- Didi E-Rickshaw Sahayata Yojana
- दीदी ई-रिक्शा योजना
- छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के स्वावलंबन की नई उड़ान
Didi E-Rickshaw Sahayata Yojana: छत्तीसगढ़ में विकास की बयार अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों की उन महिलाओं तक पहुँच रही है जो कल तक केवल दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। ‘श्रम से स्वरोजगार’ के इस सफर की एक जीती-जागती मिसाल बनी हैं धमतरी जिले की श्रीमती सुषमा सतनामी। छत्तीसगढ़ सरकार की “दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना” ने न केवल उनके हाथों को हुनर दिया, बल्कि उनके परिवार के भविष्य को भी नई दिशा प्रदान की है।
मजदूरी से मालकिन बनने का सफर
ग्राम तेन्दूकोन्हा की रहने वाली सुषमा सतनामी पहले एक निर्माणी श्रमिक (रेजा) के रूप में कार्य करती थीं। उनके पति राजमिस्त्री हैं। दो छोटे बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों का बोझ दैनिक मजदूरी की अनिश्चित आय पर टिका था। एक श्रमिक परिवार के लिए बच्चों को अच्छी शिक्षा देना और सम्मानजनक जीवन जीना हमेशा से एक संघर्ष भरा सपना रहा है।
इस संघर्ष के बीच, सुषमा को छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित “दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना” के बारे में जानकारी मिली। यह योजना विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए है जो निर्माण कार्यों में मेहनत करती हैं और अब खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं।
कैसे मिली ₹1,00,000 की सौगात?
सुषमा ने श्रम विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया। चूँकि वे पिछले 3 वर्षों से मंडल में पंजीकृत थीं और योजना की सभी पात्रताओं (18 से 50 वर्ष की आयु वर्ग) को पूरा करती थीं, इसलिए उनका आवेदन जल्द ही स्वीकृत हो गया। सरकार की ओर से सीधे उनके बैंक खाते में 1 लाख रुपये की सहायता राशि भेजी गई।
इस राशि से सुषमा ने अपना ई-रिक्शा खरीदा और धमतरी शहर की सड़कों पर उसे चलाना शुरू किया। जो हाथ कल तक ईंट-पत्थर उठाते थे, आज वे आत्मनिर्भरता के साथ ई-रिक्शा का हैंडल संभाल रहे हैं।
आर्थिक स्थिति में क्रांतिकारी बदलाव
ई-रिक्शा चलाने से सुषमा की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आज वे प्रतिदिन ₹500 से ₹700 तक कमा लेती हैं। यह आय न केवल उनकी पुरानी मजदूरी से कहीं अधिक है, बल्कि इसमें काम के घंटे भी तय हैं और शारीरिक मेहनत का बोझ भी कम है।
- बच्चों की शिक्षा
अब वे अपने 5वीं और 7वीं कक्षा में पढ़ रहे बच्चों की पढ़ाई का खर्च आसानी से उठा पा रही हैं।
- आत्मनिर्भरता
सुषमा अब किसी ठेकेदार या दिहाड़ी पर निर्भर नहीं हैं; वे स्वयं अपनी मालकिन हैं।
सम्मानजनक जीवन
समाज में उनकी पहचान एक उद्यमी महिला के रूप में बनी है।
दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना
छत्तीसगढ़ शासन, श्रम विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिला निर्माणी श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ना है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं,
- पात्रता- महिला श्रमिक का कर्मकार कल्याण मंडल में कम से कम 3 वर्ष से पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- आयु सीमा- 18 वर्ष से 50 वर्ष के बीच।
- सहायता राशि- ई-रिक्शा क्रय करने हेतु ₹1,00,000 की एकमुश्त अनुदान सहायता।
- उद्देश्य- महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण अनुकूल परिवहन (Green Mobility) को बढ़ावा देना और स्वरोजगार के अवसर पैदा करना।
मुख्यमंत्री और प्रशासन का आभार
अपनी सफलता से उत्साहित सुषमा सतनामी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, श्रम मंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह योजना उनके जैसे लाखों श्रमिक परिवारों के लिए आशा की एक नई किरण है। धमतरी कलेक्टर और श्रम विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन ने उनकी इस राह को और भी आसान बना दिया।
Positive सार
Didi E-Rickshaw Sahayata Yojana
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल दर्शाती है कि जब तकनीक और सरकारी सहायता सही हाथों में पहुँचती है, तो सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की शुरुआत होती है। ‘दीदी ई-रिक्शा योजना’ केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि महिलाओं को सशक्त, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने का एक महा-अभियान है। सुषमा जैसी हजारों ‘दीदियाँ’ आज की प्रगति के पहिए को गति दे रही हैं।
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