Investment: म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में निवेश करना आजकल वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। लेकिन जब आप किसी स्कीम में निवेश करना शुरू करते हैं, तो आपको दो विकल्प मिलते हैं – डायरेक्ट प्लान (Direct Plan) और रेगुलर प्लान (Regular Plan)। कई निवेशक मानते हैं कि डायरेक्ट फंड सस्ता है, इसलिए वही बेहतर है। हालांकि, यह फैसला सिर्फ लागत (Cost) पर आधारित नहीं हो सकता। यह आपकी निवेश शैली, अनुशासन और जरूरत पर निर्भर करता है।
आइए, समझते हैं कि इन दोनों विकल्पों में क्या अंतर है और आपके लिए सबसे फ़ायदेमंद क्या होगा।
1. डायरेक्ट और रेगुलर MF में अंतर
डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स और रेगुलर म्यूचुअल फंड्स दोनों एक ही फंड हाउस (Fund House) द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं और एक ही अंडरलाइंग पोर्टफोलियो (Underlying Portfolio) में निवेश करते हैं। यानी, फंड मैनेजर, निवेश की रणनीति और स्टॉक/बॉन्ड का चुनाव दोनों के लिए समान रहता है।
| विशेषता | डायरेक्ट प्लान (Direct Plan) | रेगुलर प्लान (Regular Plan) |
| निवेश का तरीका | सीधे फंड हाउस या ऐसे प्लेटफॉर्म के जरिए जो सलाह नहीं देते। | डिस्ट्रीब्यूटर, ब्रोकर या वित्तीय सलाहकार के माध्यम से। |
| कमीशन/कॉस्ट | शून्य या बहुत कम कमीशन। | डिस्ट्रीब्यूटर को कमीशन चुकाया जाता है। |
| एक्सपेंस रेशियो | कम (Low Expense Ratio) | ज्यादा (High Expense Ratio) |
| NAV | आमतौर पर रेगुलर प्लान से ज्यादा होता है। | आमतौर पर डायरेक्ट प्लान से कम होता है। |
| सलाह | कोई व्यक्तिगत निवेश सलाह शामिल नहीं होती। | पेशेवर सलाह और मार्गदर्शन शामिल होता है। |
2. रिटर्न के लिहाज से डायरेक्ट फंड का फायदा
डायरेक्ट फंड्स को सस्ता माना जाता है, और यह सच है। रेगुलर फंड्स में जो कमीशन आप अपने डिस्ट्रीब्यूटर या एडवाइजर को देते हैं, वह एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) में शामिल होता है। डायरेक्ट प्लान में यह कमीशन लागत शामिल नहीं होती, इसलिए उसका एक्सपेंस रेशियो कम होता है।
लंबी अवधि में इसका असर, यह कमीशन का अंतर सालाना 0.5% से 1% तक हो सकता है। लंबी अवधि (जैसे 15-20 साल) में, चक्रवृद्धि ब्याज (Compounding) के कारण यह छोटा सा अंतर भी एक बड़ा रिटर्न गैप पैदा कर सकता है। इसलिए, केवल रिटर्न (Return) के नज़रिए से देखा जाए तो डायरेक्ट फंड बेहतर साबित होता है।
3. रेगुलर फंड्स के फायदे
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रिटर्न पर किसी फंड की लागत से ज्यादा असर निवेशक के व्यवहार (Investor Behavior) का पड़ता है। यहीं पर रेगुलर फंड और वित्तीय सलाहकार की भूमिका अहम हो जाती है,
- व्यवहार अनुशासन- कई निवेशक बार-बार फंड स्विच करते हैं, छोटी गिरावट पर SIP रोक देते हैं, या बाज़ार में तेजी आने पर लालच में आकर गलत आवंटन कर लेते हैं। ये व्यवहारगत त्रुटियाँ कमीशन से होने वाले नुकसान से कहीं अधिक होती हैं।
- सलाहकार का महत्व- एक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर सिर्फ फंड चुनने में मदद नहीं करता। वे आपके एसेट ऐलोकेशन (Asset Allocation) में मदद करते हैं, आपके निवेश लक्ष्यों (Goals) के अनुसार सही पोर्टफोलियो बनवाते हैं।
- बाजार में गिरावट- बाजार में बड़ी गिरावट (Market Crash) के समय निवेशक अक्सर डर जाते हैं और घाटे में अपना निवेश बेच देते हैं। इस समय एक अच्छा सलाहकार आपको शांत रहने और निवेश अनुशासन बनाए रखने की सही सलाह देता है, जो आपके दीर्घकालिक रिटर्न को बचाता है।
यदि आप निवेश में बहुत अनुशासित नहीं हैं, भावनात्मक रूप से निवेश के फैसले लेते हैं, या बाज़ार की गिरावट से डर जाते हैं, तो सलाहकार के जरिए निवेश करना आपके लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।
4. कौन सा विकल्प सही?
यह फैसला पूरी तरह से आपकी जानकारी और अनुशासन पर निर्भर करता है,
| स्थिति | सही विकल्प |
| आप एक अनुभवी निवेशक हैं | डायरेक्ट प्लान, आप स्वयं फंड्स की रिसर्च कर सकते हैं, पोर्टफोलियो को रीबैलेंस कर सकते हैं और निवेश में पूर्ण अनुशासन बरतते हैं। |
| आप नौसिखिया हैं / समय की कमी है | रेगुलर प्लान, आपको विशेषज्ञ मार्गदर्शन, पोर्टफोलियो प्रबंधन और बाजार की अस्थिरता के समय भावनात्मक समर्थन की आवश्यकता है। |
| आप कमीशन बचाना चाहते हैं | डायरेक्ट प्लान, यदि आप निवेश के बारे में जानते हैं और हर महीने अपने पोर्टफोलियो की निगरानी कर सकते हैं। |
Positive Takeaway
डायरेक्ट फंड्स का कम एक्सपेंस रेशियो उन्हें बेहतर क्षमता (Potential) देता है। लेकिन, रेगुलर फंड्स द्वारा दी जाने वाली सलाहकार सेवाएँ आपकी गलतियों को सीमित करके और अनुशासन बनाए रखकर आपके रिटर्न को बचा सकती हैं।
अगर आप स्वयं निवेश के फैसले लेने में सक्षम और अनुशासित हैं, तो डायरेक्ट प्लान चुनें और कमीशन बचाएँ। लेकिन, अगर आपको विशेषज्ञ मार्गदर्शन और भावनात्मक नियंत्रण की आवश्यकता है, तो रेगुलर प्लान के माध्यम से निवेश करना और सलाहकार की फीस चुकाना लंबी अवधि में आपके लिए ज़्यादा फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। अंततः, सही फंड से ज़्यादा ज़रूरी है सही अनुशासन।

