Fulbasan Bai: सपने देखने वाली महिला की संघर्षपूर्ण कहानी!

Fulbasan Bai: फूलबासन बाई यादव का जीवन एक सच्ची प्रेरणा है। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सुकुलदैहान गांव में 5 दिसंबर 1969 को जन्मी फूलबासन का बचपन गरीबी, अशिक्षा और सामाजिक बंधनों के बीच बीता। सिर्फ 10 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई, और स्कूल छोड़ने के बाद उनका जीवन घर के कामों और अभावों के बीच सिमट कर रह गया। लेकिन यही अभाव उनके जीवन का सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत बन गया। उन्होंने संकल्प लिया कि वह न केवल खुद के लिए, बल्कि सैकड़ों-हजारों महिलाओं के लिए बदलाव लाएंगी।

पहला कदम

फूलबासन ने सबसे पहले अपने गांव में सरकारी गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। उन्होंने स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं को एकजुट किया और उनकी मदद से मवेशी पालन के लिए धन जुटाया। इन समूहों को अपनी ताकत पहचानने के बाद, फूलबासन ने इन्हें एक दिशा दी और महिलाओं को नए-नए प्रयोगों में शामिल किया। ‘प्रज्ञा महिला समूह’ जैसे संगठनों की शुरुआत की, जो महिला सशक्तिकरण के रास्ते पर पहला कदम था।

महिला सशक्तिकरण का प्रतीक

फूलबासन बाई ने अपनी यात्रा की शुरुआत में ‘माँ बमलेश्वरी जनहित कार्य समिति’ नामक एक एनजीओ की नींव रखी। आज इस संगठन में 2 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं। उनका संगठन महिला स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। फूलबासन की पहल से अब तक 25 करोड़ रुपये की सामूहिक बचत हो चुकी है।

समाज में बदलाव की अनमोल कोशिशें

फूलबासन के कार्य सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने 1,741 स्कूलों में मिड-डे मील की व्यवस्था शुरू की, बाल विवाह रोकने के लिए 570 विवाहों को रुकवाया और 33 गरीब लड़कियों की शादी करवाई। शराबबंदी के अभियान में भी फूलबासन ने क्रांतिकारी कदम उठाए और 625 गांवों में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा, उन्होंने 2800 बच्चों को गोद लिया और खुले में शौच को खत्म करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया।

जल संरक्षण की दिशा में कदम

फूलबासन बाई ने जल संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने 20,000 जल सोखने वाले गड्ढे बनवाए और 5 लाख पौधे लगाए। इनकी पहल पर महिलाएं अब जल संरक्षण के लिए एकजुट हो रही हैं और इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

समाज के हर क्षेत्र में योगदान

फूलबासन बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना के ब्रांड एंबेसडर के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। साथ ही, वे महिला स्व-रोजगार योजनाओं के लिए NABARD से 900 करोड़ रुपये जुटा चुकी हैं। उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण ने उन्हें कई महत्वपूर्ण सम्मान दिलाए, जैसे कि 2008 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री। इसके अलावा, उन्होंने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 12वें सीजन में भी 50 लाख रुपये जीते, जिसे उन्होंने महिला सशक्तिकरण में लगा दिया।

एक सच्ची नायिका

फूलबासन बाई यादव सिर्फ एक नाम नहीं हैं, बल्कि एक क्रांति का प्रतीक हैं। उनका जीवन यह सिखाता है कि बदलाव की शुरुआत हमारे भीतर से होती है। वह आज भी अपनी जमीन से जुड़ी हुई हैं और समाज के लिए काम करती हैं। उन्होंने महिलाओं को उनका अधिकार दिलाया और समाज में उनका स्थान तय किया।

एक नई शुरुआत

उनका संघर्ष एक ऐसी नई शुरुआत की ओर इशारा करता है, जिसमें महिलाएं खुद को पहचानती हैं, और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाती हैं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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