एशिया पैसिफिक देशों के लिए जेवर एयरपोर्ट बनेगा ट्रांजिट हब, जानें क्यों खास है ये एयरपोर्ट!

देश के सबसे बिजी इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सिर्फ 72 किमी की दूरी पर भारत का सबसे बड़ा जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनकर तैयार होने वाला है। साल 2022 से नोएडा में 1334 हेक्टेयर में बन रहे इस एयरपोर्ट के पहले चरण का 55% काम पूरा हो गया है। 7 हजार मजदूरों ने इसे मिलकर बनाया है।

इस एयरपोर्ट को बनाने वाली कंपनी टाटा प्रोजेक्ट के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट का कहना है कि इसके पहले चरण में 45 बिल्डिंग का काम है इनमें से 25 का ढांचा तैयार है। साल के आखिरी तक 3900 मीटर लंबा एक रनवे और 38 मीटर ऊंचा एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर बन कर पूरा हो जाएगा।

खास है जेवर एयरपोर्ट

29 हजार 650 करोड़ रुपए खर्च कर बनाए जा रहे इस एयरपोर्ट पर कुल 5 रनवे बनेंगे, जिन पर 7 करोड़ यात्री हर साल आ-जा सकेंगे। सालाना 90 हजार से अधिक फ्लाइट्स की जरूरत यहां पड़ेगी। 40 साल तक इस एयरपोर्ट को स्विस कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल चलाने वाली है। पूरा बनने के बाद ये एयरपोर्ट दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा।


जेवर एयरपोर्ट यमुना एक्सप्रेस-वे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ेगा। इसके लिए एनएचएआई ने 537 करोड़ जारी कर दिए हैं। यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ने के लिए 750 मी. की सिक्स लेन सड़क भी बनाई जाएगी। साथ ही दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर दादरी से गुजरेगा, जो यमुना एक्सप्रेस-वे के साथ लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग हब को बढ़ाने का काम करेगी। अमेरिका, जापान जैसे देशों की 10 से अधिक कंपनियां एयरपोर्ट के पास यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे यूनिट लगाने का काम कर रही है।

यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण देश की पहली पॉड टैक्सी सेवा की शुरूआत करने वाली है। ये जेवर और नोएडा एयरपोर्ट को फिल्म सिटी से जोड़ने का काम करेगी। 20 मिनट की यात्रा में 12 स्टेशन रहेंगे। पहले चरण में 101 पॉड शामिल होंगे, जिसमें इनमें 6 लोग बैठ सकेंगे।

जेवर के निर्माण के साथ एनसीआर में दो बड़े एयरपोर्ट भी होंगे। दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 का विस्तार साल के आखिरी में होगा। अगले एक साल एनसीआर से हर घंटे 100 से अधिक उड़ानें की जाएंगी। करीब 11.50 करोड़ यात्री सालाना सफर की सुविधा ले सकेंगे।

देश में पहली बार मिलेंगी ये सुविधाएं

•    पूरा एयरपोर्ट कॉन्टैक्टलैस, डिजिटल, ग्रीनफील्ड से लेस होगा
•    एयरपोर्ट की डिजाइन में फोरकोर्ट, कोर्टयार्ड, लैंडस्कैप दिखाई देगा।
•    छत नदियों की तरह लहरदार बनेगी।
•    बोर्डिंग जोन में बड़ा ग्रीनजोन भी होगा। स्थानीय वास्तुकला, जलवायु अनुकूल शैली में लाउंज शामिल होगा।
•    बस, कार, टैक्सी के साथ मेट्रो और हाई स्पीड रेल नेटवर्क यात्रियों को उपलब्ध कराने वाला ये मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्टेशन हब पहली बार बनेगा।
•    विमान के आसान मोड़ के लिए एप्रन स्टैंड पर पहली बार स्विंग स्टैंड लगाया जाएगा।
•    नेट जीरो एनर्जी, नेट जीरो कार्बन इमीशन, नेट जीरो वेस्ट और वाटर वाला ये देश का पहला एयरपोर्ट होगा।
•    एयरपोर्ट पर विमानों की मरम्मत और रखरखाव की सुविधा भी होगी। अभी बड़ी मरम्मत के लिए विमान सिएटल या फ्रांस भेजते हैं। एमआरओ के लिए सरकार एयरबस, बोइंग और दूसरी कंपनियों से बातचीत कर रही है। जल्द ग्लोबल टेंडर जारी किए जाएंगे।

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Dr. Kirti Sisodia

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