Lower EMI: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की है, जिसके बाद साल 2025 में अब तक कुल कटौती 1.25 प्रतिशत हो चुकी है। आमतौर पर, रेपो रेट में कटौती का सीधा मतलब होता है होम लोन, ऑटो लोन जैसे फ्लोटिंग रेट लोन्स की EMI (समान मासिक किस्त) में कमी।
कई लोन ग्राहकों को रेपो रेट घटने पर तुरंत राहत की उम्मीद होती है, लेकिन अक्सर ऐसा नहीं होता। कुछ मामलों में राहत मिलने में देरी होती है, जबकि कुछ में EMI में कोई बदलाव नहीं होता है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि आपकी EMI क्यों नहीं घटी है और बैंक की मनमानी पर आप शिकायत कहाँ कर सकते हैं।
अपने लोन का प्रकार पहचानें
रेपो रेट घटने पर भी लोन की EMI न घटने या उसमें देरी होने का मुख्य कारण आपके लोन की इंटरेस्ट रेट का टाइप है। सबसे पहले आपको यह पता करना होगा कि आपका लोन किस तरह का है,
1. फिक्स्ड रेट लोन (Fixed-Rate Loan)
क्या होता है: इस तरह के लोन में लोन लेते समय जो ब्याज दर तय हो जाती है, वह लोन की पूरी अवधि तक वही रहती है।
प्रभाव:- रेपो रेट घटने या बढ़ने से EMI पर कोई बदलाव नहीं होता है।
2. फ्लोटिंग रेट लोन (Floating-Rate Loan)
फ्लोटिंग रेट लोन्स में ब्याज दरें घटती-बढ़ती रहती हैं, लेकिन इसका फायदा मिलना इस बात पर निर्भर करता है कि आपका लोन किस बेंचमार्क से लिंक्ड है।
रेपो रेट-लिंक्ड (External Benchmark):- अक्टूबर 2019 से, ज्यादातर नए फ्लोटिंग रेट लोन्स RBI के रेपो रेट जैसे एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंक्ड हैं। रेपो रेट घटने या बढ़ने पर, इन लोन्स की EMI में बदलाव होता है और ग्राहकों को सीधा फायदा मिलता है।
MCLR/बेस रेट-लिंक्ड (Old Benchmarks)
पुराने लोन्स अभी भी MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) या बेस रेट सिस्टम से लिंक्ड हो सकते हैं। MCLR या बेस रेट से लिंक्ड लोन्स की EMI में बदलाव हो, यह जरूरी नहीं है। बैंक इस बदलाव को लागू करने में देरी कर सकते हैं।
दूसरी वजहें
बैंक ब्याज दरें तय करते समय क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेशनल कॉस्ट और अपने फंड की कॉस्ट जैसे आंतरिक कारकों को भी ध्यान में रखते हैं। इससे रेट कट का पूरा फायदा आप तक पहुंचते-पहुंचते कम हो सकता है, या उसमें देरी हो सकती है।
रेपो लिंक्ड लोन पर भी राहत नहीं तो क्या करें?
यदि आपका लोन रेपो रेट से लिंक्ड है, और फिर भी बैंक रेपो रेट घटने का पूरा या आंशिक फायदा आपको नहीं दे रहा है, तो आप नीचे दी गई व्यवस्थित प्रक्रिया का पालन करते हुए शिकायत दर्ज कर सकते हैं,
बैंक में लिखित शिकायत दर्ज करें
सबसे पहले, अपने लोन अकाउंट की डिटेल्स के साथ बैंक को एक औपचारिक लेटर या ईमेल लिखें। आप बैंक के मैनेजर से व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी इस बारे में बात कर सकते हैं और कारण जान सकते हैं। बैंक को आपकी शिकायत का जवाब देना अनिवार्य है।
बैंकिंग लोकपाल से संपर्क करें
यदि आपकी लिखित शिकायत पर बैंक द्वारा 30 दिनों के अंदर कोई संतोषजनक जवाब नहीं आता है, तो आप शिकायत निवारण अधिकारी या सीधे बैंकिंग लोकपाल (Banking Ombudsman) से संपर्क कर सकते हैं।
RBI के CMS पर ऑनलाइन शिकायत
आरबीआई ने जून 2019 में बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) की शुरुआत की थी।
कैसे करें
आप RBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर CMS के माध्यम से अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
लाभ
यह सिस्टम कमर्शियल बैंक, शहरी सहकारी बैंक और NBFC सहित किसी भी रेगुलेटेड एंटिटी के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।
प्रक्रिया
शिकायत दर्ज होने के बाद, उसे उपयुक्त लोकपाल ऑफिस या रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय ऑफिस को भेज दिया जाएगा। RBI का CMS डेस्कटॉप और मोबाइल दोनों पर उपलब्ध है।
लोन स्विच या रीफाइनेंस
अगर बैंक रेपो रेट कटौती का फायदा नहीं दे रहा है, या आपका लोन पुराने और महंगे बेंचमार्क (जैसे MCLR) से लिंक्ड है, तो आप दो विकल्प अपना सकते हैं,
लोन स्विच (Loan Switch)
आप अपने बैंक से कनवर्जन की रिक्वेस्ट करके पुराने रेट सिस्टम से रेपो-लिंक्ड लोन में शिफ्ट हो सकते हैं। अधिकांश बैंक एक मामूली फीस पर इसकी इजाजत देते हैं।
लोन रीफाइनेंस (Loan Refinance)
आप अपने लोन को किसी दूसरे बैंक से कम रेट पर रीफाइनेंस करवा सकते हैं। यह विकल्प तब खास तौर पर उपयोगी होता है जब लोन लेने के बाद से आपका क्रेडिट स्कोर (Credit Score) बेहतर हुआ हो, जिससे आपको बाज़ार में सबसे कम दर मिल सके।
सही जानकारी और सही प्रक्रिया के साथ, आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि आरबीआई की कटौती का लाभ आप तक पहुंचे।

