Padma Shri 2026: डॉ. रामचंद्र और सुनीता को क्यों मिला पद्मश्री?

पद्मश्री 2026

कौन हैं डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले?

आदिवासियों के लिए समर्पित किया जीवन

Padma Shri 2026: गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर जब देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों की घोषणा हुई, तो छत्तीसगढ़ के दो नामों ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक ऐसे दंपति की है जिन्होंने सुख-सुविधाओं को त्यागकर घने जंगलों और नक्सल प्रभावित इलाकों को अपनी कर्मभूमि बनाया। डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी सुनीता गोडबोले को संयुक्त रूप से पद्यश्री से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।

बस्तर और अबूझमाड़ के दुर्गम अंचलों में स्वास्थ्य की अलख जगाने वाले इस दंपति की कहानी त्याग, साहस और निस्वार्थ सेवा की एक अद्भुत मिसाल है।

‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’

कुपोषण और मृत्यु दर के खिलाफ जंग

रामचंद्र और सुनीता गोडबोले ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों के स्वास्थ्य स्तर को सुधारने में लगा दिया। उन्होंने ‘ट्रस्ट फॉर हेल्थ’ नामक संस्था के माध्यम से जमीनी स्तर पर काम शुरू किया। उनका मुख्य उद्देश्य जनजातीय क्षेत्रों में बाल मृत्यु दर को कम करना और कुपोषण को जड़ से मिटाना था।

जहाँ बड़े-बड़े अस्पताल और डॉक्टर पहुँचने से कतराते थे, वहाँ इस दंपति ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने न केवल बीमारों का इलाज किया, बल्कि आदिवासी परिवारों को स्वच्छता और पोषण के प्रति जागरूक भी किया। आज उनकी मेहनत का परिणाम है कि हजारों आदिवासी बच्चों को कुपोषण के चंगुल से बचाया जा सका है।

सड़क विहीन इलाकों में ‘पैदल’ सफर

डॉ. रामचंद्र और सुनीता गोडबोले आयुर्वेद चिकित्सक हैं। उनकी सेवा की सबसे खास बात यह है कि वे उन इलाकों में काम करते हैं जहाँ आज भी बिजली, पक्की सड़कें और मोबाइल नेटवर्क एक सपना हैं।

  • स्वास्थ्य शिविर

यह दंपति खुद पैदल चलकर मीलों का सफर तय करता है और दुर्गम गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाता है।

  • निःशुल्क इलाज

बिना किसी सरकारी फंड या आर्थिक लालच के, उन्होंने लाखों आदिवासियों को मुफ्त चिकित्सा परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई हैं।

  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र

अबूझमाड़ जैसे संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में, जहाँ जाना जान जोखिम में डालने जैसा है, वहां गोडबोले दंपति ने भरोसे का पुल बनाया और लोगों का जीवन बचाया।

आदिवासियों का सहारा

आंकड़े बताते हैं कि गोडबोले दंपति अब तक एक लाख से अधिक आदिवासियों को सीधे तौर पर स्वास्थ्य लाभ और सपोर्ट दे चुके हैं। उनके इसी समर्पण के कारण उन्हें पहले भी स्वामी विवेकानंद अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। अब पद्मश्री का सम्मान उनके दशकों पुराने संघर्ष पर देश की मुहर है।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए गोडबोले दंपति को “निःस्वार्थ सेवा का जीवंत प्रतीक” बताया है। उनके साथ ही दंतेवाड़ा की बुधरी ताती को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है, जो बस्तर के बदलते परिदृश्य को दर्शाता है।

Positive सार

रामचंद्र और सुनीता गोडबोले की जोड़ी यह संदेश देती है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो बिना किसी शोर-शराबे के भी समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाया जा सकता है। जहाँ आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की पहुँच सीमित हो जाती है, वहाँ इस दंपति के सेवा भाव और आयुर्वेद के ज्ञान ने हजारों जिंदगियां बचाई हैं। उनका पद्मश्री सम्मान उन तमाम ‘गुमनाम नायकों’ का सम्मान है जो देश के आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति की सेवा में जुटे हैं।

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Rishita Diwan

Content Writer

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