- Tele-Law Bastar
- बस्तर के गाँवों में वीडियो कॉल पर न्याय
- अब घर बैठे मिलेगी कानूनी सलाह
Tele-Law Bastar: बस्तर, जिसे कभी अपनी भौगोलिक दुर्गमता और कठिन रास्तों के लिए जाना जाता था, आज डिजिटल क्रांति का नया अध्याय लिख रहा है। भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय की ‘टेली-लॉ’ (Tele-Law) योजना ने बस्तर संभाग के दूरस्थ और संवेदनशील अंचलों में न्याय की परिभाषा बदल दी है। अब आदिवासियों और ग्रामीणों को एक छोटी सी कानूनी सलाह के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने या वकीलों की भारी-भरकम फीस चुकाने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपने ही गाँव में वीडियो कॉल के माध्यम से देश के चोटी के वकीलों से सीधे संवाद करने का अवसर मिल रहा है।
डिजिटल इंडिया की क्रांतिकारी पहल
डिजिटल इंडिया के तहत शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी योजना बस्तर जैसे क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सीएससी (Common Service Center) के माध्यम से संचालित इस सेवा का मुख्य उद्देश्य न्याय को समावेशी बनाना है। अक्सर देखा गया है कि कानूनी जानकारी के अभाव और आर्थिक तंगी के कारण ग्रामीण न्याय की प्रक्रिया से दूर रह जाते हैं। ‘टेली-लॉ’ इस खाई को पाट रहा है, जहाँ तकनीक और कानून का संगम समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है।
कैसे काम करती है यह सुविधा?
गाँव का कोई भी नागरिक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकता है। वहां मौजूद ग्राम स्तरीय उद्यमी (VLE) पोर्टल पर नागरिक की समस्या दर्ज करते हैं और वकीलों के साथ ऑनलाइन परामर्श की समय-सारणी (Appointment) तय करते हैं। तय समय पर ग्रामीण सीधे वीडियो कॉल या फोन के जरिए अनुभवी वकीलों से बात कर अपनी शंकाओं का समाधान पाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और बेहद सुरक्षित है।
समस्याओं का मिल रहा है समाधान
टेली-लॉ योजना का दायरा बहुत व्यापक है। इसके तहत निम्नलिखित श्रेणियों में कानूनी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है,
- पारिवारिक मामले, विवाह, तलाक, आपसी विवाद और बच्चों के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर सटीक सलाह।
- भूमि एवं संपत्ति विवाद, बस्तर में जमीन से जुड़े मामले, जैसे कब्जा, नामांतरण (Mutation) और बंटवारे पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन।
- महिला एवं बाल अधिकार, घरेलू हिंसा, भरण-पोषण और शोषण के खिलाफ कानूनी अधिकारों की जानकारी।
- दीवानी और फौजदारी मामले, एफआईआर दर्ज कराना, जमानत की प्रक्रिया, पुलिस कार्यवाही और आपसी अनुबंध जैसे जटिल विषयों पर स्पष्टता।
- सामाजिक कल्याण योजनाएं, पेंशन, राशन कार्ड, और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने पर कानूनी विकल्प।
- उपभोक्ता अधिकार, खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी या खराब सेवा के खिलाफ शिकायत की प्रक्रिया।
मुफ्त न्याय का अधिकार
बस्तर के ग्रामीणों के लिए जिला मुख्यालय जाना न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि आने-जाने का खर्च और दिहाड़ी का नुकसान भी है। शासन द्वारा निर्धारित पात्र श्रेणियों (जैसे महिलाएं, बच्चे, अनुसूचित जाति/जनजाति के लोग) के लिए यह सेवा पूरी तरह से निःशुल्क है। अन्य लोगों के लिए भी यह बेहद मामूली शुल्क पर उपलब्ध है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्थानीय प्रशासन और वीएलई की भूमिका
इस योजना की सफलता के पीछे सीएससी मैनेजरों और वीएलई (VLE) की कड़ी मेहनत है। सीएससी मैनेजर श्री प्रदीप कुमार के अनुसार, “एक कॉल – एक समाधान” के मंत्र के साथ बस्तर के हर गांव को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वीएलई न केवल पंजीकरण करते हैं, बल्कि वे ग्रामीणों और वकीलों के बीच एक विश्वसनीय सेतु का काम भी कर रहे हैं। प्रशासन ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी छोटी-छोटी कानूनी उलझनों के लिए बिचौलियों के चक्कर में न पड़ें और सीधे इस सरकारी सेवा का लाभ उठाएं।
Positive सार
जगदलपुर और बस्तर के सुदूर गाँवों में वकीलों का वीडियो कॉल पर उपलब्ध होना इस बात का प्रमाण है कि विकास अब केवल शहरों तक सीमित नहीं है। ‘टेली-लॉ’ योजना ने न केवल न्याय को सुलभ बनाया है, बल्कि आदिवासियों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता भी पैदा की है। यह पहल सही मायने में ‘न्याय सबके द्वार’ की परिकल्पना को साकार कर रही है।
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