देश ने 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तिरंगा फहराया और प्रदेशवासियों को संबोधित किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को नमन करने के साथ ही छत्तीसगढ़ की वर्तमान विकास यात्रा और आने वाले वर्षों के संकल्पों को सामने रखा।
मुख्यमंत्री के संबोधन की सबसे अहम बात यह रही कि उन्होंने नक्सलवाद से मुक्त छत्तीसगढ़ को अब शांति, विकास और समृद्धि की नई यात्रा पर आगे बढ़ता राज्य बताया। उनके अनुसार, लंबे समय तक हिंसा और नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर सहित प्रदेश के क्षेत्रों में अब परिस्थितियां बदल रही हैं और विकास के लिए नई संभावनाएं तैयार हो रही हैं।
नक्सलवाद के बाद विकास का नया अध्याय
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई के बाद अब छत्तीसगढ़ के सामने विकास की नई चुनौतियों और अवसरों का दौर है। खासकर बस्तर में शांति स्थापित होने को उन्होंने केवल सुरक्षा की उपलब्धि नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, बिजली और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की नई शुरुआत के रूप में प्रस्तुत किया।
इस बदलाव का असर बस्तर के उन इलाकों में भी दिखाई दे रहा है, जहां कभी विकास की गतिविधियां हिंसा के कारण बाधित रहती थीं। राज्य सरकार का जोर अब इन क्षेत्रों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ने पर है। इससे यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नक्सलवाद की समाप्ति का अंतिम लक्ष्य केवल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है।
विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत–विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प को भी प्रमुखता दी। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राज्य की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार का जोर अधोसंरचना, उद्योग, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों पर है। मुख्यमंत्री के संदेश में यह स्पष्ट दिखाई दिया कि अब राज्य सरकार की प्राथमिकता विकास को प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
बस्तर को विकास और पर्यटन का नया केंद्र बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री के संबोधन में बस्तर विशेष रूप से केंद्र में रहा। नक्सलवाद से प्रभावित रहे बस्तर को अब शांति, पर्यटन, संस्कृति और रोजगार के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
बस्तर की जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही बस्तर में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने पर भी सरकार का जोर है। पहले जिन इलाकों की पहचान हिंसा के कारण होती थी, वहां अब संस्कृति, खेल, पर्यटन और विकास की नई तस्वीर सामने लाने की कोशिश हो रही है।
युवाओं के लिए अवसर और रोजगार पर जोर
मुख्यमंत्री ने विकास के साथ युवाओं के भविष्य को भी महत्वपूर्ण बताया। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति लौटने के बाद युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत पर सरकार लगातार जोर दे रही है।
बस्तर के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना और उन्हें रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना सरकार की विकास रणनीति का अहम हिस्सा है। इससे युवाओं को हिंसा और पिछड़ेपन के बजाय शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों, ग्रामीणों और गरीबों तक विकास पहुंचाने की कोशिश
मुख्यमंत्री के संदेश में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों का विषय भी महत्वपूर्ण रहा। सरकार का जोर कृषि को आधुनिक तकनीक, सिंचाई, बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन से जोड़ने पर है।
इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन जैसी सुविधाओं के विस्तार को विकास की बुनियादी जरूरत माना गया है। मुख्यमंत्री का संदेश रहा कि विकास का वास्तविक अर्थ तभी है, जब इसका लाभ गांव और अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
स्वतंत्रता सेनानियों को नमन और नई पीढ़ी के लिए संदेश
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों और देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले जवानों को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेकर देश और प्रदेश के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम और जनजातीय नायकों के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी सरकार जोर दे रही है। इसी क्रम में प्रदेश के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए संग्रहालय और स्मारक जैसी पहल की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री के संदेश का सार
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का 80वें स्वतंत्रता दिवस का संबोधन तीन बड़े संदेशों के इर्द-गिर्द दिखाई देता है—
पहला, नक्सलवाद से प्रभावित छत्तीसगढ़ अब शांति और सुरक्षा के नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
दूसरा, अब सरकार की प्राथमिकता इस शांति को विकास, रोजगार, शिक्षा और बेहतर जीवन में बदलना है।
तीसरा, छत्तीसगढ़ को ‘विकसित भारत’ के साथ ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाना है।
इस लिहाज से 80वां स्वतंत्रता दिवस छत्तीसगढ़ के लिए केवल आजादी की वर्षगांठ नहीं, बल्कि नक्सलवाद के लंबे दौर से निकलकर शांति, विकास और समृद्धि की नई पहचान बनाने के संकल्प का अवसर भी रहा। मुख्यमंत्री का संदेश यही रहा कि अब बंदूक और हिंसा की जगह विकास, शिक्षा, रोजगार और अवसरों की तस्वीर छत्तीसगढ़ की नई पहचान बने।

