Queen of millets: कौन हैं रायमती घुरिया? लोग कहते हैं क्वीन ऑफ मिलेट्स!

Queen of millets: ओडिशा के कोरापुट के पास छोटे से गांव में रहने वाली रायमती घुरिया अब पूरे देश में ‘क्वीन ऑफ मिलेट्स’ के नाम से मशहूर हो गई हैं। धान की 70 और मिलेट्स की 30 किस्मों के संरक्षण, संवर्धन और प्रशिक्षण पर रायमती ने जो काम किया है वह वाकई सराहनीय है। सिर्फ सातवीं कक्षा तक पढ़ीं रायमती ने साबित कर दिया है कि मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो फिर कोई समस्या या परेशानी आपके आड़े नहीं आ सकती है।

मिलेट की 30 किस्मों को किया संरक्षित

रायमती किसी बड़े स्कूल या कॉलेज से नहीं पढ़ी हैं लेकिन मिलेट्स और धान की किस्मों को लेकर उनकी समझ किसी बड़े कृषि विशेषज्ञ से कम नहीं है। रायमती ने धान और मिलेट की जिन किस्मों को संरक्षित किया है उसमें जामकोली, जुआना, मंडिया, जसरा और कुंद्रा बाटी जैसे कई नाम शामिल हैं। रायमती को इस काम करने की प्रेरणा कमला पुजारी से मिली जिन्होंने धान की 100 से ज्यादा किस्मों के बीज को संरक्षित किया है। इस काम के लिए कमला पुजारी पद्मश्री से सम्मानित की जा चुकी हैं।

G-20 शिखर सम्मेलन में लिया हिस्सा

रायमती की इस उपलब्धि की चर्चा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। साल 2023 में 9 सितंबर को हुए G-20 सम्मेलन में दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों के बीच रायमती घुरिया भी आमंत्रित थीं। G-20 सम्मेलन में रायमती को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मिलने का मौका मिला। सम्मेलन में उन्होंने मिलेट्स से बनने वाले पकवानों और व्यंजनों की जानकारी दी साथ ही मिलेट्स के उपयोग से होने वाले फायदों के बारे में भी बताया। 

गांव में बनाया फॉर्म स्कूल      

रायमती चाहती हैं कि मिलेट्स के संरक्षण और संवर्धन के लिए उनके अलावा भी लोग सामने आएं। इसके लिए उन्होंने गांव में फॉर्म स्कूल बनवाया है। 2012 में तैयार हुए इस स्कूल के लिए रायमती ने अपनी पैतृक जमीन दी थी। इस स्कूल में वो किसानों को उन्नत खेती के लिए प्रशिक्षण देती हैं ताकी खेती के जरिए वो अपनी आय बढ़ा सकें। रायमती अपने समुदाय के ढाई हजार किसानों को मिलेट की खेती के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। ट्रेनिंग में वो उन्हें मिलेट की खेती के लिए उपयोग की जाने वाली नई-नई तकनीकों के बारे में जानकारी देती हैं।

‘क्वीन ऑफ मिलेट्सकहने से मिलती है खुशी

रायमती, खुद को क्वीन ऑफ मिलेट्स कहे जाने पर खुशी का अनुभव करती हैं। उनकी शादी 16 साल की कम उम्र में ही हो गई थी। लेकिन खेती के लिए उनकी रुचि शादी के बाद भी कम नहीं हुई। घर के काम करने के बाद उन्होंने अपने आसपास के किसानों के साथ मिलकर जानकारी ली और मिलेट्स की किस्मों को संरक्षित करना शुरु किया। आगे बढ़ते हुए रायमती एमएस स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन से भी जुड़ीं और संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को सीखा।

Positive सार

एक तरफ जहां केंद्र सरकार मिलेट्स पर जोर दे रही है वहीं दूसरी तरफ एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली रायमती इस ओर बड़ा काम कर रही हैं। कम पढ़ी लिखी होने के बाद भी रायमती मिलेट्स की खेती, बीज को संरक्षित करने और इससे बने खाने से जुडी सभी जानकारी रखती हैं। राज्य सरकार भी उन्हें इस ओर आगे बढ़ने के लिए हर संभव मदद करती है। रायमती उन महिलाओं के लिए बड़ी प्रेरणा हैं जो छोटे और पिछड़े जगहों से आती हैं लेकिन जीवन में कुछ बड़ा करना चाहती हैं। रायमती हमें भी मिलेट्स को अपने खाने में शामिल करने के लिए प्रेरित करती हैं। 

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Rishita Diwan

Content Writer

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