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भारत को आज़ादी दिलाने में छत्तीसगढ़ का भी था अहम योगदान। जाने कैसे

by admin

Date & Time: Jan 21, 2021 12:01 AM

Read Time: 2 minute

1818  में छत्तीसगढ़ पहली बार ब्रिटिश राज के अंदर आया। ब्रिटिश सरकार ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक और रेवेन्यू सिस्टम पर बहुत भारी चोट पहुँचाई जिसका छत्तीसगढ़ के लोगों पर बहुत ही बुरा प्रभाव हुआ।  ब्रिटिशों की घुसपैठ का आदिवासियों द्वारा बस्तर में कड़ा विरोध किया गया और यहीं से शुरुआत हुई छत्तीसगढ़ की भारत को आज़ादी दिलाने में योगदान की। 

भारत को आज़ादी दिलाने वाले छत्तीसगढ़ के वीर सपूत

ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत आते ही छत्तीसगढ़ में स्थानीय किसानों का शोषण, भारी अकाल, क्रिस्चियन मिशिनरी द्वारा धर्म परिवर्तन जैसी घटनाएँ शुरू हो गयी। इन घटनाओं के ख़िलाफ़ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में राष्ट्रीय चेतना जगाने में पंडित सुंदरलाल शर्मा, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, श्री माधवराव और श्री मेधावले जैसे छत्तीसगढ़ के अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान दाँव पर लगा दी। 1857 में स्वतंत्रता का पहला युद्ध छत्तीसगढ़ में वीर नारायण सिंह के नेतृत्व में लड़ा गया था। वे आज़ादी की जंग में छत्तीसगढ़ के पहले शहीद हुए। बस्तर वर्ष 1857 में भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से शामिल था। 

छत्तीसगढ़ का व्यक्तिगत सत्याग्रह आंदोलन

1940 के बॉम्बे कांग्रेस अधिवेशन में, गांधीजी द्वारा प्रस्तुत व्यक्तिगत सत्याग्रह पारित किया गया था।इसमें छत्तीसगढ़ के भी कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया। रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल को व्यक्तिगत सत्याग्रही के रूप में नियुक्त किया गया।  इस दौरान कई नेताओं को ब्रिटिश सरकार की क्रूरता के कारण जेल में भी जाना पड़ा। 

छत्तीसगढ़ का असहयोग आंदोलन

छत्तीसगढ़ में असहयोग आंदोलन की शुरुआत कंडेल नहर आंदोलन के रूप में धमतरी से की गयी। इसे सफल बनाने के लिए गांधीजी 1920 में छत्तीसगढ़ भी आए। इस दौरान छत्तीसगढ़ के कई बड़े नेताओं द्वारा सारे छत्तीसगढ़ में कई सभाएँ भी की गयी।

सिविल डिसओबेडिएंस आंदोलन

जब एक ओर गांधीजी ने 1930 में देश में सिविल डिसओबेडिएंस आंदोलन की शुरुआत की, तब छत्तीसगढ़ के रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल ने इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जो 1934 तक जारी रहा।

भारत छोड़ो आंदोलन

क्रिप्स मिशन की असफलता के बाद 1942 में भारत छोडो आंदोलन की शुरुआत की गयी। छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में कई नेताओं, जैसे पंडित रविशंकर, छेदीलाल सिंह, और श्री रघुनन्दन सिंगरौल द्वारा इस आंदोलन को आगे बढ़ाया गया।  

आज भारत का 74वा स्वतंत्रता दिवस है। भारत के अनेकों स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। छत्तीसगढ़ ने भी भारत को आज़ादी दिलाने में एक ऐसी मिसाल पेश की जिसका कर्ज़दार हर भारतीय है। तो आइए इन वीर योद्धाओं को नमन करें और छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को याद करें। आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की ढेरों शुभकामनाएं।     

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