BaLA Concept Dhamtari Model: छत्तीसगढ़ में शिक्षा और बाल विकास के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। धमतरी जिले में सफलतापूर्वक लागू किए गए “BaLA (Building as Learning Aid)” कॉन्सेप्ट की सफलता को देखते हुए अब छत्तीसगढ़ सरकार ने इसे पूरे प्रदेश में लागू करने का निर्णय लिया है। यह पहल न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत बदलेगी, बल्कि नौनिहालों के सीखने के अनुभव को भी पूरी तरह से बदल देगी।
क्या है BaLA कॉन्सेप्ट?
BaLA का अर्थ है “भवन एक शिक्षण सहायक सामग्री के रूप में”। इस नवाचार के तहत स्कूल या आंगनबाड़ी के भवन को केवल ईंट-पत्थर का ढांचा न मानकर उसे एक जीवंत पाठ्य-सामग्री में बदल दिया जाता है। इसमें भवन की दीवारों, फर्श, खिड़कियों और दरवाजों का उपयोग इस तरह किया जाता है कि बच्चा खेलते-कूदते स्वतः ही ज्ञान अर्जित कर सके।
धमतरी मॉडल की सफलता
धमतरी जिले में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के नेतृत्व में इस मॉडल के शानदार परिणाम सामने आए हैं। यहाँ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनकी सीखने की गति भी तेज हुई है। इसी सफलता से प्रभावित होकर, छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने अब निर्देश जारी किए हैं कि महात्मा गांधी नरेगा (MGNREGA) के तहत निर्मित और निर्माणाधीन प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों की आंगनबाड़ियों में BaLA कॉन्सेप्ट अनिवार्य होगा।
आंगनबाड़ी भवनों में होंगे ये नवाचारी बदलाव
निर्देशों के अनुसार, महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से भवनों को ‘लर्निंग लैब’ के रूप में विकसित किया जाएगा,
- दीवारों पर शिक्षा- दीवारों पर केवल रंग-रोगन नहीं, बल्कि वर्णमाला, अंक, आकृतियां और स्थानीय लोक कथाओं के चित्र उकेरे जाएंगे।
- इंटरेक्टिव फर्श- फर्श पर खेल-आधारित शिक्षण सामग्री बनाई जाएगी, जिससे बच्चे कूदते और चलते हुए गिनती या अक्षर सीख सकें।
- प्रायोगिक ज्ञान- खिड़की और दरवाजों के माध्यम से बच्चों को कोण, आकार और माप की बुनियादी समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।
- स्थानीय कला का समावेश- स्थानीय कलाकारों की मदद से चित्रों को आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाया जाएगा।
15 मार्च 2026 तक का लक्ष्य
राज्य सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एक सख्त समय-सीमा निर्धारित की है। प्रदेश में वर्तमान में प्रचलित सभी आंगनबाड़ी भवन निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर 15 मार्च 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में तकनीकी डिजाइन और वित्तीय प्रावधानों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण विकास और शिक्षा का नया अध्याय
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के अनुसार, “आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के लिए पहली पाठशाला बन गए हैं।” इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक अधोसंरचना का सृजनात्मक उपयोग सुनिश्चित होगा। अभिभावकों में भी इस नए ढांचे को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि उनके बच्चों को अब एक सुरक्षित, बाल-अनुकूल और आकर्षक वातावरण मिल रहा है।
Positive Takeaway
छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। धमतरी का यह छोटा सा नवाचार अब प्रदेश के लाखों बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव को और मजबूत करने जा रहा है। जब भवन खुद बोलना और सिखाना शुरू करेंगे, तो निश्चित ही छत्तीसगढ़ के नौनिहाल विकास की नई ऊंचाइयों को छुएंगे।
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