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HYBRID REMOTE WORKING: नए जमाने का नया वर्क कल्चर!

by Rishita Diwan

Date & Time: Feb 25, 2022 12:00 PM

Read Time: 4 minute



समय, तकनीक और एडवांस्मेंट के दौर ने काम करने के तरीकों में काफी बदलाव किए हैं। अब घर के एक कोने से कंप्यूटर के स्क्रीन पर पढ़ाई हो रही है। तो दूसरे कोने पर कोई मीटिंग निपटा रहा होता है। घर पर राशन के सामान का चयन स्क्रॉल करती हुई मोबाइल की स्क्रीन पर किया जाता है। और एक फोन कॉल पर सामानों की डिलीवरी हो जाती है। इसीलिए इस बात में कोई दो राय नहीं है, कि कोरोना माहामारी ने भी हमारी जीवन शैली में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। जिसकी वजह से साल 2020 के बाद दुनिया में काम के नए तरीकों और विकल्पों को तलाशा गया। नतीजन काम का पैटर्न, तकनीक और तरीके बदल गए। अमेरिकी मार्केट एजेंसी ग्लासडोर ने 2021 के वर्किंग ट्रेंड और कल्चर के बारे बात करते हुए सकारात्मक बदलावों के बारे में बात की। जिसमें वर्किंग तकनीकों में फुल टाइम वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर के ज्यादा उपयोग करने की बातें कही गई थीं। WEF के आंकड़ों की मानें तो आने वाला 5 साल टॉप-10 सेक्टर्स में काम औसतन 50% तक काम रिमोट वर्किंग के जरिए की जाएंगी। और हाल ही में माइक्रोसॉफ्ट ने इसकी शुरूआत भी कर दी।

हाइब्रिड रिमोट वर्किंग

हाइब्रिड वर्क का मतलब किसी वर्क स्टेशन में बैठकर दुनिया के किसी भी कंपनी के लिए काम करना है। उदाहरण के तौर पर अगर आपको किसी विदेशी कंपनी में जॉब मिलती है, तो कंपनी आपको वहां नहीं बुलाएगी, बल्कि कंपनी आपको आपके आस-पास ही एक वर्क स्टेशन उपलब्ध कराएगी। जहां आप काम करेंगे। काम करन की इस नई तकनीक को ही हाइब्रिड रिमोट-वर्किंग कहते हैं।
वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम (WEF) के जॉब रिसेट समिट के अनुसार 84% एम्प्लॉयर अपनी वर्किंग टेकनीक को डिजिटलाइज करने की ओर रुख कर रहे हैं। वर्तमान परिस्थितियों को देखा जाए तो ग्लोबल इंडस्ट्री में 44% वर्कफोर्स ऐसा होगा, जो बगैर ऑफिस आए काम करेगा।

वर्क फ्रॉम होम सबसे कारगर विकल्प

भले ही महामारी के चलते हाइब्रिड रिमोट वर्किंग का चलन आया हो, लेकिन इसके फायदों को देखते हुए यह पूरी दुनिया में एक अच्छा विकल्प बनकर उभरा है। सर्विस सेक्टर में काम कर रहे दुनियाभर के करोड़ों लोगों ने घर पर ही रहकर इंडस्ट्री को तेजी दी। बेहतर रिजल्ट से अब आने वाली पीढ़ी इस विकल्प को एक स्थाई वर्क कल्चर के तौर पर देख रही है।

हाइब्रिड रिमोट वर्किंग के फायदे

वर्क फ्रॉम होम एक ऐसा टूल है, जिसमें नियोक्ता और कर्मचारी दोनों के लिए लाभकारी है। जहां एक ओर नियोक्ता के ऑफिस स्पेस और इंफ्रास्ट्रचर का खर्च बच जाता है, वहीं कर्मचारी भी रोजाना के सफर जैसी परिस्थितियों से बच जाता है। इसमें एम्प्लाई का कन्वेंस, रेंट और समय बचेगा। WEF के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब आपको खुद पर इस लिहाज से काम करना चाहिए, ताकि आप आने वाले समय के वर्क कल्चर में फिट हो सकें। हाइब्रिड रिमोट वर्किंग प्रोडक्टिव होने के साथ ही नए अवसरों का भी एक साधन है।


कैसे करें खुद को नए वर्क कल्चर के लिए तैयार


अपने स्किल को अपडेट करें

आने वाला 5 सालों में इंडस्ट्री पूरी तरह से ट्रांसफार्म होने लगेगी। सर्विस इंडस्ट्री का स्वरूप बदलेगा जिसकी वजह से वर्किंग स्टाइल भी बदल जाएगी। जाहिर सी बात है कि बदलाव के लिए खुद को तैयार रखें।

प्रोडक्टिविटी को इंप्रूव करना सबसे जरूरी

अमेरिका में 2014 वर्क फ्रॉम होम बेस्ड एक स्टडी की गई थी। स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर निकोलस ब्लूम ने अपनी स्टडी में यह पाया कि चीन की एक ट्रैवल वेबसाइट के लिए घर से काम कर रहे एम्प्लाई ज्यादा प्रोडक्टिव और संतुष्ट हैं। इसी तरह 2020 में भी एक स्टडी की गई जिसमें कोरोना के दौरान अमेरिकी कंसल्टेंट कंपनी मरकर ने घर से काम करने वालों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि 90% एम्प्लाई वर्क फ्रॉम होम से खुश हैं और इनकी प्रोडक्टविटी भी बढ़ी है।

एक्सपर्ट्स ये कहते हैं कि, वर्क फ्रॉम होम या हाइब्रिड वर्क में काम करते हुए प्रोडक्टिविटी पर फोकस बढ़ेगा। पहुंच की चुनौती नहीं होगी, इसलिए कंपटीशन भी बढ़ेगा। पहले विदेशों में नौकरी वही कर सकता था, जो वहां जा सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। मतलब आने वाले समय में सभी के लिए पहुंच की समस्या खत्म होगी। ऐसे में घर बैठे ही जॉब और ग्रोथ खोज रहे लोगों को ज्यादा प्रोडक्टिव होना पड़ेगा।

लाइफ और काम में बैलेंस

किसी भी नई तकनीक के साथ चैलेंज भी आती है। ऐसे में वर्क फ्रॉम होम का कल्चर भी अच्छी-बुरी दोनों संभावनाएं लेकर आया है। कोरोना के बाद यह देखने को मिला कि ज्यादातर लोग लाइफ और वर्क में बैलेंस नहीं बना सके। अमेरिकी रिसर्चर जोस मारिया बारेरो का कहना है कि ग्लोबल लेवल पर वर्क फ्रॉम होम करते हुए प्रोडक्टिविटी घटी भी है और बढ़ी भी है। जो लोग वर्क और लाइफ में बैलेंस बनाने में सफल रहे, उनकी प्रोडक्टिविटी ज्यादा रही और जो लोग ऐसा नहीं कर पाए, उनकी प्रोडक्टिविटी घटी है। ऐसे में हाइब्रिड वर्क कल्चर को अपनाना चाहते हैं, तो वर्क और लाइफ में बैलेंस बनाना सबसे जरूरी काम है।

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