RESEARCH से साबित हुआ इंटरनेट का इस्तेमाल कम करता है डिमेंशिया का खतरा, जानें क्या कहती है रिपोर्ट?



बिजी लाइफस्टाइल के चलते इंटरनेट हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। ऑफिस के ईमेल से लेकर सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़े रहने तक में इंटरनेट हमारे लिए काफी आवश्यक हो गया है। इंटरनेट सिर्फ आपको मौजूदा दुनिया से ही नहीं जोड़ता है बल्कि यह डिमेंशिया के जोखिम को भी कम करता है। ये जानकर भले ही हैरानी होगी कि इंटरनेटस कैसे भूलने की बीमारी को कम करता है लेकिन हाल ही में हुए एक शोध से यह बात सामने आई है…..

जर्नल ऑफ अमेरिकन गेरिएट्रिक्स सोसाइटी में प्रकाशित एक रिसर्च में यह दावा किया गया है कि जो वृद्ध लोग, नियमित इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, उनमें समय के साथ विकसित होने वाले डिमेंशिया रोग का खतरा कम होता है। रिसर्चर ने अमेरिकी वृद्ध लोगों में नियमित इंटरनेट के उपयोग को वरदान के रूप में प्रस्तुत किया है।

क्या है डिमेंशिया?

डिमेंशिया का जोखिम 60 साल की उम्र के बाद काफी बढ़ जाता है। इसकी वजह से लोगों को चीजें याद नहीं रहती हैं। साथ ही निर्णय लेना और समस्याओं का हल निकाल पाना भी काफी कठिन हो जाता है।

इंटरनेट और मानसिक स्वास्थ्य का डर

युवा पीढ़ी अपना हर पल इंटरनेट पर बिताती है। ज्यादातर यूथ हर दिन ऑनलाइन कार्यों में लंबा समय बिताते हैं। लेकिन बुजुर्गों पर किया गया यह शोध अलग ही रिजल्ट सामने रख रहा है। जिसके मुताबिक नियमित इंटरनेट का उपयोग वास्तव में ऐसे लोगों के लिए वरदान हो सकता है, जो डिमेंशिया के दीर्घकालिक जोखिम को कम कर सकता है।

न्यूयॉर्क शहर के न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ विभाग ने इस शोध को किया है। इस अध्ययन में पाया गया कि इंटरनेट के नियमित उपयोगकर्ताओं ने गैर-नियमित उपयोगकर्ताओं की तुलना में डिमेंशिया के जोखिमों को कम करने का अनुभव किया है।

इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं पर शोध

इस बात का पता लगाने के लिए कि इंटरनेट का उपयोग डिमेंशिया के जोखिम को कैसे कम करता है, अध्ययन की टीम ने 18,000 से अधिक अमेरिकी लोगों को शोध में शामिल किया। 2002 में जब अध्ययन की शुरूआत की गई तब सभी की उम्र लगभग 50-65 के बीच में थी। शोध से यह देखा गया कि इनमें डिमेंशिया का खतरा नहीं था। हर दो साल में सभी प्रतिभागियों का टेस्ट हुआ।

अध्ययनकर्ता कहते हैं कि शोध की शुरुआत में लगभग दो-तिहाई प्रतिभागी नियमित इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जबकि एक तिहाई इससे बिल्कुल दूर थे।

क्या कहते हैं शोध के रिजल्ट?

जब शोध के रिजल्ट सामने आये तब यह पता लगा कि करीब 5% प्रतिभागियों में डिमेंशिया डेवलप हुआ पाया गया, 87% से अधिक लोगों को मानसिक रूप से बिल्कुल हेल्दी पाया गया। अधिकांश प्रतिभागियों ने समय के साथ अपनी इंटरनेट आदतों में बदलाव किया। टीम इस बात पर पहुंचा कि जो लोग इंटरनेट से अब भी दूर थे उनमें से 10% से अधिक लोगों में इस रोग का जोखिम ज्यादा था।

शोध करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि इंटरनेट हमें एक आभासी दुनिया से जोड़कर रखता है। इसके माध्यम से हम नए लोगों से मिलते हैं, नई-नई जानकारियां हासिल करते हैं। इससे अल्जाइमर रोग का खतरा कम हो जाता है। इंटरनेट का इस्तेमाल डिमेंशिया से भी बचाता है। इसके अलावा लोग नियमित शारीरिक गतिविधि, हृदय स्वास्थ्य की देखभाल और पर्याप्त नींद लेने जैसी आदतों को अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाकर भी एक बेहतर जीवन की तरफ बढ़ सकते हैं।

नोट- लेख मीडिया रिपोर्ट्स और जर्नल ऑफ अमेरिकन गेरिएट्रिक्स सोसाइटी में प्रकाशित एक रिसर्च पर आधारित है।


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Dr. Kirti Sisodia

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