Pulitzer Prize 2025: जाने इस साल किन्हें मिला पुलित्जर सम्मान?
Rishita Diwan
|May 7, 2026
, 1:00 pm
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Pulitzer Prize 2025
Pulitzer Prize 2025
पत्रकारिता का ‘ऑस्कर’
दो भारतीयों ने जीता पुलित्जर पुरस्कार
Pulitzer Prize 2025: भारत के लिए पत्रकारिता के क्षेत्र से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। दो भारतीय पत्रकारों, आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा ने अपनी उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के जरिए दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) जीत लिया है। इसे पत्रकारिता का ‘ऑस्कर’ भी कहा जाता है। यह सम्मान उन्हें भारत में बढ़ते साइबर अपराधों और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खतरों को उजागर करने वाले एक साहसिक ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग’ प्रोजेक्ट के लिए दिया गया है।
अपराध की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा को यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की नताली ओबिको पियर्सन के साथ संयुक्त रूप से मिला है। उनकी इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘ट्रैप्ड’ (Trapped) था। यह रिपोर्ट केवल शब्दों का जाल नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिस्ट की वास्तविक और भयानक कहानी बयां करती है, जो जालसाजों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ की शिकार हुई थीं।
पाठकों से जुड़ने वाली कहानी
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी प्रस्तुति थी। इसे ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री’ श्रेणी में रखा गया, जहाँ तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम के जरिए पाठकों को यह समझाया गया कि कैसे डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी आज एक वैश्विक खतरा बन चुकी है। यह रिपोर्ट न केवल अपराध को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी भी शिक्षित व्यक्ति के जीवन को तहस-नहस कर सकता है।
क्या है पुलित्जर पुरस्कार?
(इतिहास और महत्व)
पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दुनिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसकी शुरुआत 1917 में हंगेरियन-अमेरिकी प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के आधार पर की गई थी। वर्तमान में यह पुरस्कार कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा प्रशासित किया जाता है।
कितनी श्रेणियों में मिलता है पुलित्जर?
पुलित्जर पुरस्कार कुल 21 श्रेणियों में प्रदान किया जाता है, जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़, खोजी पत्रकारिता, फीचर लेखन, कविता, नाटक और संगीत रचना जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विजेता का चयन एक स्वतंत्र ‘पुलित्जर प्राइज बोर्ड’ द्वारा किया जाता है। विजेताओं को सम्मान के तौर पर एक प्रमाणपत्र और 15,000 डॉलर की नकद राशि प्रदान की जाती है।
पुलित्जर और भारत का पुराना रिश्ता
पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीयों की सूची काफी प्रेरणादायक रही है। आनंद और सुपर्णा से पहले भी कई दिग्गजों ने तिरंगा लहराया है,
गोविंद बिहारी लाल, 1937 में यह पुरस्कार जीतने वाले वे पहले भारतीय थे।
झुंपा लाहिड़ी, वर्ष 2000 में उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज’ के लिए उन्हें यह सम्मान मिला।
सिद्धार्थ मुखर्जी, 2011 में ‘द एम्परर ऑफ ऑल मैलडीज’ के लिए उन्हें सम्मानित किया गया।
दानिश सिद्दीकी, फोटोग्राफी के क्षेत्र में बेमिसाल काम के लिए उन्हें 2018 और 2022 (मरणोपरांत) में दो बार इस पुरस्कार से नवाजा गया।
डिजिटल युग में इस रिपोर्ट की प्रासंगिकता
आज के दौर में जब हर व्यक्ति इंटरनेट से जुड़ा है, साइबर ठगी के तरीके भी आधुनिक हो गए हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे शब्द अब आम हो रहे हैं, जहाँ अपराधी पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाकर लोगों को उनके ही घर में कैद (वर्चुअली) कर लेते हैं और उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। आनंद और सुपर्णा की रिपोर्ट ने न केवल इस अपराध के मनोविज्ञान को समझाया है, बल्कि प्रशासन को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।
यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि भारतीय पत्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल विषयों को सुलझाने और उन्हें रचनात्मक तरीके से पेश करने की क्षमता रखते हैं। ‘ट्रैप्ड’ जैसी रिपोर्ट्स समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।
Positive Takeaway
आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा की यह उपलब्धि भारतीय पत्रकारिता के लिए एक मील का पत्थर है। ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग’ जैसी कठिन श्रेणी में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाना यह दर्शाता है कि भविष्य की पत्रकारिता अब केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विजुअल स्टोरीटेलिंग के जरिए प्रभाव पैदा करने की ओर बढ़ रही है।
Pulitzer Prize 2025: जाने इस साल किन्हें मिला पुलित्जर सम्मान?
