MSP 2025-26: अब इन 5 फसलों की सरकारी खरीद को मंजूरी!

MSP 2025-26: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने नए साल में प्रदेश के किसानों के लिए खुशियों का पिटारा खोल दिया है। राज्य के दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए छत्तीसगढ़ में तुअर, उड़द, मूंग, सोयाबीन और मूंगफली की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

यह निर्णय न केवल किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाएगा, बल्कि प्रदेश में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को भी बढ़ावा देगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस निर्णय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘किसान कल्याण’ संकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।

किसानों को मिलेगा फायदा

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी साझा की है। राज्य सरकार ने केंद्र को मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme – PSS) लागू करने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।

इस योजना के लागू होने से अब किसानों को अपनी उपज कम दामों पर खुले बाजार में बेचने की मजबूरी नहीं होगी। सरकार सीधे किसानों से फसल खरीदेगी और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में सुनिश्चित किया जाएगा।

फसलों की खरीदी के लिए निर्धारित लक्ष्य

(Targeted Procurement)

सरकार ने विभिन्न फसलों के लिए खरीदी की मात्रा भी निर्धारित कर दी है। स्वीकृत प्रस्ताव के अनुसार, छत्तीसगढ़ में इस सीजन में निम्नलिखित मात्रा में फसलों की खरीदी की जाएगी,

फसल का नामखरीदी का लक्ष्य (मीट्रिक टन)
तुअर (Arhar)21,330
उड़द (Urad)25,530
सोयाबीन (Soybean)4,210
मूंगफली (Groundnut)4,210
मूंग (Moong)240

ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार का मुख्य ध्यान दलहन उत्पादन को मजबूती देने पर है, विशेषकर तुअर और उड़द की खेती करने वाले किसानों को इससे व्यापक लाभ होने वाला है।

किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?

आमतौर पर देखा गया है कि बंपर पैदावार होने की स्थिति में खुले बाजार में फसलों की कीमतें एमएसपी से नीचे गिर जाती हैं। ऐसी स्थिति में किसान ‘संकटपूर्ण बिक्री’ (Distress Sale) के लिए मजबूर हो जाते हैं। मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत सरकार यह गारंटी देती है कि वह पूर्व-निर्धारित एमएसपी पर ही फसल खरीदेगी, चाहे बाजार का भाव कुछ भी हो।

इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और वे अगली फसल के लिए बेहतर निवेश कर सकेंगे। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार खरीदी की सभी तैयारियाँ समयबद्ध तरीके से पूरी करेगी ताकि किसी भी किसान को मंडियों में असुविधा न हो।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुधरेगी

छत्तीसगढ़ को पारंपरिक रूप से ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। हालांकि, केवल धान पर निर्भरता मिट्टी की उर्वरता और जल स्तर के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। दलहन और तिलहन की एमएसपी पर खरीदी से किसान धान के अलावा अन्य फसलों की ओर आकर्षित होंगे।

  1. आर्थिक सुरक्षा- निश्चित मूल्य मिलने से किसानों का जोखिम कम होगा।
  2. मिट्टी की सेहत- दालें मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) का काम करती हैं, जिससे भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।
  3. रोजगार- तिलहन उत्पादन से स्थानीय स्तर पर तेल मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों (Processing Units) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार मिलेगा।

भविष्य की योजना

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्र सरकार के प्रति आभार जताते हुए कहा कि “किसानों के हितों की सुरक्षा हमारी शीर्ष प्राथमिकता है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खरीदी केंद्रों पर पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए और किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। यह कदम छत्तीसगढ़ को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

Positive  सार

खरीफ 2025-26 के लिए लिया गया यह फैसला छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य को बदलने वाला साबित हो सकता है। यह न केवल छोटे और सीमांत किसानों को संबल प्रदान करेगा, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नई ऊर्जा देगा। अब जरूरत इस बात की है कि किसान भाई इस योजना का लाभ उठाने के लिए समय पर अपना पंजीकरण कराएं और उन्नत कृषि तकनीकों का प्रयोग कर उत्पादन बढ़ाएं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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