Divyangjan Diwas: इसी दिन हुई थी सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत

Divyangjan Diwas: 3 दिसंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुगम्य भारत अभियान की शुरुआत की थी। इस दिन को दिव्यांगजन दिवस के रूप में मनाया जाता है। आज यानी 3 दिसंबर 2024 को इस अभियान के 9 साल पूरे हो गए हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगों को मुख्य धारा से जोड़ना, सार्वजनिक स्थानों को उनके लिए सुगम्य बनाना है। ये अभियान उन्हें उनके अधिकारों के लिए जागरूक भी करता है।

सुगम्य भारत अभियान के मुख्य उद्देश्य

इस अभियान का उद्देश्य सार्वजनिक स्थानो को दिव्यांगों के लिए भी सहज बनाना है। इन 9 सालों में अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल्स, रेलवे स्टेश, बस स्टैंड जैसी जगहों पर दिव्यांगो के लिए से रैंप बनाए गए हैं। साथ ही सुलभ शौचालयों में दिव्यांगों के लिए अलग व्यवस्था भी की गई है। अभियान का उद्देश्य पब्लिक ट्रांसपोर्ट और नई तकनीकों को दिव्यांगों के लिए इजी एक्सेसेबल बनाना भी है। दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता लाने के लिए ही हर साल दिव्यांगजन दिवस मनाया जाता है।

सुगम्य भारत के तहत की गई ये पहल

अभियान की शुरुआत के बाद सार्वजनिक जगहों का ऑडिट किया गया और उसे दिव्यांगों के लिए इजी एक्सेसीबल बनाने के लिए पहल की गई। जैसे अब आपको हर सार्वजनिक स्थानों पर सीढियों के साथ दिव्यांगजनों के लिए अलग से रैंप दिखाई देता होगा। सार्वजनिक शौचालयों में दिव्यांगों के लिए अलग से टॉयलेट बनाए जाते हैं। जागरूकता अभियानों के द्वारा लोगों तक दिव्यांगों की जरूरतों को पहुंचाया गया।
इतना ही नहीं टेक्नोलॉजी को भी ऐसे लोगों के लिए सुगम बनाने के लिए पहल की गई जो देखने और सुनने में सक्षम नहीं हैं।

विकलांग को दिव्यांग कहने की अपील

इसी दिन विकलांग की जगह दिव्यांग कहे जान की शुरुआत हुई थी।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह अपील दिव्यांगों के लिए समाज के नजरिए में बदलाव लाने और दिव्यांगों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए किया था। पीएम ने  रेडियो शो ‘मन की बात’ में विकलांग को ‘दिव्यांगजन’ कहने की अपील की थी।

RPWD एक्ट 2016 में हुए अहम बदलाव

पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर ऐतिहासिक कदम उठाते हुए RPWD एक्ट 2016 में पहली बार स्पीच और लैंग्वेज डिसएबिलिटी और स्पेसिफिक लैंग्वेज सीखने को डिसएबिलिटी जैसी कैटेगरी इसमें शामिल किया गया। साथ ही पहली बार एसिड अटैक सर्वाइवर्स को दिव्यांग व्यक्तियों को दिव्यांग माना गया। ताकी उन्हें सभी लाभ दिए जा सकें।  

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Rishita Diwan

Content Writer

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