जल संरक्षण का ‘कोरिया मॉडल’
जनभागीदारी से रची सफलता की नई इबारत
PM Modi: छत्तीसगढ़ का कोरिया जिला आज देश के नक्शे पर जल संरक्षण की एक मिसाल बनकर उभरा है। जिस जिले में भारी वर्षा के बावजूद पानी का बहाव तेज़ होने के कारण भूजल का संचय नहीं हो पाता था, वहां आज ‘कोरिया मॉडल’ ने जल क्रांति ला दी है। इस मॉडल की सफलता की गूँज अब दिल्ली तक सुनाई दे रही है, जिसकी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में सराहना की है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का संकल्प
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरिया मॉडल को जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का एक प्रेरक उदाहरण बताया है। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राज्य शासन के ‘मोर गाँव मोर पानी’ और ‘आवा पानी झोंकी’ अभियान की एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जल संरक्षण को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर इसे एक जन आंदोलन बनाना ही सरकार का मुख्य संकल्प है।
भौगोलिक चुनौतियाँ और कोरिया की पहल
कोरिया जिले में औसतन 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, लेकिन इसकी भू-आकृतिक संरचना (Hilly terrain) ऐसी है कि बारिश का पानी ठहरने के बजाय बह जाता था। इस समस्या के समाधान के लिए “कैच द रेन” अभियान के तहत वैज्ञानिक और सामुदायिक समन्वय का रास्ता चुना गया।
क्या है 5% मॉडल और जन आंदोलन?
कोरिया मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘5% मॉडल’ है। इसके अंतर्गत,
- किसानों का योगदान- किसानों ने स्वेच्छा से अपनी कृषि भूमि का 5% हिस्सा छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं और डबरियों के लिए समर्पित किया।
- मनरेगा का समन्वय- मनरेगा के माध्यम से सोखता गड्ढे और अन्य जल संचय संरचनाओं का निर्माण किया गया।
- सामाजिक भागीदारी- महिलाओं ने ‘नीर नायिका’ और युवाओं ने ‘जल दूत’ बनकर घर-घर जाकर जल संरक्षण का संदेश पहुँचाया। ग्राम सभाओं के माध्यम से योजना का विकेंद्रीकरण किया गया, जिससे समुदाय खुद इसका मालिक और संरक्षक बना।
चौंकाने वाले आंकड़े
2025-2026 की उपलब्धियाँ
आंकड़ों की दृष्टि से देखा जाए तो कोरिया मॉडल के परिणाम किसी चमत्कार से कम नहीं हैं,
- भूजल पुनर्भरण- वर्ष 2025 में जिले में लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह मात्रा लगभग 235 बड़े तालाबों के बराबर है।
- वाटर लेवल में सुधार- CGWB (Central Ground Water Board) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कोरिया के भूजल स्तर में 5.41 मीटर की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।
- निरंतर प्रगति- वर्ष 2026 में अब तक 20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण या प्रगति पर हैं, जिनमें 17,229 सामुदायिक कार्य शामिल हैं।
प्रशासनिक नेतृत्व का विजन
जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के अनुसार, इस मॉडल की सफलता का मूल मंत्र ‘विश्वास और भागीदारी’ है। जब समाज स्वयं जल सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तो परिणाम स्थायी होते हैं। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल ने भी इस मॉडल को अन्य राज्यों में लागू करने योग्य बताया है।
Positive सार
कोरिया मॉडल प्रमाणित करता है कि यदि वैज्ञानिक योजना और प्रशासनिक इच्छाशक्ति को जनभागीदारी का साथ मिले, तो प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सहज संभव है। यह मॉडल अब केवल छत्तीसगढ़ का नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए जल प्रबंधन का एक ‘ब्लूप्रिंट’ बन गया है।
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