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भारतीय रक्षा क्षेत्र देता है सबसे ज्यादा नौकरियां, जानें क्या कहती है स्टेटिस्टा की रिपोर्ट!

by Rishita Diwan

Date & Time: Nov 12, 2022 10:00 AM

Read Time: 2 minute



नौकरी देने के मामले में भारतीय रक्षा क्षेत्र दुनिया में सबसे आगे है। जर्मन कंपनी स्टेटिस्टा की रिपोर्ट मेंइस बातका खुलासा हुआ है। बतादें स्टेटिस्टा जर्मनी की एक प्राइवेट संस्था है, जो दुनियाभर में अलग-अलग मुद्दों पर डाटा या आंकड़ों को जारी करता है। रिपोर्ट में भारत की डिफेंस मिनिस्ट्री को दुनिया का सबसे बड़ा नौकरी देने वाला कहा है। भारतने इस मामले में अमेरिका और चीन को भी पीछे कर दिया है। इसके मुताबिक भारत पहले नंबर पर दूसरे नंबर पर अमेरिका और चीन तीसरे नंबर पर काबिज है।

स्टेटिस्टा के अनुसार मौजूदा सरकार ने रक्षा विभाग में 29.2 लाख लोगों को नौकरी पर रखा है। यह नौकरियां तीनों सेनाओं एयर फोर्स, नेवी और आर्मी के सभी विभागों में दी गई हैं। भारत के बाद अमेरिकी डिफेंस मिनिस्ट्री का नंबर आता है। यहां 29.1 लोगों को नौकरी मिली है। जिसके बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने 25 लाख लोगों को नौकरी पर रखा है।

स्टेटिस्टा की यह रिपोर्ट कहती है कि अमेरिकन कंपनी वॉलमार्ट के पास सबसे अधिक एम्पलाई हैं वहीं वॉलमार्ट ने 23 लाख लोगों को नौकरी पर रखा है। अमेजन की बात करें तो उनके पास 16 लाख कर्मचारी फिलहाल हैं। अमेजन एक अमेरिकन कंपनी है।

भारी मात्रा में सैन्य खर्च करती है भारत

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व सैन्य खर्च 2021 में 2.1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा सैन्य खर्च के मामले में अमेरिका सबसे आगे है। बाद में चीन और फिर तीसरे नंबर पर भारत आता है। न्यूज एजेंसी की मानें तो 2021 में अमेरिका का सैन्य खर्च 801 बिलियन डॉलर पर था। वहीं, चीन ने अपनी सेना के लिए 293 बिलियन डॉलर और भारत ने 76.6 बिलियन डॉलर खर्च किया है।

चार साल पहले 2018 में भारत 5वें नंबर पर था और तब भारत का कुल सैन्य खर्च 66.5 बिलियन डॉलर था। यानी 2021 तक इस खर्च में 10.1 बिलियन डॉलर (7.74 लाख करोड़ रुपए) की बढ़ोत्तरी हुई थी।

रिपोर्ट का कहनी है कि 2021 में अमेरिकी सैन्य खर्च 801 बिलियन अमेरिकी डॉलर्स तक पहुंचा था, जो 2020 के मुकाबले 1.4 फीसदी कम है। 10 साल में अमेरिका ने मिलिट्री रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए अपना बजट 24 फीसदी बढ़ाया और हथियारों की खरीद पर खर्च में कुल 6.4 फीसदी की कमी की थी ।

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