मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, आस्था, परंपराओं और प्रकृति से जुड़ी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में पिछले ढाई वर्षों में वन क्षेत्रों में 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार पूरा किया गया है। इन कार्यों पर कुल ₹19.05 करोड़ की राशि व्यय की गई है।
बस्तर की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ यहां की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, आस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से भी जुड़ी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इन पारंपरिक धरोहरों को संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में घोटुल (गोटुल) संरक्षण के लिए नारायणपुर के ग्राम गढ़बेंगाल में विशेष पहल शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 572 देवगुड़ियों का निर्माण और जीर्णोद्धार
बस्तर के जनजातीय समाज में देवगुड़ी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां आदिवासी समुदाय अपने कुल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। वन क्षेत्रों में स्थित इन पारंपरिक आस्था स्थलों का संरक्षण बस्तर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को सुरक्षित रखने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
राज्य सरकार के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में वन क्षेत्रों में 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराया गया है। इसके लिए ₹19.05 करोड़ की राशि खर्च की गई है।
इन कार्यों का उद्देश्य वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज की आस्था से जुड़े पारंपरिक स्थलों को सुरक्षित रखना तथा प्राचीन मातागुड़ी और देवगुड़ी परंपराओं को संरक्षित एवं संवर्धित करना है।
विष्णुदेव साय सरकार ने बस्तर की आस्था और परंपराओं को दिया संरक्षण
बस्तर की जनजातीय संस्कृति प्रकृति, जंगल, आस्था और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है। यहां के पारंपरिक आस्था स्थल केवल पूजा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में देवगुड़ियों के निर्माण और जीर्णोद्धार की पहल के जरिए इन पारंपरिक स्थलों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय समुदायों को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
गढ़बेंगाल में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की घोटुल संरक्षण की पहल
देवगुड़ियों के साथ बस्तर की पारंपरिक सामाजिक संस्था ‘घोटुल’ (गोटुल) के संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसके लिए नारायणपुर जिले के ग्राम गढ़बेंगाल में विशेष कार्ययोजना शुरू की गई है।
घोटुल जनजातीय समाज की एक महत्वपूर्ण पारंपरिक संस्था रही है। यह नई पीढ़ी को सामाजिक जीवन, संस्कृति, परंपराओं, कला, सामाजिक नियमों और जीवन मूल्यों से परिचित कराने वाली संस्था के रूप में जानी जाती है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने भी गढ़बेंगाल के घोटुल का अवलोकन किया है। इस दौरान उन्होंने इसकी स्थापत्य कला और बस्तर की लोक-सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखा।
घोटुल संरक्षण से नई पीढ़ी तक पहुंचेगी बस्तर की संस्कृति
घोटुल संरक्षण का उद्देश्य केवल पारंपरिक संरचना को बचाना नहीं, बल्कि उससे जुड़ी संस्कृति और परंपराओं को भी आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।
गढ़बेंगाल का घोटुल बस्तर की पारंपरिक जीवनशैली, कला और सांस्कृतिक विरासत को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पारंपरिक वेशभूषा, प्राचीन वाद्ययंत्र और विभिन्न सांस्कृतिक सामग्रियों को प्रदर्शित करने की व्यवस्था भी की गई है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में इस तरह की पहल से जनजातीय समाज की पारंपरिक विरासत को आधुनिक समय में भी संरक्षित रखने और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
गढ़बेंगाल घोटुल में दिखती है बस्तर की पारंपरिक स्थापत्य कला
गढ़बेंगाल घोटुल की स्थापत्य शैली भी बस्तर की पारंपरिक कला और स्थानीय संसाधनों को दर्शाती है। इसके निर्माण में लकड़ी, मिट्टी और बांस जैसी प्राकृतिक एवं स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
लकड़ी पर की गई पारंपरिक नक्काशी बस्तर की लोककला और शिल्प परंपरा की झलक प्रस्तुत करती है। घोटुल परिसर में जनजातीय संस्कृति से जुड़ी विभिन्न सामग्रियों को भी संरक्षित किया गया है।
विष्णुदेव साय सरकार का फोकस: संस्कृति, आस्था और विरासत का संरक्षण
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों में एक ओर 572 देवगुड़ियों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार शामिल है, वहीं दूसरी ओर गढ़बेंगाल में घोटुल संरक्षण जैसी पहल भी की जा रही है।
देवगुड़ी बस्तर के जनजातीय समाज की आस्था का प्रतीक हैं, जबकि घोटुल पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। दोनों के संरक्षण से बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बस्तर की पहचान को अक्षुण्ण रखने की दिशा में बड़ा कदम
बस्तर की सांस्कृतिक विरासत सदियों पुरानी जनजातीय परंपराओं, प्रकृति के साथ सामंजस्य और सामुदायिक जीवन से जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में देवगुड़ियों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार और घोटुल संरक्षण जैसी पहल इसी विरासत को सहेजने का प्रयास है।
572 देवगुड़ियों पर ₹19.05 करोड़ का व्यय और गढ़बेंगाल में घोटुल संरक्षण की पहल यह दर्शाती है कि बस्तर की पारंपरिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक संस्थाओं को संरक्षित कर उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

