Guru Khushwant Saheb: छत्तीसगढ़ की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव!

20 अगस्त 2025 को छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक अहम फैसला हुआ जिसने राजनीतिक समीकरण को संतुलित करने का काम किया। पहली बार तीन नए विधायकों को कैबिनेट में जगह दी गई। सबसे खास बात यह रही कि पहली बार सतनामी समाज की गुरु परंपरा से जुड़े किसी व्यक्ति को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई। यह पद मिला है गुरु खुशवंत साहेब को।

कौन हैं गुरु खुशवंत साहेब?

गुरु खुशवंत साहेब, सतनामी समाज के वर्तमान धर्मगुरु गुरु बलदास साहेब गुरु गोसाईं के बेटे हैं। 1989 में रायपुर ज़िले के आरंग में जन्मे गुरु खुशवंत साहेब को छत्तीसगढ़ सरकार में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री बनाया गया है।

यह केवल राजनीतिक पद नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा की बागडोर है जिसकी नींव गुरु घासीदास जी ने रखी थी।

सतनामी समाज और गुरु परंपरा

  • सतनामी समाज का इतिहास केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और समानता की लड़ाई से भी जुड़ा है।
  • 18वीं सदी में गुरु घासीदास जी ने छुआछूत, भेदभाव और अंधविश्वास के खिलाफ आवाज उठाई।
  • उनका संदेश था- “सतनाम ही सत्य है” यानी जीवन का आधार सत्य और मानवता हो।
  • उन्होंने वंचित और दलित समाज को सम्मान और आत्मसम्मान के साथ जीने का हक दिलाया।
  • गिरौदपुरी धाम आज भी उनकी तपोभूमि और जन्मभूमि है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु जुटते हैं और इसे “समानता और भाईचारे का पर्व” कहा जाता है।

वंश और सामाजिक योगदान

  • गुरु खुशवंत साहेब का परिवार छत्तीसगढ़ की परंपरा में विशेष स्थान रखता है।
  • गुरु घासीदास जी से शुरू हुई यह परंपरा उनके पुत्र गुरु बालकदास जी तक पहुंची।
  • इसके बाद नेतृत्व संभाला गुरु बलदास साहेब गुरु गोसाईं ने, जिन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक एकता पर काम किया।
  • अब इस धरोहर को आगे बढ़ा रहे हैं गुरु खुशवंत साहेब।

क्यों खास है मंत्री पद की जिम्मेदारी?

सतनामी समाज छत्तीसगढ़ के सामाजिक ढांचे का एक मजबूत स्तंभ है। शिक्षा, श्रमिक वर्ग, स्वास्थ्य और समानता के मुद्दों पर यह समाज हमेशा आगे रहा है। ऐसे में गुरु खुशवंत साहेब का मंत्री बनना न सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि है बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और ऐतिहासिक परंपरा को सम्मान देने का प्रतीक है।

Positive सार

छत्तीसगढ़ सरकार का यह फैसला सतनामी समाज के लिए संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक है। साथ ही यह उन परंपराओं को नमन है जो सत्य, समानता और मानवता पर आधारित हैं। गुरु खुशवंत साहेब का नेतृत्व अब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नया अध्याय लिखेगा।

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Rishita Diwan

Content Writer

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