Blue Economy क्या है? भारत कैसे बढ़ रहा है इस क्षेत्र में आगे?

Blue Economy: ब्लू यानी कि नीला और इकोनॉमी यानी कि अर्थव्यवस्था। तो अब आप ये सोचेंगे कि ये नीली अर्थव्यवस्था क्या है? दरअसल इसका संबंध समुद्र और महासागर से है। हम सब ये तो जानते ही हैं कि दुनिया का 70 फीसदी से ज्यादा भाग पानी से घिरा है और अनएक्सप्लोर्ड है। तो इन्हीं जगहों पर रोजगार और इकोनॉमी से जुड़ी चीजों का पता लगाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। भारत की वित्त मंत्री ने भी बजट के दौरान इसी ब्लू इकोनॉमी का जिक्र किया था। जानते हैं डिटेल में कैसे काम करती है ब्लू इकोनॉमी….

क्या है ब्लू इकोनॉमी ?

ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) को एक इकोनॉमिक ऑपरच्यूनिटी की तरह देखा जा रहा है। इसे डिस्क्राइब करते हुए विश्व बैंक (World Bank) ने कहा है कि, “समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र (marine ecosystem) को संरक्षित रखने, आर्थिक विकास और बेहतर जीविका के लिए समुद्र के संसाधनों का स्थायी रूप से उपयोग करना ही ब्लू इकोनॉमी है।

ब्लू इकोनॉमी के लिए भारत सरकार के कदम

ब्लू इकोनॉमी 2.0 को लॉन्च करने की प्लानिंग सरकार कर रही है। इस बात की जानकारी बजट के समय आम जनता के सामने रखी गई थी। इस स्कीम का उद्देश्य सतत विकास (Sustainable Economy) और तटीय सेक्टर में जलवायु-लचीली गतिविधियों को आगे बढ़ाना था। जानते हैं और क्या खास है इसमें…

  • सरकार तटीय जलीय कृषि और समुद्री कृषि के विस्तार पर ध्यान देगी।
  • ब्लू इकोनॉमी के तहत महासागरों, समुद्रों और तटीय सेक्टर की क्षमता को एक्सप्लोर किया जाएगा।
  • तटीय क्षेत्रों में सस्टेनिबिलिटी को विकसित करना भी एक प्रमुख बिंदू है।
  • तटीय जलीय कृषि और समुद्री कृषि के विस्तार पर भी फोकस होगा।

ब्लू रिवॉल्यूशन का बढ़ा खर्च

ब्लू रिवोल्यूशन में सरकारी खर्च को भी बढ़ाया गया है। 2023-24 बजट में ब्लू रिवोल्यूशन के लिए 2,025 करोड़ रुपए दिए गए थे जिसे 2024-25 के लिए बढ़ाते हुए 2,352 करोड़ रुपए कर दिए गया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मत्सय संपदा योजना को भी और सशक्त करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। ब्लू इकोनॉमी की दिशा में किए जा रहे इन कामों से एक्वाकल्चर और बेहतर होगा। निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के अवसर आएंगे। इस साल के बजट में 5 एक्वा पार्क को बनाने की घोषणा भी की गई थी।

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Positive सार

ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) एक उभरता हुआ कॉन्सेप्ट है। ये महासागर या जलीय संसाधनों के बेहतर मैनेजमेंट और व्यापार के लिए प्रोत्साहित करेगा। ग्रीन इकोनॉमी का उद्देश्य ह्यूमन वेलफेयर और सोशल इक्वालिटी में भी सुधार लाएगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे साथ ही पर्यावरणीय जोखिमों और पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन को भी कम करने में मदद मिलेगी।

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Rishita Diwan

Content Writer

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