Pulitzer Prize 2025: भारत के लिए पत्रकारिता के क्षेत्र से एक गौरवशाली खबर सामने आई है। दो भारतीय पत्रकारों, आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा ने अपनी उत्कृष्ट रिपोर्टिंग के जरिए दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान, पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) जीत लिया है। इसे पत्रकारिता का ‘ऑस्कर’ भी कहा जाता है। यह सम्मान उन्हें भारत में बढ़ते साइबर अपराधों और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे खतरों को उजागर करने वाले एक साहसिक ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग’ प्रोजेक्ट के लिए दिया गया है।
अपराध की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी
आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा को यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग (Bloomberg) की नताली ओबिको पियर्सन के साथ संयुक्त रूप से मिला है। उनकी इस रिपोर्ट का शीर्षक ‘ट्रैप्ड’ (Trapped) था। यह रिपोर्ट केवल शब्दों का जाल नहीं है, बल्कि यह एक न्यूरोलॉजिस्ट की वास्तविक और भयानक कहानी बयां करती है, जो जालसाजों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ की शिकार हुई थीं।
पाठकों से जुड़ने वाली कहानी
इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी प्रस्तुति थी। इसे ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री’ श्रेणी में रखा गया, जहाँ तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम के जरिए पाठकों को यह समझाया गया कि कैसे डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी आज एक वैश्विक खतरा बन चुकी है। यह रिपोर्ट न केवल अपराध को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल किसी भी शिक्षित व्यक्ति के जीवन को तहस-नहस कर सकता है।
क्या है पुलित्जर पुरस्कार?
(इतिहास और महत्व)
पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दुनिया का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। इसकी शुरुआत 1917 में हंगेरियन-अमेरिकी प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के आधार पर की गई थी। वर्तमान में यह पुरस्कार कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा प्रशासित किया जाता है।
कितनी श्रेणियों में मिलता है पुलित्जर?
पुलित्जर पुरस्कार कुल 21 श्रेणियों में प्रदान किया जाता है, जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़, खोजी पत्रकारिता, फीचर लेखन, कविता, नाटक और संगीत रचना जैसे क्षेत्र शामिल हैं। विजेता का चयन एक स्वतंत्र ‘पुलित्जर प्राइज बोर्ड’ द्वारा किया जाता है। विजेताओं को सम्मान के तौर पर एक प्रमाणपत्र और 15,000 डॉलर की नकद राशि प्रदान की जाती है।
पुलित्जर और भारत का पुराना रिश्ता
पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीयों की सूची काफी प्रेरणादायक रही है। आनंद और सुपर्णा से पहले भी कई दिग्गजों ने तिरंगा लहराया है,
डिजिटल युग में इस रिपोर्ट की प्रासंगिकता
आज के दौर में जब हर व्यक्ति इंटरनेट से जुड़ा है, साइबर ठगी के तरीके भी आधुनिक हो गए हैं। ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे शब्द अब आम हो रहे हैं, जहाँ अपराधी पुलिस या जांच एजेंसी का डर दिखाकर लोगों को उनके ही घर में कैद (वर्चुअली) कर लेते हैं और उनसे मोटी रकम वसूलते हैं। आनंद और सुपर्णा की रिपोर्ट ने न केवल इस अपराध के मनोविज्ञान को समझाया है, बल्कि प्रशासन को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए प्रेरित किया है।
यह पुरस्कार इस बात का प्रमाण है कि भारतीय पत्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जटिल विषयों को सुलझाने और उन्हें रचनात्मक तरीके से पेश करने की क्षमता रखते हैं। ‘ट्रैप्ड’ जैसी रिपोर्ट्स समाज में जागरूकता फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम हैं।
Positive Takeaway
आनंद आर.के. और सुपर्णा शर्मा की यह उपलब्धि भारतीय पत्रकारिता के लिए एक मील का पत्थर है। ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग’ जैसी कठिन श्रेणी में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाना यह दर्शाता है कि भविष्य की पत्रकारिता अब केवल सूचना देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विजुअल स्टोरीटेलिंग के जरिए प्रभाव पैदा करने की ओर बढ़ रही है।
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Rishita Diwan
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