- Asia’s Largest Tamarind Market
- छत्तीसगढ़ में है एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी
- इमली के प्रोडक्शन के लिए दुनियाभर में है मांग
Asia’s Largest Tamarind Market: छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध आदिवासी संस्कृति के लिए तो जाना ही जाता है, लेकिन यहाँ की एक और चीज़ है जिसने पूरी दुनिया के जायके को अपनी गिरफ्त में ले रखा है, बस्तर की इमली। खटास और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए मशहूर बस्तर की इमली आज न केवल भारत के विभिन्न राज्यों में अपनी धाक जमाए हुए है, बल्कि विदेशों में भी इसकी भारी मांग है।
जगदलपुर स्थित एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी इस व्यापार का मुख्य केंद्र है, जहाँ इस वित्तीय वर्ष में अब तक 45 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो चुका है।
एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी
व्यापार का पावरहाउस
बस्तर के मुख्यालय जगदलपुर में स्थित इमली मंडी को एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी होने का गौरव प्राप्त है। यहाँ का व्यापारिक माहौल इस समय काफी उत्साहजनक है। मंडी से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, साल 2017-18 के वित्तीय वर्ष में फरवरी माह तक ही लगभग 44.50 करोड़ रुपये की इमली खरीदी जा चुकी है। व्यापारियों का मानना है कि इस बार इमली की बंपर आवक को देखते हुए यह आंकड़ा पिछले साल के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ देगा।
बाज़ार भाव और मांग
वर्तमान में मंडी में इमली की कीमतें इसकी गुणवत्ता के आधार पर तय हो रही हैं,
- थोक दाम (न्यूनतम)– ₹2800 प्रति क्विंटल
- अधिकतम दाम– ₹4300 प्रति क्विंटल तक
Asia’s Largest Tamarind Market
मंडी सचिव और स्थानीय व्यवसायी इस बात से उत्साहित हैं कि बस्तर की इमली को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रीमियम मिलता है।
बस्तर की इमली का वैश्विक सफर
बस्तर की इमली का सफर जगदलपुर की तंग गलियों से शुरू होकर अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों तक पहुँचता है। यहाँ की इमली सीधे विदेशों में नहीं भेजी जाती, बल्कि एक सुनियोजित चैन के माध्यम से पहुँचती है,
- स्थानीय संग्रहण- बस्तर के जंगलों और ग्रामीण इलाकों से ग्रामीण इमली इकट्ठा कर मंडी लाते हैं।
- राज्यों के बीच व्यापार- जगदलपुर मंडी से यह इमली महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भेजी जाती है।
- अंतरराष्ट्रीय निर्यात- इन्हीं राज्यों के रास्ते बस्तर की इमली खाड़ी देशों, यूरोप और अन्य मुल्कों में निर्यात की जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ समय पहले तक बस्तर की इमली की मांग पाकिस्तान में भी काफी अधिक थी, जहाँ यह दक्षिण भारतीय राज्यों के माध्यम से पहुँचती थी।
क्यों खास है बस्तर की इमली?
बस्तर की इमली के विश्व प्रसिद्ध होने के पीछे कई भौगोलिक और प्राकृतिक कारण हैं,
- अनुकूल आबोहवा- बस्तर की जलवायु और मिट्टी इमली के पेड़ों के लिए वरदान के समान हैं। यहाँ की नमी और तापमान इमली के गूदे को अधिक रसीला और खट्टा बनाता है।
- प्राकृतिक पैदावार- यहाँ इमली की खेती के बजाय यह प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगती है, जिससे इसमें कीटनाशकों का प्रयोग नहीं होता।
- बड़े पैमाने पर उत्पादन- बस्तर में इमली की थोक पैदावार होती है, जिससे यह बड़े व्यापारियों के लिए एक आकर्षक केंद्र बन जाता है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार
इमली का यह व्यापार बस्तर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। हजारों आदिवासी परिवार इमली संग्रहण के काम से जुड़े हुए हैं। फरवरी से जून के महीनों में जब इमली का सीजन चरम पर होता है, तब पूरे संभाग में आर्थिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं। मंडी में होने वाला करोड़ों का टर्नओवर न केवल सरकार को राजस्व देता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर पल्लेदारों, ट्रांसपोर्टरों और छोटे व्यापारियों को भी रोजगार प्रदान करता है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बस्तर में ही इमली की प्रोसेसिंग यूनिट और वैल्यू एडिशन (जैसे इमली का पल्प, सॉस या पाउडर बनाना) पर ध्यान दिया जाए, तो यह 45 करोड़ का कारोबार आने वाले समय में कई गुना बढ़ सकता है। इससे स्थानीय लोगों को और बेहतर दाम मिल सकेंगे।
Positive सार
बस्तर की इमली आज अपनी खटास से वैश्विक स्वाद को संतुलित कर रही है। जगदलपुर मंडी से निकलने वाला हर ट्रक बस्तर की मेहनत और यहाँ की प्राकृतिक संपदा की कहानी कहता है। अगर आप भी चटपटे स्वाद के शौकीन हैं, तो यकीन मानिए आपके किचन में रखी इमली का ताल्लुक बस्तर के उन्हीं घने जंगलों से हो सकता है।
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