National Science Day : राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर जशपुर कलेक्टर ने अद्वितीय और प्रेरणादायक पहल की। 800 आदिवासी बच्चों ने मिलकर एक रॉकेट तैयार किया, जो 10 हजार फीट की ऊंचाई तक उडा। यह बच्चे 8वीं और 9वीं कक्षा के विद्यार्थी हैं।
यह कदम राज्य में विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जो ग्रामीण और आदिवासी इलाकों से हैं। इस प्रयास ने यह साबित कर दिया कि विज्ञान और तकनीकी शिक्षा का कोई भी क्षेत्र इन बच्चों के लिए असंभव नहीं है।
जशपुर कलेक्टर की पहल
जिला कलेक्टर रोहित व्यास विज्ञान में अत्यंत रूचि रखते हैं. इसी के चलते उन्होंने यह पहल की क्योंकि उनका मानना है कि वह रटने के बजाय प्रैक्टिकल में विश्वास रखते हैं। उन्होंने अंतरिक्ष ज्ञान अभियान की शुरुआत की है जिसके अंतर्गत स्कूली बच्चों को अंतरिक्ष, टेलिस्कोप और ग्रहों के साथ ही साथ राकेट्री और सेटलाइट के बारे में भी बताया जा रहा है ।
थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल में विश्वास
यह विचार छात्रों को सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन के अनुभवों से सीखने की प्रेरणा देता है। जब बच्चों को केवल थ्योरी की बजाय प्रैक्टिकल अनुभव मिलता है, तो उनकी समझ और कौशल में गहरी निपुणता आती है।स तरह के प्रैक्टिकल अनुभव बच्चों को न सिर्फ आत्मविश्वास देते हैं, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया की समस्याओं के समाधान की दिशा में भी तैयार करते हैं।
कैसे हुआ प्रशिक्षण
रॉकेट सिखाने के लिए 8 ब्लॉक में 100 बच्चों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें सरकारी स्कूल के उन बच्चों को सलेक्ट किया गया, जिन्हें विज्ञान में रुचि है। इसमें 10-10 बच्चों के 10 बैच बने। इन्हें स्कूल टाइम के अलावा 8 घंटे की रॉकेटरी वर्कशाप अलग से दी गई। हर बैच ने मिलकर 30 सेकंड हवा में 100 फीट तक उड़ने वाला एक रॉकेट बनाया। उसका प्रक्षेपण करके भी देखा। अंत में इन सभी बच्चों मिलकर 10 फीट का एक बड़ा रॉकेट बनाया। इसका सफल प्रक्षेपण भी किया गया।
आगे नैनो सैटेलाइट लॉन्च की तैयारी
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उद्देश्य इन बच्चों को विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में और अधिक प्रेरित करना है, और उन्हें अगले स्तर की तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है। इन बच्चों को अब नैनो सैटेलाइट लॉन्च करने के बारे में भी सिखाया जाएगा, जिससे वे अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी क्षमता का विकास कर सकेंगे।
सही मार्गदर्शन और संसाधन से संवरेगा भविष्य
यदि बच्चों को सही मार्गदर्शन और संसाधन मिलें, तो वे किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हो सकते हैं। यह कदम छत्तीसगढ़ के विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण है, खासकर उन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहाँ तक विज्ञान की पहुँच मुश्किल है।