Chhattisgarh Vidhan Sabha: छत्तीसगढ़ विधानसभा से सीखने लायक तीन सबक

Chhattisgarh Vidhan Sabha, First Assembly Session

14 दिसंबर, 2000

यही वो तारीख है जब नए-नए राज्य बनें छत्तीसगढ़ की पहली विधानसभा सत्र आयोजित की गई थी। आज भले ही छत्तीसगढ़ के पास एक आधुनिक और सर्वसुविधायुक्त विधानसभा भवन है। लेकिन इसकी शुरूआत मुझे हमेशा ही एक प्रेरणा देती है।

14 दिसंबर, 2025, आज जब हम छत्तीसगढ़ विधानसभा के स्थापना दिवस की ऐतिहासिक तिथि की ओर देखते हैं, तो यह केवल एक राज्य की विधायी यात्रा का उत्सव नहीं रह जाता। यह सीमित संसाधनों (Scarcity) और अडिग संकल्प (Intent) के बीच संतुलन स्थापित करने वाले हर संगठन, हर नए उद्यम के लिए एक गहन पाठ है। मुझे याद है, 14 दिसंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ के लोकतांत्रिक सफर की शुरुआत हुई थी। एक नए राज्य के पास अपना स्थायी विधानसभा भवन तक नहीं था। रायपुर के राजकुमार कॉलेज के जशपुर हॉल में तंबू लगाकर जब पहली बैठक का आयोजन हुआ, तो यह घटना एक पत्रकार के रूप में मेरे लिए प्रेरणादायक थी। इसने सिखाया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तो शुरुआती चरण में बुनियादी ढाँचे या संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बन सकती। इस गौरवशाली सफर से तीन अमूल्य सबक उभरते हैं, जो आज हर किसी के लिए प्रासंगिक हैं।

अभाव में भी उत्कृष्टता का निर्माण

(Excellence in Scarcity)

राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ के पास संसद भवन जैसा कोई भव्य ढाँचा तैयार नहीं था। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के नेतृत्व में सत्र सफलतापूर्वक चला और सीमित साधनों के बीच ही विधायी प्रक्रिया की नींव रखी गई। अक्सर हम बड़े निवेश या ‘परिपूर्ण’ समय का इंतजार करते रह जाते हैं। छत्तीसगढ़ की कहानी हमें बताती है कि संसाधन आपकी शुरुआत को सीमित कर सकते हैं, पर आपके दृष्टिकोण और गुणवत्ता को नहीं। एक मजबूत इरादे और संस्कृति के साथ, आप एक साधारण तंबू से भी महान लोकतांत्रिक परंपराओं को जन्म दे सकते हैं। यह सिद्धांत हर स्टार्टअप और नए प्रोजेक्ट के लिए सर्वोपरि है।

अनुशासन से प्रतिष्ठा का सर्जन

(Prestige through Discipline)

छत्तीसगढ़ विधानसभा को भारतीय लोकतंत्र में अद्वितीय बनाने वाली चीज़ है इसका कड़ा अनुशासन। ‘स्वयमेव निलंबन’ का नियम यानी गर्भगृह (वेल) में प्रवेश करते ही सदस्य का स्वतः निलंबित हो जाना एक क्रांतिकारी कदम था। इस नियम की प्रभावशीलता ऐसी रही कि आज देश की सर्वोच्च विधायिका, लोकसभा भी इससे प्रेरणा ले रही है। किसी भी संस्था की विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा उसके द्वारा स्थापित उच्च मानकों पर निर्भर करती है। कॉर्पोरेट जगत में, इसका अर्थ है शून्य-सहिष्णुता वाली आचार संहिता (Zero-Tolerance Code of Conduct) का पालन करना। अनुशासन केवल नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी संस्कृति है जो आपकी संस्था को भीड़ से अलग करती है और उसकी ब्रांड वैल्यू को बढ़ाती है।

अतीत की नींव पर भविष्य की भव्यता

(Grandeur on Historical Foundations)

राज्य गठन के 25 साल बाद, नवा रायपुर में आधुनिक और भव्य विधानसभा भवन का लोकार्पण हुआ। यह नया भवन 80% स्वदेशी सामग्री, जिसमें बस्तर के सागौन और धान की बालियों की कलाकारी शामिल है, का उपयोग करके बनाया गया है। यह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि एक दृष्टि का साकार होना है। यह दिखाता है कि हमने सीमित शुरुआत की, अनुशासन से प्रतिष्ठा अर्जित की, और अब हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं। हर विकास यात्रा को अपनी जड़ों को याद रखना चाहिए। नवा रायपुर का यह भवन उस तंबू वाली शुरुआत को नहीं भुलाता, बल्कि उसे एक गौरवशाली इतिहास के रूप में स्वीकार करता है। एक लीडर के रूप में, हमें हमेशा अपने ‘मूल मूल्यों’ और शुरुआती संघर्षों को याद रखना चाहिए, भले ही हम भविष्य के कितने भी शानदार लक्ष्यों का निर्माण क्यों न कर रहे हों।

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Dr. Kirti Sisodia

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