×
Videos Agriculture Health Business Education Positive Breaking Sports Ansuni Gatha Advertise with Us Catch The Rainnew More
HOME >> TECH

TECH

PSLV से भी ज्यादा शक्तिशाली NGLV विकसित कर रहा है ISRO, जानें क्या है खासियत और फायदे!

by Rishita Diwan

Date & Time: Oct 15, 2022 9:00 AM

Read Time: 2 minute



PSLV: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) को लॉच करने वाला है। यह एक रॉकेट है, जिसके जरिए पुराने वर्कहॉर्स पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) को बदला जाएगा। बता दें पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) 1980 के दशक में विकसित हुआ था।

'इंजीनियर्स कॉन्क्लेव 2022' के मौके पर मिली जानकारी

PSLV की जगह नेक्स्ट जेनरेशन लॉन्च व्हीकल (NGLV) को लॉच करने की जानकारी इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने 13 अक्टूबर को को वालियामाला में 'इंजीनियर्स कॉन्क्लेव 2022' के मौके पर प्रेसवार्ता के दौरान दी।
इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि, कि पीएसएलवी (PSLV) को 1980 के दशक में विकसित किया गया था। ऐसे में यह 2020 की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। यही वजह है कि इसमें विकास की जरूरत है। हालांकि, पीएसएलवी 

(PSLV) को रिप्लेस करने के समय को लेकर उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अनुमोदित शेष प्रक्षेपणों को पूरा करने के बाद इसरो (ISRO) रॉकेट का उपयोग बंद करेगा।

NGLV में उपयोग की जाने वाली विशेष तकनीक के बारे में बताते हुए सोमनाथ ने कहा कि, यह 'सेमी-क्रायोजेनिक' टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करेगा जो अच्छा भी होगा और इसकी लागत भी कम आएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नए रॉकेट को दोबारा भी प्रयोग किया जा सकता है। इसरो के अध्यक्ष ने यह भी बताया कि रॉकेट का पेलोड लगभग पांच टन होगा और जरूरत पड़ने पर 10 टन तक बढ़ाया जा सकता है।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह कहा कि उद्योग के लिए राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में इस रॉकेट (NGLV) का समर्थन और निर्माण करना संभव है, जो पर्याप्त समय के लिए संचालित हो सकता है।

'भारत कृषि उपग्रह' विकसित करने की योजना

इसरो के अध्यक्ष सोमनाथ ने बताया कि इसरो फसलों के विकास के पैटर्न का अध्ययन करने, सिंचाई की कमियों की पहचान करने और जानकारी प्रदान करने के लिए एक 'भारत कृषि उपग्रह' डेवलप करने के लिए केंद्रीय कृषि विभाग के साथ चर्चा की जा रही है। इसका प्रयोग कीट नियंत्रण और कृषि बीमा दावों के परीक्षण में होगा। साथ ही इस उपग्रह का प्रयोग दूसरी जरूरत की चीजों में भी होगा।

Also Read: Chandrayan-2: ISRO को मिली कामयाबी पहली बार चांद की सतह पर सोडियम का चला पता

You May Also Like


Comments


No Comments to show, be the first one to comment!


Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *