- भोरमदेव शक्कर कारखाना
- सहकारिता से समृद्धि का नया मॉडल
गन्ना किसानों के लिए सबसे बड़ी राहत और चिंता का विषय हमेशा उनकी फसल का समय पर भुगतान होता है। इस मामले में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में स्थित भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने पूरे देश के सामने एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। कारखाने ने लगातार दूसरे वर्ष जून महीने में ही गन्ना किसानों को उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) के साथ-साथ अतिरिक्त रिकवरी राशि का 100% भुगतान कर दिया है। देश के सहकारी शक्कर उद्योग में यह अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है, जिसने यह साबित कर दिया है कि यह कारखाना सिर्फ चीनी उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक है।
करोड़ों का डिजिटल ट्रांसफर
सत्र 2025-26 का हिसाब पूरा
हाल ही में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा की मौजूदगी में 29.83 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। इस भुगतान में ₹6.91 करोड़ एफआरपी की शेष राशि और ₹22.92 करोड़ अतिरिक्त रिकवरी के शामिल हैं। इसके साथ ही पेराई सत्र 2025-26 के लिए किसानों को कुल 107.10 करोड़ रुपये का शत-प्रतिशत भुगतान पूरा हो चुका है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि भोरमदेव शक्कर कारखाना किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि हजारों किसानों का अपना संस्थान है। उन्होंने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए आगामी सत्र में 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक गन्ना पेराई का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
नवाचार और आधुनिक सुविधाएं
भोरमदेव कारखाने की सफलता का राज केवल त्वरित भुगतान नहीं, बल्कि कड़े प्रबंधन और किसान-केंद्रित नीतियों में छुपा है। चेयरमैन एवं कलेक्टर गोपाल वर्मा के कुशल मार्गदर्शन में इस कारखाने ने लगातार तीसरे वर्ष 12 प्रतिशत से अधिक शुगर रिकवरी दर्ज की है। इसके अलावा, किसानों की लागत को कम करने और सहूलियत बढ़ाने के लिए कई बेहतरीन बदलाव किए गए हैं-
- कृषक कल्याण- किसानों के लिए ‘बलराम सदन‘ कृषक प्रतीक्षालय और रियायती दर पर शक्कर का वितरण।
- तकनीकी सहायता- उन्नत गन्ना बीज, सीडलिंग, मिट्टी परीक्षण सुविधा और प्रेसमड का वितरण।
- श्रमिक कल्याण- कारखाना परिसर में ‘शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के तहत श्रमिकों को मात्र ₹5 में भरपेट भोजन।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई ऊर्जा
पारदर्शिता, आधुनिक तकनीक और किसानों की सक्रिय भागीदारी के दम पर भोरमदेव मॉडल आज देश के अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन चुका है। जब सहकारिता की नींव मजबूत होती है, तो उसका सीधा सकारात्मक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दिखाई देता है। भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना ने यह साबित कर दिखाया है कि सही नेतृत्व और ईमानदार प्रयासों से किसानों के जीवन में असली मिठास घोली जा सकती है।

