डिजीटल बैंकिंग के जमाने में पैसों का लेनदेन काफी आसानी है। इनवेस्टमेंट से लेकर पेमेंट सब मिनटों का काम है। फाइनेंशियल सिक्योरिटी के लिए भी आज हर कोई बैंकिंग से जुड़ा है।
पर क्या आप जानते हैं कि भारत में बैंकिंग कल्चर कैसे आया….ये बात है करीब 1894 के आस-पास की जब हम भारतीयों के पास अपना कोई बैंक नहीं था। हमें कर्ज लेने के लिए अंग्रेजों के बैंक या फिर किसी साहूकर पर डिपेंडेंट होना पड़ता था, और ब्याज तो प्रिंसिपल अमाउंट से कहीं ज्यादा। इस परेशानी को दूर करने का जिम्मा उठाया लाला लाजपत राय ने। उन्होंने इंडियन ज्वाइंट स्टॉक बैंक के बारे में अपने दोस्तों से बात की, जिसे स्वदेशी मिशन का फर्स्ट स्टेप भी कहा जाता है। 19 मई 1894 को लाहौर के अनारकली बाज़ार में पंजाब नेशनल बैंक की पहली ब्रांच रजिस्टर हुई। दिलचस्प बात ये थी कि इस बैंक को शुरू करने वाले ज्यादातर लोगों को बैंक चलाने का कोई एक्सपीरियंस नहीं था। उस वक़्त PNB में 14 शेयरहोल्डर और 7 डायरेक्टर्स ने बैंक के बहुत कम हिस्से अपने पास रखे। वो मानते थे कि बैंक पर सबसे ज्यादा अधिकार आम लोगों का होना चाहिए। लालबहादुर शास्त्री और महात्मा गांधी ने भी यहीं अपना खाता खोला। ये बैंक भारतीयों के वित्तीय सुरक्षा का आधार बनी। भारत की आजादी के वक्त लाला योध राज, जो कि इस बैंक के मेंबर थे उन्हें चिंता थी, कि आज़ादी के साथ आने वाले बँटवारे से बैंक को नुकसान हो सकता है। इसलिए, स्वतंत्रता से कुछ दिन पहले ही उन्होंने PNB के मेन ब्रांच को लाहौर से दिल्ली शिफ्ट किया। ऐसा कहते हैं, कि विभाजन में बहुत से लोगों ने अपने बैंक के कागज़ात खो दिए। बावजूद इसके बैंक ने सभी को उनके जमा किये हुए पैसे दिए। आजाद भारत को अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए बैंक की जरूरत थी, जिसे पूरा किया इस बैंक ने। जो आज भारत के सबसे बड़े बैंकों में से एक है। लाला लाजपत राय की दूरदृष्टिता का ये परिणाम है कि भारत आज दुनिया के बड़े बैंकिंग सेक्टर्स में से एक है।