बंजर पड़ी ज़मीन को कपल ने बनाया जंगल, सैंकड़ों पेड़ों और खेत के साथ आज बन गया अनोखा ऑर्गेनिक फार्म स्टे!

दुनिया में अब भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनका प्रकृति के प्रति प्रेम देखते ही बनता है। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं बेंगलुरू का एक कपल हरिहरन और पद्मिनी, जिन्होंने आज से करीब आठ साल पहले एक बंजर जमीन पर काम करना शुरू किया और आज वहां पूरा एक जंगल है। हरा-भरा खेत है, जहां जैविक तरीके से कई तरह के फल और सब्जियां उगाई जाती है। इस ऑर्गेनिक फार्म के बीचों-बीच बनाया गया है लकड़ी का एक नेचुरल और खूबसूरत कॉटेज जिसे महसूस करने दूर-दूर पर्यटक आने लगे हैं।

सालों की मेहनत से तैयार हुआ ऑर्गेनिक फार्म

 

सस्टेनेबल लाइफ पर विश्वास करने वाला ये कपल हरिहरन और पद्मिनी ने साल 2015 में बेंगलुरु से लगभग 75 km की दूरी पर, कृष्णागिरी के देंकनिकोट्टई से 5 किलोमीटर अंदर नोगानोर गाँव में लगभग 5 एकड़ की एक ज़मीन ख़रीदी, तब वहां सिर्फ पथरीली और बंजर जमीन थी।

लेकिन हरिहरन और पद्मिनी के इरादे मजबूत थे कि यहां प्रकृति का कुछ खोया हुआ लौटाया जाए। उन्होंने यहाँ खेती करने का फैसला किया और उनकी मेहनत रंग लाई।

काफ़ी रिसर्च और सालों की मेहनत से के बाद इस कपल ने अपनी ज़मीन को उपजाऊ बनाने में सफलता हासिल की। उन्होंने यहाँ कई पेड़-पौधे लगाए और देखते ही देखते एक खेत तैयार कर दिया। उन्होंने इसे ‘देंकनि ऑर्गेनिक फार्म्स’ नाम दिया।


अच्छी सेहत और स्वस्थ जीवनशैली के लिए हरिहरन और पद्मिनी ने केमिकल फ्री और जैविक खेती की, जैविक फसलों और सब्जियों से उन्होंने अपनी जमीन को संवारा। वे खुद तो प्रकृति से जुड़े साथ ही लोगों को सस्टेनेबिलिटी के करीब ले जाने के उद्देश्य से अपने फार्म के बीच में एक ईको-फ्रेंडली कॉटेज का भी निर्माण किया और मेहमानों के लिए देंकनि फार्म स्टे के दरवाज़े खोले। ताकि हर व्यक्ति प्रकृति का आनंद ले सके।

इस फार्म स्टे को 1800 स्क्वायर फ़ीट के एरिया में, पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पारंपरिक तरीके से तैयार किया गया है। 2 मंजिला यह नेचुरल कॉटेज पूरी तरह से लकड़ी और स्थानीय पत्थरों से बनाया गया है। कॉटेज के इंटीरियर और फर्नीचर देवदार की लकड़ी से बने हैं, यहां की हर चीज ईको-फ्रेंडली है।

देंकनि फार्म को सेल्फ सस्टेनेबल बनाने के लिए यहाँ सोलर फेंसिंग और ड्रिप इरीगेशन सिस्टम की सुविधा दी गई है। इसके अलावा, रेन वॉटर हॉर्वेस्टिंग के लिए यहाँ 2,50,000 लीटर की कैपेसिटी का एक तालाब भी है जिसमें बारिश का पानी जमा करके कई तरीकों से रीयूज़ करते हैं। ये कपल बता रहा है कि कैसे पर्यावरण की देखभाल करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
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Dr. Kirti Sisodia

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