Jagannath Dham: क्या आप जानते हैं पुरी का ये रहस्य!

यहां ईश्वर खुद यात्रा करते हैं। उनका दिल इंसानों की तरह धड़कता है। वो स्नान करते हैं। भोजन करते हैं। अपने भाई और बहनों के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं। संस्कृति और धर्म के रंग में रंगते हैं। बीमार होते हैं। वो देह त्यागते हैं और नए शरीर में प्रवेश भी करते हैं। हमारी और आपकी तरह।

4 धामों में से एक है पुरी

भारत के ईस्ट में हिंद महासागर के तट पर बसा है एक शहर पुरी। जिसकी पहचान जगन्नाथ पुरी के रूप में है। ये हिंदू धर्म के चार धामों में से एक धाम के रूप में स्थापित है। हिंदू धर्म में ये माना गया है कि चार धामों की यात्रा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जहां विराजते हैं सृष्टि के संरक्षक भगवान विष्णु के अवतार, जगत के नाथ जगन्नाथ। इसी मोक्ष को पाने के लिए लोग पुरी के जगन्नाथ धाम (Jagannath Dham) पहुंचते हैं। चार धाम के अलावा पुरी का आकर्षण यहां का रथ उत्सव भी है। जो हर साल उत्साह और ऊर्जा से परिपूर्ण होता है।

दुनियाभर में प्रसिद्ध है पुरी का ‘रथयात्रा’

पुरी रथ यात्रा उत्सव भारतीय और हिंदू परंपरा के अद्भुत रंग, संगीत, शिल्पकला का शानदार प्रदर्शन है। हर साल 10 दिनों तक चलने वाले रथ यात्रा उत्सव को मनाने लाखों लोग जगन्नाथ पुरी पहूंचते हैं। यहां 3 रथों में भगवान जगन्नाथ अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। रथयात्रा के पहले भगवान जगन्नाथ को उनके भाई-बहनों के साथ बाहर लाया जाता है। फिर 108 कलशों से उन्हें स्नान करवाया जाता है। इसके बाद भगवान 15 दिन के लिए बीमार हो जाते हैं और मंदिर को बंद कर दिया जाता है, ताकि भगवान आराम कर सकें। फिर रथयात्रा के दिन मंदिर को खोला जाता है। रथ के जरिए भगवान जगन्नाथ मुख्य मंदिर से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं।

दिन-रात मेहनत कर बनाते हैं रथ

3 रथों के लिए 42 पहिए बनाए जाते हैं। कारीगर दिन रात मेहनत कर इन रथों को प्राचीन मैथड से तैयार करते हैं। वहीं अगर भगवान जगन्नाथ (Jagannath Dham) के दर्शन की बात करें तो इसकी अनुमति सिर्फ हिंदुओं को ही है। विदेशी या किसी अन्य धर्म के लोग यहां दर्शन नहीं कर सकते हैं।  

कैसे हुआ मंदिर का निर्माण

पौराणिक साक्ष्यों की तरफ देखें तो मंदिर को 12th century में गंग वंश के प्रसिद्ध राजा अनंतवर्मन चोडगंग ने बनवाया था। लेकिन मंदिर में विराजे भगवान जगन्नाथ के पुरी में आने की कहानी आपको आश्चर्य में डाल देगी। पूरी कहानी जानने के लिए यूट्यूब पर विडियो जरूर देखें।

मंदिर से जुड़े हैं कई रहस्य

आप जब पुरी पहुंचेंगे तो देखेंगे कि मुख्य मंदिर की परछाई किसी भी समय आपको दिखाई नहीं देगी। 214 फीट ऊंचे इस मंदिर में रोजान ध्वज चढ़ाई जाती है। ध्वज चढ़ाने वाला बिना किसी सहारे के आस्था के भरोसे ही मंदिर के टॉप पर चढ़ जाते हैं। और ये ध्वज हमेशा हवा के विपरित दिशा में लहराता है। मंदिर में हर दिन एक फिक्स अमाउंट में ही प्रसाद बनता है लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बाद भी प्रसाद कम नहीं होता। हर 8, 12 या 19 साल में भगवान जगन्नाथ (Jagannath Dham) की मूर्ति को बदली जाती है। इस रस्म को नव कलेवर कहा जाता है। जिसका अर्थ है एक देह को त्याग कर दूसरे में प्रवेश करना।

Positive सार

भगवान जगन्नाथ (Jagannath Dham) के दर्शन हो या जगन्नाथ रथ यात्रा, ये सनातन धर्म की विशिष्टता के दर्शन देते हैं। ये दिव्य और प्राचीन मंदिर हमारी अमूल्य धरोहर का प्रतीक हैं। यहां की संस्कृति, धार्मिक आस्था और पौराणिक कथाएं-गाथाएं हमारी जड़ों को सीचतें हैं। यहां हम अविश्वसनीय ऊर्जा, उत्साह, उमंग से साक्षी बनते हैं। और खुद को एक अनंत धार्मिक यात्रा से जोड़ते हैं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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