- Noida International Airport
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
- उत्तर भारत के एविएशन सेक्टर में नई क्रांति
Noida International Airport: उत्तर भारत के आसमान में एक नया सितारा चमकने को तैयार है। जेवर, उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) न केवल दिल्ली-एनसीआर बल्कि पूरे देश के नागरिक उड्डयन परिदृश्य को बदलने की क्षमता रखता है। स्विस ऑपरेटर ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी द्वारा विकसित यह महत्वाकांक्षी परियोजना, भीड़भाड़ वाले आईजीआई एयरपोर्ट के लिए एक गेम-चेंजर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए आर्थिक वरदान साबित होने वाली है।
दिल्ली-NCR का दूसरा वैश्विक प्रवेश द्वार
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे के बाद इस क्षेत्र का दूसरा इंटरनेशनल गेटवे होगा। वर्तमान में आईजीआई एयरपोर्ट अपनी पूरी क्षमता के करीब काम कर रहा है। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट एक “डबल एयरपोर्ट सिस्टम” के रूप में काम करेगा। यह मॉडल लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक शहरों की तर्ज पर बनाया गया है, जहाँ दो प्रमुख हवाई अड्डे मिलकर एक ही मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र की हवाई जरूरतों को पूरा करते हैं।
पहले चरण की क्षमता
प्रोजेक्ट के पहले चरण में एयरपोर्ट को हर साल 12 मिलियन (1.2 करोड़) यात्रियों को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, भविष्य की मांग को देखते हुए इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह अंततः प्रति वर्ष 7 करोड़ यात्रियों की विशाल क्षमता तक पहुंच सके।
एयरपोर्ट की तकनीकी खूबियों की बात करें तो यहाँ 3,900 मीटर लंबा रनवे बनाया गया है। यह रनवे दुनिया के सबसे बड़े वाणिज्यिक विमानों को भी आसानी से लैंड कराने में सक्षम है। इसके अलावा, यहाँ अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और आधुनिक एयरफील्ड लाइटिंग लगाई गई है, जो घने कोहरे या खराब मौसम में भी उड़ानों को बाधित नहीं होने देगी। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) ने इस एयरपोर्ट को ‘DXN’ कोड आवंटित किया है।
कनेक्टिविटी का नया अध्याय
जेवर एयरपोर्ट की लोकेशन इसे बेहद खास बनाती है। यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे स्थित होने के कारण यह नोएडा, ग्रेटर नोएडा, अलीगढ़, बुलंदशहर और ताजनगरी आगरा को सीधा लाभ पहुंचाएगा।
कनेक्टिविटी को और मजबूत बनाने के लिए सरकार मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी पर जोर दे रही है,
रोड नेटवर्क– यमुना एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी।
मेट्रो लिंक– दिल्ली और नोएडा से जोड़ने के लिए समर्पित मेट्रो कॉरिडोर की योजना।
रेल कॉरिडोर– भविष्य में हाई-स्पीड रेल और पॉड टैक्सियों के जरिए ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ को सुनिश्चित किया जाएगा।
कब शुरू होंगी उड़ानें?
हवाई अड्डे के उद्घाटन के बाद परिचालन शुरू होने में लगभग 45 से 60 दिनों का समय लगेगा। शुरुआत में घरेलू उड़ानें (Domestic Flights) संचालित की जाएंगी। इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी प्रमुख एयरलाइंस शुरुआती परिचालन का नेतृत्व करेंगी। योजना के अनुसार, पहले 45 दिनों के भीतर भारत के 10 प्रमुख शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू हो जाएंगी। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 2026 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
विकास का मॉडल और निवेश
इस मेगा प्रोजेक्ट को यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) द्वारा विकसित किया जा रहा है। यह उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के साथ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- निवेश– पहले चरण में लगभग 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
- अवधि– रियायत अवधि (Concession Period) 40 वर्षों के लिए है, जो 1 अक्टूबर 2021 से प्रभावी है।
- वित्तीय सहायता– इस परियोजना के लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) द्वारा ऋण सहायता प्रदान की गई है।
Positive Takeaway
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट केवल एक परिवहन केंद्र नहीं है, बल्कि यह विकास का एक नया इंजन है। इससे न केवल रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे, बल्कि रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले वर्षों में जेवर और इसके आसपास का क्षेत्र एक वैश्विक एविएशन हब के रूप में उभरेगा।
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