Ramsar sites India: खीचन और मेनार अब रामसर स्थल!

Ramsar sites India: भारत ने एक और हरित उपलब्धि अपने नाम की है। राजस्थान के दो खूबसूरत आर्द्रभूमि क्षेत्र खीचन (फलोदी) और मेनार (उदयपुर) को रामसर स्थलों की सूची में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही भारत में अब रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 91 हो चुकी है।

रामसर साइट्स क्या होती हैं?

  • रामसर स्थल उन आर्द्रभूमियों को कहा जाता है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जैव विविधता, पानी की गुणवत्ता और पारिस्थितिकी संतुलन के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
  • इसका नाम ईरान के शहर रामसर पर रखा गया जहां 2 फरवरी 1971 को रामसर कन्वेंशन साइन हुआ था। भारत इस संधि में 1982 से शामिल है।

खीचन और मेनार

  • खीचन (फलोदी)- यह स्थल अपने डेमोइसल क्रेन्स यानी कुरजां पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। हर साल हजारों की संख्या में ये प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, जिससे ये इलाका बर्ड वॉचर्स का हॉटस्पॉट बन गया है।
  • मेनार (उदयपुर)-  इसे राजस्थान का “बर्ड विलेज” भी कहा जाता है। यहां दर्जनों किस्म के जलपक्षी हर साल डेरा डालते हैं। स्थानीय समुदाय ने वर्षों से इस जगह को संरक्षित रखा है, जो इसकी बड़ी खासियत है।

पर्यावरण नीति का असर

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस मौके पर कहा कि यह उपलब्धि पीएम मोदी के पर्यावरण फोकस्ड विजन का ही नतीजा है। सरकार ने बीते वर्षों में न सिर्फ आर्द्रभूमियों को बचाने, बल्कि उन्हें संरक्षित करने और इको-टूरिज्म के जरिए स्थानीय रोजगार बढ़ाने पर भी काम किया है।

वेटलैंड्स और मानव जीवन

वर्ष 2024 में विश्व आर्द्रभूमि दिवस की थीम रही “Wetlands and Human Wellbeing”। इसका मकसद यह बताना है कि वेटलैंड्स न सिर्फ पशु-पक्षियों का घर हैं, बल्कि ये बाढ़ से बचाव, स्वच्छ जल की आपूर्ति, जैव विविधता को संरक्षित रखने, और मानव स्वास्थ्य में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

अंकसमुद्र बर्ड रिज़र्व

हाल ही में चर्चा में आया अंकसमुद्र पक्षी संरक्षण रिज़र्व भी एक खास उदाहरण है। यह मानव निर्मित जलाशय है जो आज सैकड़ों प्रवासी पक्षियों का घर बन चुका है। ये दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास कैसे वैश्विक महत्त्व पा सकते हैं।

वेटलैंड्स बचेंगे, तो जीवन बचेगा

भारत का हर नया रामसर स्थल, न सिर्फ हमारी प्राकृतिक धरोहरों की ताकत को दिखाता है, बल्कि ये बताता है कि हम जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता संकट को गंभीरता से ले रहे हैं। अब जिम्मेदारी हमारी है — इन स्थलों को देखने, समझने और संरक्षित करने की।

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Rishita Diwan

Content Writer

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