जिंदगी को जीना सिखा रही हैं अंकिता श्रीवास्तव, न खुद हारी न दूसरों को हारने दिया!

जिंदगी में सबकुछ अच्छा हो ये जरूरी नहीं है। कठिनाईयां हर किसी के जीवन से होकर गुजरती है। कुछ लोग इससे डर जाते हैं तो कुछ लोग अलग रास्ते बनाते हैं और मंजिल को पा जाते हैं। ऐसे ही रंग अपने जीवन में भर रही अंकिता श्रीवास्तव की कहानी है। जिनका जीवन ही प्रेरणा है। उन्होंने मुश्किल स्थितियों से दो-दो हाथ किए और बन गईं एक प्रेरणादायी सच्ची कहानी का अंश…
ये कहानी है उस युवा लड़की की जो एक सक्सेफुल सीरियल आंत्रप्रेन्योर की जो एक ऑर्गन डोनर, ट्रांसप्लांट गेम्स में रिकॉर्ड बना चुकी हैं। दरअसल जब अंकिता 13 साल की थी तब उनकी मां को लिवर सिरोसिस हो गया था, जो कि हेपेटाइटिस-संक्रमित रक्त के संक्रमण की वजह से हुआ था। एक समय ऐसा आया कि उनकी मां को लिवर की जरूरत पड़ी तब अंकिता ही इकलौती थीं, जिनका लीवर मैच हुआ। लेकिन अंकित तब तक लीवर का हिस्सा दान नहीं कर सकती थीं जब तक वे 18 वर्ष की न हो जाएं। ये सोचना ही कितना मुश्किल है।
अंकिता जब बड़ी हुईं तो उन्होंने अपने लीवर का 74% हिस्सा अपनी मां को दान कर दिया, लेकिन ट्रांसप्लांट के तीन महीने बाद उनकी मां का निधन हो गया। अंकिता के लिए ये क्षण काफी मुश्किल भरा था। एक वेबासाइट को दिए साक्षात्कार में अंकिता कहती हैं कि “बीमार अस्पताल में जाना और स्वस्थ होकर वापस सरल बात है। मेरे लिए इसका विपरित था। मैं 18 दिनों तक आईसीयू में रही और चलने में दो महीने का समय लग गया। जैसे ही मुझे ठीक होने का आभास हुआ, मेरी माँ का गुजर गईं।” दुर्भाग्य से, उनके पिता ने भी परिवार का साथा छोड़ दिया, और उन्होंने खुद को अकदम अकेला पाया।

मुश्किल ने अंकिता को बनाया आज वो दूसरों के लिए प्रेरणा

उन्होंने खुद को खत्म नहीं होने दिया। उन्होंने जो भी पाया अपने दम पर पाया. आज, वे एक सीरियल आंत्रप्रेन्योर हैं, अंग दान के बारे में जागरूकता फैलाती हैं। यही नहीं वे अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक संघ द्वारा आयोजित वर्ल्ड ट्रांसप्लांट गेम्स की एथलीट और वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर के रूप में भी अपनी पहचान रखती हैं।

संघर्षों से भरा रहा सफर

19 साल की उम्र में उन्हें बेहद संघर्षों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी दादी का साथ पाया। अंकिता को अपने कॉलेज की फीस भरने के लिए कमाई का तरीका खोजना पड़ा। उन्होंने होम टाउन भोपाल में एक प्रिंटिंग और पब्लिशिंग फर्म से जुड़कर नौकरी की। जो मैटल, वार्नर ब्रदर्स, स्पाइडरमैन, सुपरमैन और अन्य बड़े ब्रांडों के लिए लाइसेंसधारक थे।
यही पर अंकिता की दुनिया बदली। उन्होंने आईपी और मनोरंजन की दुनिया में सीरियल आंत्रप्रेन्योर बनने के लिए प्रेरणा ली। पिछले सात सालों से, उन्होंने आठ ब्रांड (प्री-स्कूल एनीमेशन कैरेक्टर) तैयार किए हैं। इसमें 25 देशों में उपलब्ध पर्पल टर्टल भी हैं।
अंकिता ने खुद के लिए एक नया जीवन तैयार किया है। वे एक आंत्रप्रेन्योर के रूप में सफलता तो चाहती ही हैं साथ ही एक एथलीट के रूप में भारत के लिए खेलना भी उनका सपना है। वे अंग दाता बनने के लिए प्रेरक वार्ता के माध्यम से दूसरों को प्रेरित भी कर रही हैं।
 
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Dr. Kirti Sisodia

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