सूर्य नूतन सोलर चूल्हा, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन द्वारा विकसित एक क्रांतिकारी उत्पाद है, जो अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह सोलर स्टोव ऊर्जा संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है और घरों के लिए एक सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प पेश करता है। खास बात यह है कि इस सोलर चूल्हे का इस्तेमाल कर घर के तीन बार के भोजन को बिना किसी अतिरिक्त लागत के पकाया जा सकता है।
डिजाइन और कार्यप्रणाली
इंडियन ऑयल ने इस सोलर चूल्हे का डिजाइन अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, फरीदाबाद में किया है और हाल ही में इस तकनीक का पेटेंट भी करवाया गया है। सूर्य नूतन सोलर स्टोव सौर ऊर्जा से संचालित होता है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि इसमें सौर ऊर्जा के अलावा अन्य बिजली स्रोतों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस स्टोव में दो यूनिट्स होती हैं—एक यूनिट को धूप में रखा जाता है जबकि दूसरी यूनिट को रसोई में रखा जाता है। धूप में रखा यूनिट सौर ऊर्जा से रसोई तक ऊर्जा पहुंचाता है, जिससे खाना पकाने की प्रक्रिया पूरी होती है।
चार्ज करते समय भी उपयोग
सूर्य नूतन सोलर चूल्हे की एक और महत्वपूर्ण खासियत यह है कि इसे चार्ज करते समय भी खाना पकाया जा सकता है। इसका रिचार्जेबल और इंडोर कुकिंग सिस्टम सौर ऊर्जा की मदद से चलता है। सूरज की किरणों की कमी के बावजूद, सूर्या नूतन स्टोव का उपयोग किया जा सकता है, क्योंकि यह ऊर्जा को स्टोर करने की क्षमता रखता है और रात या बादल के दिनों में भी इसे काम में लिया जा सकता है।
मॉडल और कीमतें
इंडियन ऑयल ने सूर्य नूतन सोलर स्टोव को विभिन्न मॉडलों में पेश किया है। इसके प्रीमियम वर्जन में 4 लोगों के परिवार के लिए तीन बार का पूरा भोजन तैयार किया जा सकता है। सूर्य नूतन का बेस मॉडल ₹12,000 की कीमत में उपलब्ध है, जबकि इसका टॉप मॉडल ₹23,000 का हो सकता है। इंडियन ऑयल का कहना है कि आने वाले समय में इस स्टोव की कीमत को कम किया जाएगा ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। इसके अलावा, केंद्र सरकार सूर्य नूतन सोलर स्टोव खरीदने पर सब्सिडी देने पर विचार कर रही है।
Positive सार
सूर्य नूतन सोलर चूल्हा सिर्फ एक रसोई उपकरण नहीं, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और अक्षय ऊर्जा के इस्तेमाल में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह तकनीकी नवाचार भारत में सोलर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ रसोई गैस पर निर्भरता को भी कम करता है, जिससे लाखों परिवारों के लिए यह एक आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से लाभकारी विकल्प साबित हो सकता है।