महिला किसान समूह का दल रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम लिंगाडीह पहुँचा। यहाँ महिलाओं ने मखाना प्रोसेसिंग (Makhana Processing) और आधुनिक खेती तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया। इस अध्ययन भ्रमण की संपूर्ण व्यवस्था जिला उद्यानिकी विभाग, धमतरी द्वारा की गई।

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धान से आगे सोच, मखाना से समृद्धि

कम जोखिम और स्थायी आय

अब “धान से आगे सोच” के साथ मखाना खेती ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलने का माध्यम बन रही है। छोटी-छोटी डबरियों से शुरू होकर यह खेती महिलाओं को Financial Independence की ओर ले जा रही है।

90 एकड़ में शुरू हुई खेती

Makhana Farming in Dhamtari

कलेक्टर के प्रयासों से ग्राम राखी, पीपरछेड़ी, दंडेसरा, राँकाडोह और सांकरा में लगभग 90 एकड़ क्षेत्र में डबरी चिन्हांकन कर मखाना खेती की शुरुआत हो चुकी है। महिला किसानों ने स्थानीय Ojas Farm का भ्रमण कर खेती से लेकर विपणन तक की पूरी प्रक्रिया को नजदीक से समझा।

उत्पादन लागत और Market Potential की जानकारी

महिला किसान समूहों की भूमिका

मखाना की खेती के लिए जलभराव वाली डबरी, तालाब या जल संरचनाएं उपयुक्त होती हैं। उन्होंने Seed Selection, Production Cost और Market Potential पर विस्तार से बताया. सरकारी सहयोग से यह फसल अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है।

कम जोखिम, स्थायी आय का स्रोत

महिला किसान समूहों की भूमिका

विशेषज्ञ श्री शिव साहू ने मखाना खेती को Low Risk Crop बताते हुए कहा कि इससे किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत स्रोत विकसित किया जा सकता है। महिला किसानों ने भी इसे आत्मनिर्भरता का नया अवसर बताया।

मखाना प्रोसेसिंग से बढ़ता मुनाफा

बिहार के दरभंगा निवासी मखाना प्रोसेसिंग विशेषज्ञ श्री रोहित साहनी फोड़ी ने बताया कि 1 किलो मखाना बीज से लगभग 200–250 ग्राम पॉप तैयार होता है, जिसकी बाजार कीमत ₹700 से ₹1000 प्रति किलो तक होती है। यदि किसान स्वयं Processing और Packaging करें तो प्रति एकड़ लाभ कई गुना बढ़ सकता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मखाना खेती

महिला किसान समूहों की भूमिका-Makhana Farming in Dhamtari

RAIPUR में स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक ने बताया कि प्रति एकड़ लगभग 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और औसत उत्पादन 10 क्विंटल तक प्राप्त किया जा सकता है। छह माह की अवधि वाली यह फसल कीट-व्याधि और चोरी जैसी समस्याओं से लगभग मुक्त रहती है।

सरकारी योजनाएं और सब्सिडी का लाभ

Makhana Farming in Dhamtari

मखाना खेती को बढ़ावा देने के लिए Training, Technical Support और Subsidy Schemes उपलब्ध हैं। किसानों को मखाना बोर्ड एवं राज्य शासन की योजनाओं की भी जानकारी दी गई।

छत्तीसगढ़ का पहला मखाना प्रोसेसिंग केंद्र

Makhana Farming in Dhamtari

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में पहली बार व्यावसायिक मखाना उत्पादन आरंग विकासखंड के ग्राम लिंगाडीह में स्वर्गीय श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा शुरू किया गया था, जहाँ राज्य का पहला Makhana Processing Center भी स्थापित किया गया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान

आज मखाना उत्पादन छत्तीसगढ़ की नई कृषि पहचान बनता जा रहा है। धमतरी की महिला किसानों का यह प्रयास न केवल कृषि नवाचार (Agricultural Innovation) का उदाहरण है, बल्कि यह दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक संकल्प से Rural Economy को नई दिशा दी जा सकती है।

Sonal Gupta

Content Writer

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