IIT मंडी के रिसर्चर कर रहे हैं खराब हो चुके सोलर सेल को रीसाइकल, जानें क्या हैं इसके फायदे?


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी मंडी (IIT Mandi) के शोधकर्ताओं ने खराब हो चुके सोलर सेल्स की रीसाइक्लिंग के तरीकों पर काम किया है। इस संस्थान में रीसाइक्लिंग और उत्पादन में प्रयोग होने वाले विभिन्न सामग्रियों और प्रक्रियाओं की तुलना भी की गई है। डॉ. सत्वशील रमेश पोवार, सहायक प्रोफेसर, मैकेनिकल और मैटेरियल्स इंजीनियरिंग स्कूल, आईआईटी मंडी की लीडरशिप में इस रिसर्च को पूरा किया गया है। इसके अलावा रिसर्चर ने सौर सेल के घटकों और सामग्री के प्रभावी रीसाइक्लिंग के लिए नीति और औद्योगिक समाधानों की भी सिफारिश की है। इस शोध के विश्लेषण को जर्नल “रिसोर्सेस, कंसर्वेशन एंड रीसाइक्लिंग” में पब्लिश किया गया है। इस पेपर में क्रिस्टलीन सिलिकॉन (सी-एसी) और कैडमियम टेलुराइड (सीडीटी) पीवी मॉड्यूल के जीवन चक्र का मूल्यांकन हुआ है। साथ ही उनके पर्यावरणीय प्रभाव और रीसाइक्लिंग के लाभ का भी व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत हुआ है।

सौर कचरा होगा कम

सौर सेल मॉड्यूलों का जीवनकाल लगभग 30 वर्ष तक होता है। इसके कारण देश में 2050 तक 4.4 से 7.5 मिलियन टन तक सौर सेल कचरा बनता है। 2030 तक ही सौर पैनल कचरे की पहचान सबसे ज्यादा फैले कचरे के रूप में हो सकती है। इस पर्यावरणीय चुनौती का सामना करने के लिए सौर सेल कचरे का पुन: उपयोग, रीसाइक्लिंग, और उस कचरे से मूल्यवान संसाधनों को पुनः प्राप्त करने के विभिन्न पहलुओं को पर ध्यान देना और उनको समझना ज्यादा जरूरी है।

सेल मॉड्यूलों की रीसाइक्लिंग से कैडमियम, टेलुरियम, इंडियम, गैलियम, और जर्मेनियम जैसे मूल्यवान संसाधनों को फिर से उपयोग किया जा सकता है। ये संसाधन कम मात्रा में उपलध होते हैं जबकि उद्योगों के अन्दर इसको बहुत अधिक मांग है। आईआईटी मंडी के इस रिसर्च में सी-एसी और सीडीटी पीवी मॉड्यूल से कांच, धातु, और सेमीकंडक्टर सामग्री के खनन और शुद्धिकरण की प्रक्रिया को पारंपरिक खनन और उत्पादन विधियों से तुलना हुई है। इस रिसर्च से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारों और इंडस्ट्री को अपने स्तर हितधारकों को हरित प्रमाणपत्र लागू करने और इसके लिए प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यक्ता है। इस कदम से पीवी उद्योग की रीसाइक्लिंग और खनिजों की पुनः प्राप्ति को बढ़ावा देने में मदद होगी। रिसर्चर ने इसके अलावा सौर सेल मॉड्यूल के डिस्पोजल के दौरान कचरे को कम करने के लिए पीवी मॉड्यूल के डिज़ाइन को अनुकूलित करने की सिफारिश भी की है।

इस प्रभावी रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को प्रोत्साहित करते हुए और उचित नीतियों को अमल में लाते हुए पर्यावरण के अनुकूल स्थायी पीवी उद्योग को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अपने पब्लिश कार्य के आधार पर, आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने एक व्यापक रीसाइक्लिंग विधि को विकसित किया है जिसमें रिड्यूस, रीयूज, रीपर्पज, रिपेयर, रीफर्बिश, रीडिजाइन, रीमैन्युफैक्चर और रीसायकल विधियों को शामिल किया है।

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Dr. Kirti Sisodia

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