Sihawa Mountain Chhattisgarh – A Hidden Natural & Spiritual Destination
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जाना जाता है। इन्हीं में से एक प्रमुख और ऐतिहासिक स्थान है सिहावा पहाड़ (Sihawa Hill), जो धमतरी (Dhamtari) जिले में स्थित है। यह स्थान न केवल प्राकृतिक सौंदर्य (Natural Beauty) के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
प्राचीन नाम “देवह्रद” और महानदी का उद्गम स्थल
Sihawa Mountain Chhattisgarh – A Hidden Natural & Spiritual Destination
प्राचीन काल में सिहावा पहाड़ को “देवह्रद” के नाम से जाना जाता था। सिहावा पहाड़ की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यहीं से महानदी (Mahanadi River Origin) का उद्गम होता है। महानदी को छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा कहा जाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ दर्शन और भ्रमण के लिए आते हैं। महानदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि Chhattisgarh Culture और Spiritual Identity की प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि आज भी यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं।
सप्तऋषियों की तपोभूमि: रहस्यमयी गुफाएँ
Sihawa Mountain Chhattisgarh – A Hidden Natural & Spiritual Destination
सिहावा पर्वत श्रेणी में सात से अधिक प्राचीन गुफाएँ (Ancient Caves) स्थित हैं। लोककथाओं और किंवदंतियों के अनुसार यह क्षेत्र सप्तऋषियों की तपोभूमि रहा है। मान्यता है कि इन गुफाओं में श्रृंगी ऋषि, महर्षि अंगिरा सहित अनेक महान तपस्वियों ने कठोर तपस्या की थी। यही कारण है कि यह क्षेत्र आज भी गहरे आध्यात्मिक प्रभाव से ओत-प्रोत माना जाता है।
महेंद्रगिरि और श्रृंगी ऋषि का रामायण संबंध
Sihawa Mountain Chhattisgarh – A Hidden Natural & Spiritual Destination
सिहावा क्षेत्र में स्थित महेंद्रगिरि (Mahendragiri Hill) का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि यहीं त्रेतायुग के महान तपस्वी श्रृंगी ऋषि का आश्रम था।
रामायण और पुराणों के अनुसार, अयोध्या के राजा दशरथ ने संतान प्राप्ति के लिए श्रृंगी ऋषि द्वारा पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया था। उसी यज्ञ के फलस्वरूप भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ।
इस घटना के कारण Sihawa Hill Ramayana Connection और भी अधिक पवित्र माना जाता है।
महर्षि अंगिरा और श्रीखंड पर्वत की कथा
प्राचीन ग्रंथों के अनुसार सिहावा पर्वत महर्षि अंगिरा, जो सप्तऋषियों में सबसे वरिष्ठ माने जाते हैं, की प्रमुख तपोभूमि रहा है। उस समय इसे श्रीखंड पर्वत के नाम से भी जाना जाता था।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम वनवास काल के दौरान यहाँ महर्षि अंगिरा से भेंट करने आए थे। पर्वत शिखर पर आज भी एक विशाल शिला में बने पदचिन्ह दिखाई देते हैं, जिन्हें श्रद्धालु भगवान राम के चरणचिह्न मानते हैं।
सिहावा पहाड़ केवल एक पहाड़ी या धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह रामायण काल, ऋषि परंपरा और छत्तीसगढ़ की आत्मा का जीवंत प्रतीक है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ को केवल वनभूमि ही नहीं, बल्कि राम की तपोभूमि भी कहा जाता है।

