प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से बदली छत्तीसगढ़ के किसानों और मत्स्य पालकों की तकदीर

छत्तीसगढ़ में कृषि और उससे जुड़े सहायक क्षेत्रों में हो रहे आधुनिक बदलावों के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिल रही है। केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना‘ (PMMSY) ने राज्य के नीली क्रांति (Blue Revolution) के सपनों को धरातल पर उतारा है।

पारंपरिक खेती के साथ-साथ या उसके विकल्प के रूप में मछली पालन (Fishery) को अपनाने वाले प्रदेश के हजारों किसान और ग्रामीण युवा आज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहे हैं। योजना के तहत मिल रहे वित्तीय अनुदान, आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण से मत्स्य उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की जा रही है।

योजना के प्रमुख लाभ और आंकड़े

प्रमुख घटकविवरण एवं प्रावधान
वित्तीय सहायता (सब्सिडी)सामान्य वर्ग के लिए 40% तथा महिला, SC/ST आवेदकों के लिए 60% तक का अनुदान
नवीन तकनीकेंबायोफ्लॉक (Biofloc), आरएएस (RAS System), और केज कल्चर को बढ़ावा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर विकासनए तालाबों का निर्माण, हैचरी, बायो-फीड मिल और परिवहन हेतु वाहनों की उपलब्धता।
सामाजिक सुरक्षामत्स्य पालकों के लिए दुर्घटना बीमा और ‘मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड’ (MKCC) की सुविधा।

आधुनिक तकनीकों से बढ़ा उत्पादन और मुनाफा

राज्य में पारंपरिक तालाबों में मछली पालन के अलावा अब आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का व्यापक प्रसार हुआ है:

  1. कम भूमि और कम पानी में अधिक उत्पादन: बायोफ्लॉक तकनीक (Biofloc Culture) और री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) के माध्यम से छोटे किसान और भूमिहीन युवा भी कम लागत और कम स्थान में बेहतर मत्स्य उत्पादन कर रहे हैं।
  2. इनपुट कॉस्ट में कमी: सरकारी सब्सिडी के माध्यम से मत्स्य बीज (Fish Seed) और उन्नत दाने (Fish Feed) की उपलब्धता सुलभ हुई है, जिससे उत्पादन लागत घटी है और शुद्ध लाभ बढ़ा है।
  3. बाजार से सीधा जुड़ाव: मत्स्य पालकों को अपनी उपज बेचने के लिए कोल्ड चेन, इंसुलेटेड ऑटो और टू-व्हीलर विथ आइस बॉक्स के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।

स्वावलंबन और स्थानीय रोजगार की मिसाल

छत्तीसगढ़ के मैदानी और वनांचल दोनों क्षेत्रों के कृषक अब धान की पारंपरिक खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन को आजीविका का मुख्य जरिया बना चुके हैं।

  • युवाओं और महिलाओं की सहभागिता: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं और शिक्षित बेरोजगार युवा योजना का लाभ उठाकर मत्स्य व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। इससे गांवों से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लगी है।
  • समय पर ऋण और बीमा सुविधा: मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को कार्यशील पूंजी (Working Capital) के लिए कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उन्हें साहूकारों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिदृश्य को तेजी से बदल रही है। राज्य सरकार के प्रोत्साहन और विभागीय मार्गदर्शन के बल पर किसान न केवल अपनी आय को दोगुना कर रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने वाले ‘उद्यमी’ बन रहे हैं। यह योजना प्रदेश को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

Sonal Gupta

Content Writer

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