जीवन की लय: योग

सृष्टि के आरंभ से ही ईश्वर ने मानव को दिव्यता का उपहार दिया है। हालांकि समय के साथ-साथ भौतिकता और पशुता का मिश्रण होता गया। लेकिन भारतीय संस्कृति और वेदों में ऐसी कई पद्धितियां हैं, जिससे मानव ईश्वर द्वारा प्रदत्त दिव्यता को सहेज सकता है।
 
मानव तीन शरीरों से मिलकर बना है। स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। स्थूल शरीर- जो हमारा भौतिक स्वरूप है, जिसे हम रोज आईने में देखते हैं। शूक्ष्म शरीर- हमारा मन जो विचारों का शरीर है। उससे भी सूक्ष्म, कारण शरीर- यानी हमारी आत्मा जो भावनाओं का शरीर है। जब तन, मन और आत्मा का मिलन सही तरीके से होता है तो मानव दिव्यता के दर्शन करता है।
 
योग (Yoga) वह माध्यम है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को जोड़ता है। दिव्यता की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण पद्धति है “संगीत”, गुरू नानक जी ने ईश्वर की भक्ति और आत्म ज्ञान के लिए संगीत को ही माध्यम चुना था। संगीत (Music) और योग (Yoga) की इस जुगलबंदी से ईश्वर ने हमको नवाज़ा है। जब हम योग (Yoga) से अपने तन, मन और आत्मा को एकसार करते हैं तो साथ ही साथ हम ह्रदय के संगीत (Heartbeat), ध्यान की शांति का स्वर (मन) और अपने आप से मिलने की आनन्द की सुर लहरी का श्रवण करते हैं।
 
इसीलिए आज जब अंतरर्राष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) और विश्व संगीत दिवस (World Music Day) हम एक साथ मना रहे हैं। तो उम्मीद करते हैं, कि हम सभी में, पूरी मानवता में, समरसता आये।
 
योग (Yoga) औस संगीत (Music) खुद में बसे ईश्वर के दर्शन का एक रास्ता हो सकते हैं। ये दोनों विषय इतने बड़े हैं। बड़े-बड़े गुरूओं, शिक्षाविदों और वेदों में इनकी व्याख्या की गई है। लेकिन सच्ची साधना इसे जीवन में उतारने की है।
 
योग (Yoga) सिर्फ कसरत का रूप नहीं, संगीत (Music) सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं। यह तो पहली सीढ़ी से खुद से खुद के साक्षात्कार की, उस आनन्द की, शांति की जो समाज को एक सूत्र में जोड़ने और लयबद्ध रखने में मददगार साबित हो सकती है। 21 जून 2022 को हम ये प्रण लें कि अपने टूटे हिस्सों को जोड़कर उन्हें जीवन की लय में लयबद्ध कर एक खुशहाल समाज के निर्माण में अपना छोटा सा ही सही पर महत्वपूर्ण योदगान दें।
 
Happy International Yoga and World Music Day
 
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Dr. Kirti Sisodia

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