

जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस के भारत दौरे का सकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ मुलाकात कर बातचीत की। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो छह पनडुब्बियां बनाने के करार पर दोनों देशों के बीच करीबी बढ़ रही है।
द्विपक्षीय रक्षा व सामरिक संबंध मजबूत बनाने की दिशा में बातचीत
राजनाथ सिंह ने जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस से विस्तार से चर्चा की और द्विपक्षीय रक्षा व सामरिक संबंध मजबूत करने के तरीकों पर केंद्रित रहे। इस मुलाकात के बाद ये कही जा रही है कि भारत और जर्मनी, भारत में पनडुब्बी बनाने पर समझौते के करीब आ गए हैं। ये पनडुब्बियां भारतीय नौसेना के लिए लिए बनाई जाएगी।
राजनाथ सिंह ने ट्वीट से दी जानकारी
राजनाथ सिंह ने एक ट्वीट के जरिए ये जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि जर्मनी के रक्षा मंत्री के साथ सार्थक बातचीत हुई है। उन्होंने अपने बयान में कहा, “भारत के कुशल कार्यबल और प्रतिस्पर्धी लागत के साथ-साथ जर्मनी की उच्च तकनीक और निवेश संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है।“ हालांकि, दोनों देशों की ओर अब तक इस बारे में कोई ऑफिशियल बयान जारी नहीं किया गया है।
ऐसी जानकारी सामने आ रही है कि भारत जर्मनी से जो छह पारंपरिक पनडुब्बियां खरीदने की डील करने वाला है, वो करीब 5.2 अरब डॉलर का सौदा हो सकता है। इससे पहले फ्रांस की एक कंपनी इस प्रोजेक्ट से पीछे हटी थी। अब जर्मन कंपनी थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम (टीकेएमएस) ने भारतीय पनडुब्बी प्रोजेक्ट के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है।
फिलहाल सुरक्षा हथियारों के लिए भारत रूस पर बहुत ज्यादा निर्भर है। पश्चिमी देशों को भारत की इस निर्भरता को कम करने के साथ-साथ अरबों डॉलर का कारोबार मिल सकता है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती ताकत को संतुलित करने के लिए भारतीय नौसेना लंबे समय से नई और आधुनिक पनडुब्बियां हासिल कर रही है। फिलहाल भारतीय नौसेना की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारतीय नौसेने के पास 16 कंवेंशनल सबमरीन हैं।
भारत में ही बनेंगी पनडुब्बियां
साल 2023 के शुरूआत में जर्मन सरकार ने भारत के लिए आर्म्स एक्सपोर्ट पॉलिसी को आसान किया था। इस बदलाव के तहत भारत को जर्मन हथियारों की आपूर्ति आसानी से हो सकती है। अगर पनडुब्बी पर समझौता हो जाता है, तो उसके तहत विदेशी पनडुब्बी निर्माता कंपनी को एक भारतीय कंपनी के साथ पार्टनरशिप कर भारत में ही ये पनडुब्बियां तैयार करनी होगी।

