Lakhpati Didi Yojna: स्व-सहायता समूह से मिली ज्योति को नई पहचान!

  • Lakhpati Didi Yojna
  • लखपति दीदी ज्योति वैष्णव
  • दोना-पत्तल व्यवसाय से बदली किस्मत

Lakhpati Didi Yojna: मेहनत, अडिग आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन ये तीन ऐसे सूत्र हैं जो किसी भी साधारण महिला को सफलता की बुलंदियों तक पहुँचा सकते हैं। कबीरधाम जिले के ग्राम मटका की रहने वाली श्रीमती ज्योति वैष्णव आज इसी सफलता का जीता-जागता उदाहरण हैं। कभी मजदूरी कर घर चलाने वाली ज्योति आज एक सफल उद्यमी और ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं। उनकी यह यात्रा संघर्ष से स्वावलंबन की एक अद्भुत कहानी है।

संघर्ष का दौर और समूह का साथ

ज्योति वैष्णव का जीवन पहले चुनौतियों से भरा था। गाँव में मजदूरी ही आय का एकमात्र जरिया था, जिससे परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना बेहद कठिन होता था। अनिश्चित आय के कारण भविष्य की चिंता हमेशा बनी रहती थी।

उनके जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब उन्हें गाँव में संचालित “जय माँ वैभव लक्ष्मी महिला स्व-सहायता समूह” के बारे में पता चला। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनते देख ज्योति ने समूह से जुड़ने का फैसला किया। यहाँ से न केवल उनकी बचत की आदत शुरू हुई, बल्कि उन्हें अपनी आजीविका शुरू करने के लिए आवश्यक आर्थिक आधार भी मिला।

दोना-पत्तल निर्माण

आत्मनिर्भरता का आधार

समूह से जुड़ने के बाद ज्योति को शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से मदद मिली। समूह को प्राप्त चक्रीय निधि (4 हजार रुपये) और सामुदायिक निवेश कोष (15 हजार रुपये) के साथ-साथ उन्हें बैंक से 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि ने उनके सपनों को पंख दिए।

ज्योति ने इस पूंजी का उपयोग दोना-पत्तल निर्माण इकाई और एक छोटी किराना दुकान शुरू करने में किया। दोना-पत्तल की माँग बाजार में हमेशा बनी रहती है, और ज्योति ने अपनी गुणवत्ता और मेहनत से जल्द ही आसपास के क्षेत्रों में अपनी पहचान बना ली। देखते ही देखते, उनका यह व्यवसाय परिवार की आय का प्रमुख स्रोत बन गया।

आय में वृद्धि और ‘लखपति दीदी’ का सफर

श्रीमती ज्योति वैष्णव की सफलता केवल उनके व्यवसाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार की कुल आर्थिक मजबूती में झलकती है। आज वे बहुआयामी आजीविका मॉडल पर काम कर रही हैं,

  • दोना-पत्तल निर्माण- मुख्य आय का स्रोत।
  • किराना दुकान- दैनिक जरूरतों के लिए स्थिर आय।
  • खेती व अन्य- परिवार का पारंपरिक सहारा।

इन सभी स्रोतों को मिलाकर उनकी कुल वार्षिक आय अब 1 लाख 35 हजार रुपये तक पहुँच गई है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद समाज और गाँव में उनका सम्मान बढ़ा है। अब वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ-साथ एक सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ रही हैं।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

ज्योति वैष्णव आज कबीरधाम जिले की अन्य महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं। वे साबित करती हैं कि स्व-सहायता समूह (SHG) केवल बचत का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे सशक्त मंच है।

वे कहती हैं, “समूह से जुड़ने के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। अब मुझे आर्थिक तंगी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।” उनकी यह कहानी छत्तीसगढ़ सरकार की ‘लखपति दीदी’ योजना और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की सफलता को प्रमाणित करती है।

Positive Takeaway

ज्योति वैष्णव की सफलता ग्रामीण भारत की उस बदलती तस्वीर को दिखाती है, जहाँ महिलाएं घर की दहलीज से बाहर निकलकर उद्यमिता के नए आयाम गढ़ रही हैं। दोना-पत्तल के छोटे से व्यवसाय ने न केवल उनके परिवार को गरीबी के जाल से निकाला, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी दी। आज मटका गाँव की यह बेटी पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणा है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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