CG Kisan Fayda: डबल फसल से कैसे फायदा ले रहे हैं किसान?

  • ग्रीष्मकालीन धान की जगह मक्के की खेती
  • जल संरक्षण और आय में बढ़ोतरी का सफल मॉडल
  • मक्के से किसानों को दोगुना लाभ

CG Kisan Fayda: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जल संरक्षण की नई ईबारत लिखी जा रही है। जिसके तहत जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘पानी बचाओ अभियान’ चलाया जा रहा है। इस पहल से अब किसानों की आय में भी सकारात्मक बदलाव आया है। डौंडी विकासखंड के ग्राम छिंदगांव के आदिवासी किसान श्रवण कुमार ने इस अभियान से प्रेरणा लेकर ग्रीष्मकालीन धान की जगह मक्का की खेती को अपनाया। इस बदलाव ने न केवल उनकी आय को दोगुना कर दिया, बल्कि भूजल संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाई।

मक्का की खेती अधिक फायदेमंद

पूर्व में ग्रीष्मकालीन धान की खेती करने वाले श्रवण कुमार ने इस बार अपनी 02 एकड़ भूमि में मक्का की खेती की,

  • मक्का उत्पादन पर 11,800 रुपये की कुल लागत आई, जिसमें खाद, बीज और अन्य व्यवस्थाएं शामिल थीं।
  • 1 लाख रुपये की कुल बिक्री हुई, जिससे उन्हें 88,200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।
  • धान की खेती में अधिक लागत, पानी की अधिक खपत और अपेक्षाकृत कम लाभ होता था, जबकि मक्के की खेती में इन सभी समस्याओं से बचाव हुआ।

जल संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान

  • मक्के की खेती से धान की तुलना में बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे भूजल स्तर बेहतर हुआ।
  • फसल अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की उर्वरता में सुधार हुआ, जिससे खरीफ सीजन में धान का उत्पादन प्रति एकड़ 3-4 क्विंटल बढ़ गया।

प्रशासन की भूमिका अहम

जिला प्रशासन और कृषि विभाग ने किसानों को जागरूक करने के लिए मार्गदर्शन अभियान चलाया, जिससे अधिक से अधिक किसान जल संरक्षण को अपनाने के लिए प्रेरित हुए।

श्रवण कुमार ने प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि वे अब धान के स्थान पर अन्य जल-संरक्षण वाली फसलों की खेती करने के लिए प्रेरित हुए हैं। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि पर्यावरण और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।

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भविष्य की संभावनाएं और विस्तार

बालोद जिले में जल संरक्षण आधारित कृषि मॉडल को अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। भविष्य में यह मॉडल अन्य जिलों के किसानों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकता है। मक्के की खेती का यह सफल उदाहरण बताता है कि पारंपरिक खेती में बदलाव लाकर किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और जल संकट से भी निपटा जा सकता है।

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Rishita Diwan

Content Writer

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