PMMSY Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में खेती की एक नई लहर दौड़ रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को केवल धान की पारंपरिक खेती तक सीमित न रहकर मुनाफे वाले नए विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। इसी प्रेरणा का जीवंत उदाहरण पेश किया है जशपुर के बगीचा विकासखंड के ग्राम भीतघरा के किसान जनक यादव ने, जिन्होंने मछली पालन को अपनी तकदीर बदलने का जरिया बना लिया है।
धान के खेत में अब उछलती हैं मछलियाँ
जनक यादव कभी पारंपरिक रूप से धान की खेती करते थे, जहाँ साल भर की कड़ी मेहनत के बाद भी मुनाफा सीमित था। बदलाव की चाह में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का रुख किया। सरकारी योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन के साथ, उन्होंने अपने खेत के एक हिस्से को दो विशाल तालाबों में बदल दिया।
इस परिवर्तनकारी कदम के लिए शासन ने उन्हें 4 लाख 20 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया। इतना ही नहीं, मत्स्य पालन विभाग द्वारा उन्हें उन्नत मत्स्य बीज, जाल और मछलियों के रखरखाव के लिए आइस बॉक्स जैसी आवश्यक सामग्रियां भी उपलब्ध कराई गईं।
पॉन्ड लाइनर तकनीक
आधुनिकता से मिला मुनाफा
जनक यादव की सफलता का सबसे बड़ा राज ‘पॉन्ड लाइनर तकनीक’ का उपयोग है। पारंपरिक तालाबों में पानी के रिसाव और जल स्तर को बनाए रखने की चुनौती होती है, लेकिन इस आधुनिक तकनीक ने उनकी राह आसान कर दी।
- जल संरक्षण- पॉन्ड लाइनर की मदद से तालाब में पानी का स्तर स्थिर रहता है।
- आसान प्रबंधन- आवश्यकता पड़ने पर पंप के जरिए पानी भरकर जल संतुलन बनाया जा सकता है।
- ऑक्सीजन प्रणाली- तालाब में कृत्रिम ऑक्सीजन प्रणाली (Aeration) लगाकर मछलियों की तेजी से वृद्धि सुनिश्चित की जा रही है।
- निरंतर आय- जहाँ धान की फसल साल में एक बार आय देती है, वहीं मछली पालन से उन्हें साल भर निरंतर कमाई हो रही है।
ग्रामीण रोजगार के सृजनहार
जनक यादव आज केवल खुद के लिए आय नहीं कमा रहे, बल्कि उन्होंने गाँव के अन्य लोगों को भी इस कार्य से जोड़कर रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं। पिछले 3-4 वर्षों से लगातार मछली पालन कर रहे जनक अब एक ‘मॉडल किसान’ बन चुके हैं। वे बताते हैं कि मत्स्य बीज उत्पादन के लिए मार्च, अक्टूबर और नवंबर का महीना सबसे उपयुक्त होता है, जिससे बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
सरकार की योजनाओं का मिला मजबूत साथ
छत्तीसगढ़ शासन की नीति रही है कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जाए। जनक यादव की कहानी यह साबित करती है कि यदि सरकारी अनुदान, सही तकनीक और किसान की मेहनत का संगम हो, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली जा सकती है।
Positive सार
जनक ने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी बंजर या कम उपजाऊ जमीन पर मछली पालन जैसे वैकल्पिक व्यवसाय शुरू करें। उनका मानना है कि शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर किसान न केवल कर्जमुक्त हो सकते हैं, बल्कि एक उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं।जनक यादव की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और विभागीय मार्गदर्शन से किसान कैसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकते हैं। जशपुर के भीतघरा गाँव से निकली यह गूँज आज पूरे छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक मशाल बन गई है।

