Shiksha Adhishthan Bill 2025: भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा संसद में पेश किया गया ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ उच्च शिक्षा के नियमन, मान्यता और प्रशासन की मौजूदा जटिल व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का लक्ष्य रखता है। यह विधेयक न केवल भारत को शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा और भाषाओं को उच्च शिक्षा से गहराई से जोड़ना भी है।
क्यों लाया गया यह विधेयक?
(Bill’s Core Objective)
यह विधेयक उच्च शिक्षा में पारदर्शिता लाने, गुणवत्ता सुधारने और इसे विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। मौजूदा नियामक प्रणाली की जटिलताओं को समाप्त करके एक सरल, परिणाम-आधारित और जवाबदेह ढाँचा स्थापित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। विधेयक को फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा गया है, जहाँ गहन चर्चा के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।
नई नियामक संरचना
शीर्ष आयोग और तीन परिषदें
विधेयक के तहत, उच्च शिक्षा की निगरानी और नीति निर्धारण के लिए एक नई, शक्तिशाली संरचना बनाई जाएगी,
- शीर्ष आयोग (Apex Commission)
यह आयोग उच्च शिक्षा के लिए नीति निर्धारण और समन्वय की सर्वोच्च कानूनी संस्था होगी। इसका मुख्य काम होगा सरकार को सलाह देना, भारत को वैश्विक शिक्षा केंद्र बनाने पर काम करना और भारतीय ज्ञान परंपरा तथा भाषाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ना। इस आयोग में अध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षाविद, विशेषज्ञ और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
- तीन स्वतंत्र परिषदें
(Three Independent Councils)
आयोग के तहत तीन अलग-अलग और स्वतंत्र परिषदें काम करेंगी ताकि नियामक कार्यों में कोई टकराव न हो और विशेषज्ञता बनी रहे,
- नियामक परिषद (Regulatory Council)- यह संस्थानों के प्रशासन, वित्तीय पारदर्शिता और शिकायत निवारण की निगरानी करेगी। इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य शिक्षा के व्यावसायीकरण को रोकना होगा।
- मान्यता परिषद (Accreditation Council)- यह संस्थानों की मान्यता व्यवस्था देखेगी। यह परिणाम-आधारित मानदंड तय करेगी और मान्यता एजेंसियों को सूचीबद्ध करेगी।
- मानक परिषद (Standards Council)- यह शैक्षणिक मानक, शिक्षकों के न्यूनतम मानदंड, क्रेडिट ट्रांसफर और पढ़ाई के नतीजे (Learning Outcomes) निर्धारित करने के लिए जिम्मेदार होगी।
कानून का दायरा और शर्तें
यह नया कानून शिक्षा के लगभग हर प्रमुख संस्थान पर लागू होगा,
- शामिल संस्थान- केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, कॉलेज, ऑनलाइन/दूरस्थ शिक्षा संस्थान और ‘इंस्टीट्यूशन ऑफ एमिनेंस’।
- अपवाद- मेडिकल, कानून, फार्मेसी, नर्सिंग और संबद्ध स्वास्थ्य पाठ्यक्रम सीधे इस कानून के दायरे में नहीं होंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।
स्वायत्तता, लेकिन जवाबदेही के साथ
विधेयक में ‘ग्रेडेड ऑटोनॉमी’ (श्रेणीबद्ध स्वायत्तता) का प्रावधान है। इसका मतलब है कि जिस संस्थान का प्रदर्शन और मान्यता जितनी बेहतर होगी, उसे उतनी ही अधिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी। हालांकि, इसके साथ ही जवाबदेही भी तय की गई है,
- सभी संस्थानों को अपनी वित्तीय जानकारी, फैकल्टी, कोर्स और छात्र परिणाम सार्वजनिक करने होंगे।
- सभी संस्थाएँ सालाना रिपोर्ट, संसद की निगरानी और CAG ऑडिट के तहत जवाबदेह होंगी।
क्रांतिकारी बदलाव और कड़े प्रावधान
विधेयक में कई ऐसे प्रावधान हैं जो उच्च शिक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली को मौलिक रूप से बदल देंगे,
- डिग्री देने का अधिकार- मान्यता प्राप्त गैर-विश्वविद्यालय संस्थानों को भी केंद्र की मंजूरी के बाद डिग्री देने का अधिकार मिल सकता है। यह एक बड़ा कदम है जो शिक्षा तक पहुँच को बढ़ाएगा।
- विदेशी विश्वविद्यालय- चुनिंदा विदेशी विश्वविद्यालय अब सरकारी मंजूरी और नियमों के तहत भारत में कैंपस खोल सकेंगे। साथ ही, बेहतर प्रदर्शन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों को भी विदेश में कैंपस खोलने की अनुमति मिलेगी।
कड़े जुर्माने की व्यवस्था- गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जुर्माना बहुत सख्त किया गया है।
- पहली गलती पर ₹10 लाख तक जुर्माना।
- बार-बार उल्लंघन पर ₹30 लाख से ₹75 लाख तक जुर्माना।
- अवैध विश्वविद्यालय खोलने पर कम से कम ₹2 करोड़ का जुर्माना और तत्काल बंदी का प्रावधान है।
विपक्ष की आपत्ति और केंद्रीकरण का मुद्दा
बिल पेश किए जाने का कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने विरोध किया। उनकी मुख्य आपत्ति यह है कि इतनी बड़ी शिक्षा सुधार नीति पर सांसदों को अध्ययन का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। विपक्ष ने इस बिल में केंद्र सरकार को अत्यधिक शक्तियाँ देने और ‘अत्यधिक केंद्रीकरण’ का आरोप लगाया, खासकर इसलिए क्योंकि शिक्षा समवर्ती (Concurrent) विषय है। विपक्षी दलों की मांग पर सरकार ने इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया है।
भविष्य की दिशा
‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025’ भारतीय उच्च शिक्षा के लिए एक नया अध्याय लिखने की क्षमता रखता है। यदि यह JPC की चर्चा के बाद पारित होता है, तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था को एक मजबूत, परिणाम-केंद्रित और वैश्विक रूपरेखा प्रदान कर सकता है, जिससे भारत की ‘ज्ञान महाशक्ति’ बनने की राह आसान होगी।
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