Farming without soil:  हाइड्रोपोनिक तकनीक है खेती का लाभकारी विकल्प

हाइड्रोपोनिक तकनीक एक अभिनव और प्रभावी तरीका है, जिसके माध्यम से बिना मिट्टी के, सिर्फ पानी और पोषक तत्वों की मदद से पौधों की खेती की जाती है। यह तकनीक विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों और ऐसे स्थानों पर उपयोगी है, जहाँ पर मिट्टी की कमी हो या खेती के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध न हो।

हालांकि, हाइड्रोपोनिक खेती के लिए शुरू में उच्च निवेश की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह एक लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है। किसानों के लिए यह तकनीक एक समृद्ध भविष्य की दिशा में एक कदम हो सकती है, क्योंकि यह उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली फसलें प्रदान करती है और मिट्टी की उर्वरता पर निर्भरता को कम करती है।

हाइड्रोपोनिक्स खेती क्या है ?

हाइड्रोपोनिक्स खेती में, पौधों को उनकी जड़ों सहित पोषक तत्वों से भरपूर पानी में डुबोकर उगाया जाता है। इसमें मिट्टी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि पोषक तत्वों को पानी में घोलकर पौधों तक पहुंचाया जाता है। यह तकनीक विभिन्न प्रकार की सब्जियों जैसे टमाटर, सलाद पत्तियां, ककड़ी, और हर्ब्स आदि उगाने में उपयोगी है। हाइड्रोपोनिक खेती के और भी कई महत्वपूर्ण लाभ हैं, जो इसे पारंपरिक कृषि प्रणालियों से कहीं अधिक प्रभावी और पर्यावरण के अनुकूल बनाते हैं

इस तकनीक के कई लाभ हैं:

  • जल की बचत: हाइड्रोपोनिक्स में पारंपरिक खेती की तुलना में कम पानी की आवश्यकता होती है।
  • कम जगह में ज्यादा उपज: यह तकनीक छोटे क्षेत्रों में भी अच्छी पैदावार देने में सक्षम है।
  • रासायनिक उर्वरकों की कम आवश्यकता: इसमें रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम होता है, जिससे पर्यावरण पर कम प्रभाव पड़ता है।
  • जलवायु नियंत्रण: इस तकनीक का उपयोग इनडोर स्थानों पर भी किया जा सकता है, जहां तापमान और आर्द्रता को नियंत्रित किया जा सकता है।

बेहतर क्वालिटी की सब्जियां

हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाई गई सब्जियाँ पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक गुणवत्ता वाली होती हैं। क्योंकि इसमें पौधों को पोषणयुक्त आहार (पोषक तत्वों से भरपूर जल) मिलता है, जिससे सब्जियों में किसी भी तरह की पोषण की कमी नहीं होती। इससे ना केवल सब्जियाँ ज्यादा स्वादिष्ट होती हैं, बल्कि उनके पोषक तत्वों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, जैसे कि विटामिन, खनिज और अन्य आवश्यक तत्व।

ज्यादा पैदावार

हाइड्रोपोनिक तकनीक से किसान एक साल में ज्यादा बार फसल ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, पारंपरिक तरीके से एक किसान साल में 6 बार धनिया उगाता है, जबकि हाइड्रोपोनिक खेती में किसान 15 से 16 बार धनिया की फसल ले सकते हैं। यह तकनीक फसल की पुनरावृत्ति को बढ़ाती है और पूरे साल में अधिक उत्पादन प्राप्त करने का अवसर देती है।

Positive सार

हाइड्रोपोनिक खेती न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी एक स्थायी और सुरक्षित विकल्प है।

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Sonal Gupta

Content Writer

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