

कचरे से पैसे कमा सकते हैं? जी हाँ, कचरे को रिसाइकल करके फिर उपयोग कर सकते हैं। इससे कमाई तो होती है साथ ही पर्यावरण भी संरक्षित होता है। कचरा रिसाइकिल, निस्तारण, कचरे से ऊर्जा उत्पादन करके कचरे का प्रबंधन होता है। ऐसे ही एक शख़्स हैं, जो केले के कचरे का पुनः उपयोग करके लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
केले के कचरे से बनाते हैं कई चीजें PM Murugesan
तमिलनाडु के मदुरै के मेलाक्कल गाँव के निवासी पीएम मुरुगेसन (PM Murugesan) एक स्कूल ड्रॉपआउट व्यक्ति हैं, जिन्होंने केले के कचरे (Banana Fiber) से रुपए कमा रहे हैं और सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं। उन्होंने केले के कचरे से बैग, टोकरी आदि बना रहे हैं। इतना ही नहीं, मुरुगेसन ने केले के फाइबर से रस्सी बनाने के काम को सरल व प्रभावशाली बनाने के लिए एक मशीन का भी आविष्कार किया। जिसकी सहायता से केले के कचरे से मज़बूत रस्सी भी बनाई जा सकती है। अब तो उनके द्वारा तैयार किए गए प्रोडक्ट विदेशों में भी निर्यात किए जा रहे हैं।
केले के कचरे से रस्सी बनाने के लिए किया मशीन का आविष्कार
मुरुगेसन वर्ष 2008 में अपने परिवार के सहयोग से केले के पौधे के कचरे से रस्सी बनाने का काम शुरू किया। पहले तो वह असफल रहे परंतु वर्ष 2017 में उन्होंने पुरानी साइकिल की रिम और पुल्ली का इस्तेमाल करके एक ‘स्पिनिंग डिवाइस’ बनाया। जो बहुत किफायती भी था। इस मशीन से केले के कचरे की कताई हो जाती थी।
इस ऑटोमैटिक मशीन की विशेषता यह है कि ये रस्सी बनाने के साथ ही दो रस्सियों को एक साथ जोड़ भी देती है। इस मशीन से 15000 मीटर लम्बी रस्सी बना सकते हैं और इस सारी प्रोसेस में केवल चार व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है।
हर साल करते हैं 500 टन केले के ‘फाइबर वेस्ट’ की प्रोसेसिंग
आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल रहे मुरुगेसन, पहले 5 लोगों के साथ मिलकर काम करते थे और अब वह 300 से ज़्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं। उनके व्यवसाय ‘एमएस रोप प्रोडक्शन सेंटर (M S Ropes Production Center)’ के द्वारा महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है और ख़ास बात तो यह है कि कई महिलाएँ अपने घर पर ही रह कर काम कर रहीं हैं, वे महिलाएँ उनसे कच्चा माल घर ले जाती हैं और फिर अपने घर पर ही रह टोकरी, चटाई, बैग इत्यादि वस्तुएँ बनाकर वहाँ पहुँचाती हैं।
उनके बनाए इको-फ्रेंडली और सस्टेनेबल प्रोडक्ट विदेशों में भी निर्यात किए जाते हैं। राज्य के सहकारिता समूहों और कारीगरों के मेलों में उनके उत्पादों की प्रदर्शनी लगती है। मुरुगेसन हर वर्ष करीब 500 टन केले के ‘फाइबर वेस्ट’ की प्रोसेसिंग किया करते हैं।