पंडित सुंदरलाल शर्मा क्यों कहे जाते हैं छत्तीसगढ़ के संकल्पनाकार?

भारत विविधताओं और अनकही कहानियों का देश है। हर राज्य की अपनी अलग पहचान और इतिहास है, लेकिन कुछ कहानियां हैं जो किताबों में नहीं मिलतीं। छत्तीसगढ़ का निर्माण और उसकी पहचान भी ऐसी ही अनसुनी गाथा है, जिसमें पिरोई गई है राज्य के इतिहास, उसके नक्शे और उन लोगों की कहानी जिन्होंने इसे अपने सपनों से बनाया – खासकर पंडित सुंदरलाल शर्मा।

प्राचीन और मध्यकालीन छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ प्राचीन काल में ‘दक्षिण कोशल’ के नाम से जाना जाता था। उस समय इसकी सीमाएं आज के छत्तीसगढ़ से कहीं बड़ी थीं। यहां के लोगों की संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक ढांचा अत्यंत समृद्ध था।

मध्यकाल में यह भूमि कई छोटे-बड़े राज्यों और किलों में बंटी हुई थी। कलचुरी, गोंड और मराठा शासकों ने यहां का प्रशासनिक और सांस्कृतिक नक्शा बार-बार बदल दिया। हर गढ़ और राज्य ने अपनी छाप छोड़ी, जिससे छत्तीसगढ़ का इतिहास और भी विविध और समृद्ध हुआ।

प्रशासनिक बदलाव और नक्शा

साल 1862 में छत्तीसगढ़ मध्यप्रांत बरार का हिस्सा बना, जिसमें बिलासपुर और रायपुर को जिले का दर्जा मिला। तब भी छत्तीसगढ़ का कोई अलग नक्शा नहीं था।

1905 में बंगाल के विभाजन के समय, बंगाल प्रेसीडेंसी और मध्य प्रदेश के हिस्सों को मिलाकर छत्तीसगढ़ का पहला बड़ा प्रशासनिक नक्शा तैयार किया गया।

गढ़ व्यवस्था

छत्तीसगढ़ का प्रशासनिक ढांचा पहले गढ़ व्यवस्था पर आधारित था। महानदी के उत्तर में 18 गढ़ और दक्षिण में 18 गढ़ थे। 1905 में बंगाल विभाजन के दौरान, छत्तीसगढ़ के 5 गढ़ उड़ीसा में चले गए, जबकि उड़ीसा के कुछ जिले (जैसे जशपुर, सरगुजा, उदयपुर, चांगभखार, कोरिया) छत्तीसगढ़ में शामिल कर दिए गए।

यह नक्शा केवल प्रशासनिक नहीं था – यह सांस्कृतिक और भाषाई पहचान का भी प्रतीक था।

छत्तीसगढ़ के संकल्पनाकार

1918 में पंडित सुंदरलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ का पहला वैचारिक और ऐतिहासिक नक्शा तैयार किया। उनके लिए यह नक्शा केवल रेखाएं नहीं, बल्कि लोगों की पहचान, उनकी संस्कृति और स्वतंत्रता की दिशा थी।

पंडित शर्मा ने ग्रामीण क्षेत्रों में फैली कुरीतियों, अंधविश्वास और सामाजिक असमानताओं के खिलाफ संघर्ष किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को लोगों के बीच फैलाया और अलग राज्य की संकल्पना को मजबूत किया। महात्मा गांधी ने उनके हरिजन उद्धार कार्यों की सराहना की और उन्हें ‘छत्तीसगढ़ का गांधी’ कहा।

पंडित सुंदरलाल शर्मा की गाथा आज भी जीवित है। उनके नाम पर बना पंडित सुंदरलाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय शिक्षा और जागरूकता का केंद्र है। उनके सपनों ने छत्तीसगढ़ को न केवल नक्शे पर, बल्कि लोगों के दिलों में भी स्थापित किया।

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Rishita Diwan

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