Shah Bastar visit: बस्तर (छत्तीसगढ़), कभी सुदूर और चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले बस्तर के अंदरूनी इलाकों में अब विकास और तकनीक की नई बयार बह रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के हालिया बस्तर दौरे ने यह साबित कर दिया है कि ‘नेतानार’ जैसी जगहें अब नक्सल प्रभावित नहीं, बल्कि डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत का नया केंद्र बन रही हैं। सोमवार को बस्तर जिले के ग्राम नेतानार स्थित सीआरपीएफ (CRPF) कैंप पहुंचे गृहमंत्री ने यहाँ ‘शहीद वीर गुंडाधूर सेवा डेरा’ (जन सुविधा केंद्र) का उद्घाटन किया। यह केंद्र अब बस्तर के ग्रामीणों के लिए ‘सिंगल विंडो’ डिजिटल समाधान बन गया है, जहाँ जनता के दरवाजे तक सरकार की सुविधाएँ पहुँच चुकी हैं।
बस्तर की इमली में आत्मनिर्भरता का स्वाद
दौरे के दौरान एक बेहद आत्मीय पल तब आया जब केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह इमली प्रसंस्करण केंद्र (Tamarind Processing Center) पहुंचे। वहाँ उन्होंने प्रशिक्षण ले रही स्व सहायता समूह (SHG) की महिलाओं से बातचीत की और बस्तर की प्रसिद्ध इमली का स्वाद चखा। इमली चखने के बाद श्री शाह ने मुस्कुराते हुए कहा, “यहाँ की इमली का स्वाद खट्टा नहीं बल्कि मीठा है।” उनका यह बयान बस्तर की महिलाओं के जीवन में आ रही आर्थिक मिठास और उनके बढ़ते आत्मविश्वास को रेखांकित करता है।
गुंडाधूर महिला स्व सहायता समूह की सदस्य श्रीमती लंबी नाग ने गृहमंत्री को बताया कि इस समूह से जुड़कर महिलाएं अब उच्च गुणवत्ता युक्त इमली पल्प तैयार कर रही हैं, जिससे वे सालाना ₹1 लाख तक की आय आसानी से अर्जित कर सकेंगी। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि कैसे स्थानीय संसाधनों का सही प्रसंस्करण (Processing) बस्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल रहा है।
‘सेवा सेतु’ से आसान हुई ग्रामीणों की जिंदगी
नेतानार में स्थापित ‘सेवा सेतु केंद्र’ (Seva Setu Kendra) ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहा है। पहले जहाँ बस्तर के लोगों को छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए मीलों का सफर तय करना पड़ता था, वहीं अब एक ही छत के नीचे ऑनलाइन सुविधाएं मिल रही हैं।
- दूरी से मिली मुक्ति– केंद्र में गृहमंत्री से मुलाकात के दौरान नेतानार की निवासी श्रीमती सुखदेवी ने बताया कि उन्होंने अपनी पांच महीने की बेटी पद्मा का आधार कार्ड यहीं बनवाया है। पहले इसके लिए उन्हें 10 किलोमीटर पैदल चलकर नानगुर जाना पड़ता था। अब यहाँ नया आधार कार्ड, आधार अपडेट, बायोमेट्रिक KYC, मोबाइल नंबर अपडेट और ई-आधार जैसी सुविधाएं गांव में ही उपलब्ध हैं।
- महतारी वंदन योजना का लाभ– इसी तरह गाँव की श्रीमती सोनामनी ने बताया कि दूरी अधिक होने के कारण वे लंबे समय से ‘महतारी वंदन योजना’ का ई-केवाईसी (e-KYC) नहीं करा पा रही थीं, लेकिन गाँव में केंद्र खुलते ही उन्होंने यह काम चुटकियों में पूरा कर लिया।
इस डिजिटल केंद्र के माध्यम से ग्रामीण अब जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र और जाति प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज आसानी से एक ही जगह बनवा पा रहे हैं।
बैंक सखी, सिलाई और धान ढेंकी
महिला सशक्तिकरण के नए आयाम
नेतानार का यह जन सुविधा केंद्र केवल डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कौशल विकास (Skill Development) और वित्तीय समावेशन का भी एक बड़ा हब बन चुका है,
- बैंक सखी प्रशिक्षण- केंद्र में ग्रामीण महिलाओं को ‘बैंक सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके जरिए महिलाएं गाँव में ही पैसे जमा करने, निकालने, नए खाते खोलने, KYC करने और SHG क्रेडिट लिंकेज जैसी बैंकिंग सेवाएं दे सकेंगी।
- सिलाई प्रशिक्षण केंद्र- सुश्री विजय कुमारी जैसी स्थानीय युवतियां यहाँ बेसिक और एडवांस सिलाई का प्रशिक्षण ले रही हैं, जिससे वे भविष्य में स्वरोजगार अपनाकर अपने परिवार का बेहतर पालन-पोषण कर सकेंगी।
- धान ढेंकी प्रशिक्षण- गृहमंत्री ने पारंपरिक और पौष्टिक तरीकों को बढ़ावा देने वाले धान ढेंकी केंद्र का भी अवलोकन किया। इसके माध्यम से जैविक चावल की बिक्री से महिलाओं की आय तो बढ़ेगी ही, साथ ही सह-उत्पाद के रूप में निकलने वाली धान की भूसी से मवेशियों के लिए पौष्टिक आहार भी मिलेगा।
डिजिटल सरकार, सशक्त बस्तर
नेतानार का यह बदलाव इस बात का प्रतीक है कि सही नीति और सुरक्षा के समन्वय से विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाया जा सकता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री के साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मुख्य सचिव श्री विकासशील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। अब बस्तर की पहचान बंदूक से नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी, महिलाओं की आत्मनिर्भरता और विकास की मिठास से हो रही है।

