Petrol Price Stabilization: क्या कम होगी पेट्रोल की कीमतें?

Petrol Price Stabilization

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती

क्या जनता को मिलेगी सस्ते ईंधन की राहत?

Petrol Price Stabilization: वैश्विक ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में भारी कटौती की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच घरेलू तेल कंपनियों के घाटे को कम करना और देश में ईंधन की कीमतों को स्थिर बनाए रखना है।

एक्साइज ड्यूटी में कितनी हुई कटौती?

रॉयटर्स की रिपोर्ट और आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सीधे 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। वहीं, डीजल के मामले में सरकार और भी उदार रही है; डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य (Zero) कर दिया गया है।

इसके साथ ही, विमानन क्षेत्र के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के लिए एक नया लेवी ढांचा पेश किया गया है, जिसके तहत प्रभावी शुल्क लगभग 29.5 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।

आखिर क्यों यह बड़ी राहत?

वर्तमान में दुनिया एक गहरे ऊर्जा संकट से गुजर रही है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुनिया की कुल कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा (20-25 मिलियन बैरल प्रति दिन) इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत भी अपनी जरूरतों का लगभग 12-15% कच्चा तेल इसी गलियारे से आयात करता है।

युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में भारत की सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) जैसे HPCL, BPCL और IOC पर लागत का भारी दबाव बढ़ रहा था। एक्साइज ड्यूटी में इस कटौती से इन कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।

क्या कम होंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

आम आदमी के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस कटौती के बाद पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? इसका उत्तर थोड़ा तकनीकी है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में खुदरा दाम स्थिर रखे गए थे।

इस स्थिरता की वजह से तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी घटाने का मतलब यह है कि अब कंपनियों का यह घाटा कम या खत्म हो जाएगा। सरल शब्दों में कहें तो, यह कटौती जनता के लिए कीमतें घटाने के बजाय, कीमतों को ‘बढ़ने से रोकने’ के लिए की गई है। यानी आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें न तो घटेंगी और न ही फिलहाल बढ़ने की संभावना है।

वैश्विक स्थिति बनाम भारत

मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तुलनात्मक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जहां दुनिया के अन्य देशों (दक्षिण पूर्व एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप) में ईंधन की कीमतों में 20% से 50% तक का उछाल आया है, वहीं भारत ने अपनी वित्तीय स्थिति पर बोझ उठाकर नागरिकों को इस महंगाई से सुरक्षित रखा है। हालांकि, हाल ही में निजी कंपनी ‘नायरा’ ने कीमतों में मामूली वृद्धि की है और कुछ कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाए हैं, लेकिन सामान्य ईंधन के दाम फिलहाल स्थिर बने रहने की उम्मीद है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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