Budget 2026: क्यों 1973 के बजट को ‘ब्लैक बजट’ कहा जाता है?

Budget 2026 Facts: भारत का केंद्रीय बजट केवल आंकड़ों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक सेहत और भविष्य की प्राथमिकताओं का आईना है। 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार आम बजट पेश करने जा रही हैं। वैश्विक अनिश्चिताओं के बीच इस बजट से आम जनता को महंगाई से राहत और युवाओं को रोजगार की बड़ी उम्मीदें हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय बजट के इतिहास में कुछ ऐसे मोड़ भी आए जिन्हें ‘ब्लैक बजट’ या ‘ड्रीम बजट’ कहा गया? आइए बजट के इतिहास और उससे जुड़े रोचक तथ्यों पर एक नज़र डालते हैं।

भारत का पहला बजट

ब्रिटिश काल से आजादी तक

भारतीय बजट का इतिहास 160 साल से भी ज्यादा पुराना है। भारत का सबसे पहला बजट ब्रिटिश शासन के दौरान 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था। इसे स्कॉटिश अर्थशास्त्री जेम्स विल्सन ने पेश किया था। हालांकि, स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को पेश हुआ। देश के पहले वित्त मंत्री आर. के. शणमुखम चेट्टी ने इसे संसद के पटल पर रखा था। वह बजट मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था की नींव रखने और विभाजन के बाद उपजी चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित था।

सबसे लंबा बजट भाषण

निर्मला सीतारमण का रिकॉर्ड

बजट पेश करने के दौरान भाषण की लंबाई भी अक्सर चर्चा का विषय बनती है। भारत के संसदीय इतिहास में सबसे लंबा बजट भाषण देने का रिकॉर्ड मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नाम है। 1 फरवरी 2020 को उन्होंने लगातार 2 घंटे 42 मिनट तक भाषण दिया था। उनके इस विस्तृत संबोधन में सरकार की नई नीतियों और व्यापक योजनाओं का खाका खींचा गया था।

क्या था ‘ब्लैक बजट’?

(1973 का ऐतिहासिक घाटा)

भारतीय बजट के इतिहास में 28 फरवरी 1973 का दिन ‘ब्लैक बजट’ के रूप में दर्ज है। तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंतराव बी. चव्हाण ने इसे पेश किया था। इसे ‘ब्लैक’ कहने के पीछे की मुख्य वजह उस समय का भारी राजकोषीय घाटा था। उस दौर में देश 550 करोड़ रुपये के घाटे में था।

यह वह समय था जब भारत 1971 के युद्ध के बोझ और 1972 के भीषण सूखे की मार झेल रहा था। संसाधनों की कमी और आर्थिक संकट के कारण इस बजट को पेश करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। इसी आर्थिक संकट की छाया के कारण इसे इतिहास में ‘ब्लैक बजट’ का नाम दिया गया।

1997 का ‘ड्रीम बजट’

सुधारों की नई लहर

जिस तरह 1973 का बजट संकट का प्रतीक था, वैसे ही 1997 का बजट उम्मीदों और सुधारों का प्रतीक बना। तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम द्वारा पेश किए गए इस बजट को ‘ड्रीम बजट’ कहा जाता है। इस बजट में इनकम टैक्स की दरों में भारी कटौती की गई और कस्टम ड्यूटी को कम किया गया। कर प्रणाली (Tax System) को सरल बनाने के इन फैसलों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश के नए द्वार खोले।

भविष्य की उम्मीदें

अब सबकी निगाहें Budget 2026 पर हैं। भारत आज दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुसार, भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में यह बजट एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देना और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश इस बार की मुख्य प्राथमिकताएं हो सकती हैं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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