- GST cut on cars
- कार बाजार में लौटी रौनक
- पहली बार कार खरीदने वालों की संख्या में रिकॉर्ड उछाल
GST cut on cars: भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए साल 2025-26 एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में उभर कर सामने आया है। लंबे समय से मंदी और कम मांग से जूझ रहे एंट्री-लेवल कार सेगमेंट में अचानक एक नई लहर देखने को मिल रही है। यह लहर है ‘फर्स्ट टाइम बायर्स’ (पहली बार कार खरीदने वाले) की, जिनकी संख्या में पिछले कुछ वर्षों से लगातार गिरावट दर्ज की जा रही थी। लेकिन सितंबर 2025 में सरकार द्वारा लिए गए GST कटौती के ऐतिहासिक फैसले ने पासा पलट दिया है।
मिडिल क्लास का सपना हुआ सच
पिछले तीन-चार सालों में कारों की इनपुट लागत बढ़ने और कड़े सुरक्षा नियमों के कारण एंट्री-लेवल कारों की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। मारुति सुजुकी के आंकड़ों पर गौर करें तो वित्त वर्ष 2022 में पहली बार कार खरीदने वालों की हिस्सेदारी 45% थी, जो वित्त वर्ष 2025 तक सिमटकर 40% रह गई थी। मिडिल क्लास परिवार, जो अपनी पहली कार का सपना देख रहे थे, वे बढ़ती कीमतों के कारण वापस दोपहिया वाहनों की ओर मुड़ने को मजबूर थे।
लेकिन अब परिदृश्य बदल चुका है। सरकार ने ऑटो सेक्टर की इस पीड़ा को समझा और टैक्स के बोझ को कम करने का साहसिक कदम उठाया।
GST कटौती
गेम चेंजर फैसला
सितंबर 2025 में केंद्र सरकार ने टैक्स स्लैब में जो बदलाव किए, वे सीधे तौर पर आम आदमी की जेब को राहत देने वाले थे। इन बदलावों को हम नीचे दी गई तालिका से समझ सकते हैं:
| कार की श्रेणी | पुराना टैक्स (GST + Cess) | नया टैक्स रेट |
| एंट्री-लेवल (4 मीटर से छोटी) | 29% – 31% | 18% |
| बड़ी कारें (4 मीटर से अधिक) | 43% – 50% | 40% |
इस 10% से 13% तक की सीधी कटौती ने छोटी कारों की ऑन-रोड कीमत में ₹50,000 से ₹1.2 लाख तक की कमी ला दी है। यही कारण है कि शोरूम्स पर अब फिर से परिवारों की भीड़ नजर आने लगी है।
सफर हुआ आसान
इस बदलाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि अब दोपहिया वाहनों (Two-wheelers) से कारों की ओर ‘अपग्रेड’ करने वालों की संख्या में 24% की बढ़ोतरी हुई है। जो युवा या छोटे परिवार पहले एक अच्छी स्पोर्ट्स बाइक या प्रीमियम स्कूटर के बजट में फंसे थे, अब वे थोड़ा और निवेश कर एक सुरक्षित और आरामदायक कार घर ला रहे हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि 18% GST स्लैब ने न केवल कारों को सस्ता किया है, बल्कि बैंक लोन की EMI को भी कम करने में मदद की है, जिससे ग्राहकों का आत्मविश्वास बढ़ा है।
ऑटो इंडस्ट्री को मिली नई संजीवनी
इस फैसले का असर केवल ग्राहकों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑटो मैन्युफैक्चरर्स के लिए भी यह एक नई शुरुआत है। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, और हुंडई जैसी कंपनियों ने अपने एंट्री-लेवल मॉडल्स के उत्पादन में तेजी ला दी है। बाजार में आए इस ‘बूस्ट’ से न केवल बिक्री बढ़ी है, बल्कि इससे जुड़े सहायक उद्योगों (Spares, Insurance, Service) में भी रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।
भविष्य की राह
क्या यह ट्रेंड टिकेगा?
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर टैक्स की दरें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो आने वाले दो सालों में एंट्री-लेवल सेगमेंट में 15-20% की वार्षिक वृद्धि (CAGR) देखी जा सकती है। साथ ही, अब कंपनियां इस सेगमेंट में बेहतर फीचर्स और सुरक्षा मानकों के साथ नई कारें लॉन्च करने की योजना बना रही हैं।
Positive सार
भारत में कार केवल एक वाहन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की सुरक्षा का प्रतीक है। GST में कटौती ने इस प्रतीक को आम आदमी की पहुंच के भीतर ला खड़ा किया है। पहली बार कार खरीदने वालों की बढ़ती संख्या यह दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति (Purchasing Power) फिर से मजबूत हो रही है।
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